आगरा में एसआई कारगिल वीर से डीसीपी का नाम लेकर करता रहा सौदेबाजी, 20 लाख की रिश्वत मांगने का आरोप, निलंबित
आगरा के इरादत नगर थाने में तैनात एसआई मानवेंद्र गंगवार पर कारगिल युद्ध लड़ चुके पूर्व सैनिक नगेंद्र कुमार से जमीन कब्जे के मुकदमे में चार लोगों के नाम हटाने के लिए 20 लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता ने पुलिस कमिश्नर को बातचीत का वीडियो भी सौंपा, जिसमें एसआई कथित रूप से DCP का नाम लेकर प्रति व्यक्ति 5 लाख रुपये मांगता सुनाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद एसआई को निलंबित कर दिया गया है। DCP अभिषेक अग्रवाल ने विभागीय जांच के आदेश देते हुए मामले की जांच ACP शमशाबाद को सौंप दी है।
जमीन कब्जे के मुकदमे से चार लोगों के नाम हटाने के लिए मांगे 5-5 लाख रुपये, पूर्व सैनिक ने पुलिस कमिश्नर को सौंपा वीडियो, विभागीय जांच शुरू
आगरा। आगरा पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां कारगिल युद्ध लड़ चुके एक पूर्व सैनिक ने इरादत नगर थाने के एसआई मानवेंद्र गंगवार पर 20 लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है। आरोप है कि जमीन कब्जे के एक मुकदमे में चार लोगों के नाम हटाने के एवज में प्रति व्यक्ति 5 लाख रुपये की मांग की गई।
मामला तब और गंभीर हो गया जब पूर्व सैनिक ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत के साथ बातचीत का वीडियो भी सौंप दिया। वीडियो में एसआई कथित तौर पर न सिर्फ रिश्वत की रकम तय करता सुनाई दे रहा है, बल्कि डीसीपी का नाम लेकर पैसे की मांग करता भी नजर आ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और एसआई मानवेंद्र गंगवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
वीडियो में ‘रेट’ तय करता दिखा एसआई
शिकायत के साथ सौंपे गए वीडियो में एसआई कथित रूप से कहता सुनाई दे रहा है कि “सभी लोगों के नाम निकलवाने हैं तो 5 लाख रुपये प्रति व्यक्ति देने होंगे। डीसीपी साहब को बस रुपये चाहिए।” इतना ही नहीं, वीडियो में वह यह भी कहता है कि “मुझे 60 हजार रुपये में चौकी इंचार्ज बनाया जा रहा था, लेकिन मेरी दो महीने बाद शादी है। चौकी इंचार्ज तो मैं जब चाहूंगा तब बन जाऊंगा।”
इस कथित बातचीत ने पूरे मामले को और ज्यादा गंभीर बना दिया है, क्योंकि इसमें न केवल रिश्वत मांगने का आरोप है, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल कर दबाव बनाने की बात भी सामने आई है।
पूर्व सैनिक ने पुलिस कमिश्नर को सौंपे सबूत
मामले में शिकायतकर्ता नगेंद्र कुमार, जो कि कारगिल युद्ध के पूर्व सैनिक बताए जा रहे हैं, ने पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया कि विवेचक लगातार उन्हें पैसे देने के लिए दबाव बना रहा था। नगेंद्र कुमार का कहना है कि एसआई ने उन्हें कई बार बुलाया, फोन पर बात की और जल्द से जल्द पैसों का इंतजाम करने को कहा। आरोप है कि यदि रुपये नहीं दिए गए तो मुकदमे में नाम बनाए रखते हुए एफआर लगाने और जेल भेजने की धमकी दी जा रही थी।
2025 में दर्ज हुई थी जमीन कब्जे की एफआईआर
जानकारी के मुताबिक, इरादत नगर थाने में वर्ष 2025 में जयप्रकाश शर्मा, गजेंद्र पाल, वातेंद्र, नगेंद्र और सत्यवीर के खिलाफ जमीन कब्जे का मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले की विवेचना एसआई मानवेंद्र गंगवार कर रहे थे। शिकायत के अनुसार, विवेचना के दौरान ही एसआई ने कथित रूप से केस से नाम हटाने के लिए रिश्वत की डिमांड शुरू कर दी। आरोप है कि चार लोगों के नाम हटाने के लिए कुल 20 लाख रुपये मांगे गए।
पूर्व सैनिक नगेंद्र कुमार ने अपनी शिकायत में कहा है कि रिटायरमेंट के बाद उन्होंने साल 2021 में रोहता निवासी जयप्रकाश से जमीन का बैनामा कराया था। इसके बाद दाखिल-खारिज भी हो गई और वह जमीन पर विधिवत काबिज भी हैं। लेकिन उनका आरोप है कि करीब पांच साल बाद अचानक उनके समेत चार अन्य लोगों के खिलाफ फर्जी तरीके से जमीन कब्जे का मुकदमा दर्ज करा दिया गया। नगेंद्र कुमार का कहना है कि यह मुकदमा पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण है और उन्हें अनावश्यक रूप से फंसाया जा रहा है।
हाईकोर्ट से स्टे, फिर भी नाम हटाने के लिए रिश्वत की मांग
मामले में नगेंद्र, वातेंद्र और सत्यवीर ने हाईकोर्ट से स्टे ऑर्डर भी प्राप्त कर लिया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने विवेचक को अपनी ओर से सभी जरूरी साक्ष्य और दस्तावेज भी उपलब्ध करा दिए थे। इसके बावजूद आरोप है कि विवेचक नाम हटाने के लिए प्रति व्यक्ति 5 लाख रुपये की मांग करता रहा। शिकायत में कहा गया है कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो गिरफ्तारी और जेल भेजने की धमकी दी जा रही थी।
वीडियो सामने आते ही एसआई निलंबित
मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एसआई मानवेंद्र गंगवार को निलंबित कर दिया। डीसीपी अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि एसआई के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। पूरे मामले की जांच ACP शमशाबाद को सौंपी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत, वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जाएगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस की साख पर सवाल
कारगिल युद्ध लड़ चुके एक पूर्व सैनिक से कथित रिश्वत मांगने का मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। जिस सैनिक ने देश की रक्षा के लिए सीमा पर दुश्मन से लड़ाई लड़ी, उसे ही अपने ही शहर में न्याय पाने के लिए रिश्वत मांगने के आरोपों से जूझना पड़ रहा है—यह सवाल आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। अब सबकी निगाहें विभागीय जांच पर टिकी हैं कि क्या यह मामला सिर्फ निलंबन तक सीमित रहेगा या फिर इसमें बड़े स्तर पर भी कार्रवाई होगी।