आगरा हुआ श्याममय, “हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा” के जयकारों संग निकली सूरजगढ़ निशान यात्रा
आगरा में मंगलवार को “मैं लाड़ला खाटू वाले का परिवार सेवा समिति” द्वारा निकाली गई सूरजगढ़ की निशान यात्रा ने पूरी ताजनगरी को श्याम भक्ति में सराबोर कर दिया। नीले-पीले ध्वज, “हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा” के जयकारों और रथ पर विराजमान खाटू नरेश के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सूरजगढ़ मंदिर के महंत हजारी लाल महाराज ने श्री मनःकामेश्वर महादेव मंदिर से यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रावत पाड़ा, कचहरी घाट और छत्ता बाजार होते हुए यात्रा जीवनी मंडी स्थित श्री खाटू श्याम मंदिर पहुंची, जहां शंखनाद के बीच आरती कर मंदिर के शिखर पर सूरजगढ़ का निशान अर्पित किया गया। 19 मार्च को दो लाड़ली बहनों का विवाह और 20 मार्च को अंजलि द्विवेदी की प्रस्तुति के साथ भव्य संकीर्तन का आयोजन भी होगा।
नीले-पीले ध्वज, रथ पर विराजमान खाटू नरेश और सूरजगढ़ के पावन निशान के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु, ताजनगरी भक्ति में सराबोर
आगरा। हाथों में सजे नीले-पीले ध्वज, जुबां पर गूंजते “हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा” के गगनभेदी जयकारे और खाटू श्याम भजनों की स्वर लहरियों के बीच मंगलवार को पूरी ताजनगरी श्याम भक्ति में सराबोर नजर आई। मैं लाड़ला खाटू वाले का परिवार सेवा समिति द्वारा निकाली गई सूरजगढ़ की निशान यात्रा ने आगरा की सड़कों को भक्ति, उल्लास और आस्था के रंग में रंग दिया। रथ पर विराजमान खाटू नरेश के दर्शन पाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, वहीं सूरजगढ़ के पावन निशान के नीचे पहुँचकर भक्त स्वयं को धन्य मानते दिखे।
निशान यात्रा का शुभारंभ सूरजगढ़ मंदिर के महंत हजारी लाल महाराज ने श्री मनःकामेश्वर महादेव मंदिर से हरी झंडी दिखाकर किया। यात्रा के आरंभ होते ही श्याम भक्तों में उत्साह का ज्वार उमड़ पड़ा। भजनों, जयकारों और धार्मिक उल्लास के साथ निकली यह यात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से होकर आगे बढ़ी और श्रद्धालु पूरे मार्ग में नाचते-गाते बाबा श्याम की भक्ति में लीन नजर आए।
फाल्गुन मेले की परंपरा से जुड़ी यात्रा
समिति के अध्यक्ष राकेश राजपूत ने बताया कि यह यात्रा सैकड़ों वर्षों पुरानी परंपरा से जुड़ी हुई है और फाल्गुन मेले का एक प्रमुख आकर्षण मानी जाती है। उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु किसी कारणवश सूरजगढ़ नहीं जा पाते, उनके लिए आगरा में इस यात्रा का आयोजन किया जाता है, ताकि वे भी इस दिव्य परंपरा से जुड़कर धर्मलाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने बताया कि यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को संकीर्तन, भक्ति और सामूहिक आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी है।
बारह स्थानों पर हुआ डोले का स्वागत
यात्रा के दौरान मार्ग में बारह स्थानों पर खाटू श्याम के डोले का भव्य स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने पुष्पवर्षा, आरती और जयकारों के साथ बाबा श्याम के डोले का अभिनंदन किया। समिति की ओर से इस यात्रा के माध्यम से पूरे नगर को आगामी संकीर्तन महोत्सव में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया गया। यात्रा के हर पड़ाव पर भक्ति का उत्साह देखते ही बन रहा था। कई स्थानों पर श्रद्धालु बाबा श्याम के भजनों पर झूमते नजर आए, तो कहीं महिलाएं सिर पर निशान लेकर आस्था के साथ आगे बढ़ती दिखीं।
समिति के सचिव अजय कुमार गोला और कोषाध्यक्ष कपिल सिंघल ने बताया कि निशान यात्रा रावत पाड़ा, कचहरी घाट और छत्ता बाजार होते हुए जीवनी मंडी स्थित श्री खाटू श्याम मंदिर पहुंची। पूरे मार्ग में दूर-दराज से आए महिला-पुरुष श्रद्धालु “सूरजगढ़ निशान में तू जाकर देख ले, मोर छड़ी तू लगवा के देख ले” जैसे भावपूर्ण भजनों का गायन करते हुए आगे बढ़ते रहे।
मंदिर पहुंचने पर शिखर पर चढ़ाया गया सूरजगढ़ का निशान
जब यात्रा श्री खाटू श्याम मंदिर, जीवनी मंडी पहुंची, तो वहां शंखनाद, घंटों की ध्वनि और जयकारों के बीच श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बन गया। मंदिर में आकर्षक श्रृंगार से सजे खाटू श्याम जी की भव्य आरती उतारी गई। इसके बाद परंपरा के अनुसार मंदिर के शिखर पर सूरजगढ़ का पावन निशान अर्पित किया गया। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक अनुभूति से भरा रहा। निशान अर्पण के दौरान अनेक भक्त हाथ उठाकर बाबा श्याम के जयकारे लगाते रहे।
कल होगा दो लाड़ली बहनों का विवाह
समिति की ओर से 19 मार्च को श्री खाटू श्याम मंदिर में दो लाड़ली बहनों का विवाह पूर्ण विधि-विधान और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न कराया जाएगा। यह आयोजन सामाजिक सरोकार और सेवा भावना का भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है, जिसमें भक्ति के साथ समाजसेवा का सुंदर समन्वय देखने को मिलेगा।
20 मार्च को भव्य संकीर्तन, अंजलि द्विवेदी देंगी प्रस्तुति
समिति ने जानकारी दी कि 20 मार्च को आयोजित होने वाले भव्य संकीर्तन में प्रख्यात भजन गायिका अंजलि द्विवेदी अपनी विशेष प्रस्तुति देंगी। इसके साथ ही स्थानीय भजन गायक भी बाबा श्याम की महिमा से जुड़े भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर करेंगे।
सूरजगढ़ के निशान की 300–350 वर्ष पुरानी विशेष मान्यता
सूरजगढ़ मंदिर के महंत हजारी लाल ने सूरजगढ़ के निशान की विशेष मान्यता बताते हुए कहा कि यह परंपरा लगभग 300 से 350 वर्ष पुरानी है। उन्होंने बताया कि एक समय मंदिर के शिखर पर निशान चढ़ाने को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था। तब यह शर्त रखी गई कि जो भक्त बंद मंदिर का ताला खोलेगा, उसी का निशान शिखर पर फहराया जाएगा। महंत हजारी लाल के अनुसार, सूरजगढ़ के भक्त मंगलाराम ने यह कार्य कर दिखाया। तभी से हर वर्ष सूरजगढ़ का निशान ही मंदिर के शिखर पर स्थापित किया जाता है। मान्यता है कि इस पावन निशान के नीचे आने मात्र से भक्तों का सोया हुआ भाग्य जाग उठता है और जीवन में सुख, समृद्धि और मंगलमय मार्ग प्रशस्त होता है।
ये रहे कार्यक्रम में उपस्थित
इस अवसर पर समिति और समाज के अनेक पदाधिकारी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से अध्यक्ष राकेश राजपूत, सचिव अजय कुमार गोला, कोषाध्यक्ष कपिल सिंघल, उपाध्यक्ष प्रमोद शर्मा, राजेंद्र सिंह, मुकेश आसीवाल, विपिन अग्रवाल, अमित बंसल, कृष्णकांत गौतम, नीरज राजपूत, दिलीप राजपूत, सार्थक अग्रवाल, ऋषभ गुप्ता, डॉ. धर्मेंद्र यादव, मोहित बंसल, पार्थ गोयल, डॉ. एसके यादव, आशीष अग्रवाल, निमित बिन्दल, सूरजगढ़ मंदिर के महंत हजारी लाल महाराज शामिल रहे।