40 साल से सूखा पड़ा अकबरकालीन तेरहमोरी बांध: सिंचाई विभाग की लापरवाही से फतेहपुर सीकरी प्यासा, जलसंचय की ऐतिहासिक संरचना को फिर से जिंदा करने की उठी मांग
आगरा। पानी की भीषण किल्लत से जूझ रहे आगरा जनपद के फतेहपुर सीकरी क्षेत्र में अकबरकालीन तेरहमोरी बांध को पुनः जल संचय के लिए सक्षम बनाने की मांग तेज हो गई है। सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा की एक टीम ने क्षेत्र का अध्ययन कर पाया कि यदि बांध के क्षतिग्रस्त सुल्यूस गेट की मरम्मत कर दी जाए तो यह ऐतिहासिक जल संरचना आज भी पूरे इलाके के लिए वरदान साबित हो सकती है।
टीम का कहना है कि ऐतिहासिक और हेरिटेज महत्व रखने वाला यह बांध आज फतेहपुर सीकरी के जनजीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सामयिक जरूरत बन चुका है। लेकिन विडंबना यह है कि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के प्रबंधन में आने वाला यह बांध पिछले लगभग 40 वर्षों से उपेक्षा के कारण निष्प्रयोज्य स्थिति में पड़ा है।
सिंचाई विभाग ने मरम्मत का एस्टीमेट तक नहीं बनाया
तेरहमोरी बांध आगरा जनपद का सबसे अधिक जल संचय क्षमता वाला बांध माना जाता है। लेकिन इसके सुल्यूस गेट क्षतिग्रस्त होने के कारण मानसून में आने वाला पानी रुक ही नहीं पाता। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन गेटों और ढांचे की मरम्मत कर दी जाए तो बांध को फिर से जल संचय और नियंत्रित जल प्रवाह की स्थिति में लाया जा सकता है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि सिंचाई विभाग ने अब तक गेटों की मरम्मत के लिए कोई ठोस कार्ययोजना तक तैयार नहीं की है। जब कोई प्रस्ताव ही नहीं बनाया गया तो शासन से स्वीकृति और बजट मिलने की संभावना भी समाप्त हो जाती है।
एक दर्जन से अधिक गांवों का पानी पहुंचता है बांध में
स्थानीय जलग्रहण क्षेत्र से रसूलपुर, सीकरी हिस्सा चतुर्थ, नगर, दादूपुरा, पतसाल समेत एक दर्जन से अधिक गांवों का वर्षा जल स्वाभाविक रूप से इस बांध में पहुंचता है।
राजस्थान की ओर से पतसाल गांव की पुलिया के रास्ते आने वाले अजान बोध के पानी को भले ही रोक दिया गया हो, लेकिन स्थानीय वर्षा जल अभी भी पर्याप्त मात्रा में यहां पहुंचता है। गेट खराब होने के कारण यह पानी रुकने के बजाय बह जाता है, जिससे भूजल रिचार्ज नहीं हो पाता।
शाही तालाब आज भी देता है पानी
फतेहपुर सीकरी में ग्वालियर गेट के पास स्थित ‘शाही तालाब’ आज भी एक महत्वपूर्ण जल संरचना के रूप में मौजूद है। सीकरी की पहाड़ियों के दक्षिणी ढलान और आसपास के बड़े जलग्रहण क्षेत्र से यहां पानी आता है।
तालाब के आसपास के किसान इस पानी का उपयोग सिंचाई के लिए करते हैं। हालांकि नगर पालिका परिषद द्वारा इसकी व्यवस्था देखी जाती है, लेकिन मानसून के समय जल संचय क्षमता सीमित होने के कारण इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाता।
पर्यावरण और टीटीजेड के लिए भी जरूरी
तेरहमोरी बांध के सूखा रहने का असर ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) के पर्यावरण पर भी पड़ रहा है। राजस्थान की ओर से आने वाली धूल भरी हवाएं इस क्षेत्र को प्रदूषित करती हैं।
इन हवाओं में सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर (एसपीएम) और सूक्ष्म कण पीएम10 तथा पीएम2.5 मौजूद रहते हैं, जो फेफड़ों में जाकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनते हैं। यदि बांध में जल संचय हो तो क्षेत्र में नमी बनी रहेगी और धूल भरी हवाओं का प्रभाव कम होगा।
नागरिकों ने उठाई बांध को पुनः चालू करने की मांग
क्षेत्र के बड़े किसान अमरनाथ पाराशर का कहना है कि फतेहपुर सीकरी की स्थलाकृति ढलान वाली है, जिससे शहर का अधिकांश वर्षा जल ड्रेनेज सिस्टम से होकर तेरहमोरी बांध में पहुंच जाता है।
उन्होंने बताया कि पहाड़ियों की मानसूनी जलधाराएं भी इसी बांध में मिलती हैं। तीन ओर पहाड़ियों से घिरा यह बांध प्राकृतिक रूप से जल संचय के लिए अत्यंत उपयुक्त है। यदि सही प्रबंधन किया जाए तो इसका जल क्षेत्र हिरन मीनार तक फैल सकता है।
फतेहपुर सीकरी चार हिस्सा के निवासी पत्रकार महावीर वर्मा ने कहा कि अजान बांध से पानी छोड़े बिना भी स्थानीय जलग्रहण क्षेत्र से इतना पानी आता है कि तेरहमोरी बांध आसानी से भर सकता है।
उन्होंने बताया कि यदि यह बांध पुनः जल संचय योग्य बन जाए तो इससे भूजल स्तर सुधरेगा, किसानों को सिंचाई का पानी मिलेगा और खारी नदी में मानसून के बाद भी प्रवाह बना रहेगा।
महाभारत काल में जल समृद्ध क्षेत्र था सीकरी
इतिहास के अनुसार फतेहपुर सीकरी का प्राचीन नाम ‘साइक’ या ‘सैकरिक्य’ था, जिसका अर्थ है पानी से घिरा क्षेत्र। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा वर्ष 1999-2000 में बीर छबीली टीला की खुदाई में भी इस क्षेत्र के जल समृद्ध होने के प्रमाण मिले हैं।
महाभारत काल में युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ के दौरान सहदेव ने इस जल समृद्ध क्षेत्र के राजाओं को पराजित कर कर वसूला था।
अकबर ने बनाया था विशाल झील तंत्र
मुगल सम्राट अकबर ने इस प्राकृतिक जल संरचना को विकसित कर विशाल झील और रेगुलेटर के रूप में तैयार कराया था। यह कृत्रिम झील लगभग 32 किलोमीटर के घेरे में फैली थी और इसे ‘सीकरी झील’ या ‘गुलाबी झील’ भी कहा जाता था।
यह झील रसूलपुर से लेकर सीकरी की पहाड़ी तक फैली हुई थी और शहर के लिए मुख्य जल स्रोत होने के साथ-साथ किले की उत्तरी दिशा के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम भी करती थी।
आज बदहाली का शिकार
आज यह ऐतिहासिक जलाशय पूरी तरह सूख चुका है। संसद में सांसद राजकुमार चाहर के प्रश्न के जवाब में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि तेरहमोरी बांध की मरम्मत के लिए धन उपलब्ध कराने का प्रावधान उत्तर प्रदेश सरकार के पास है।
इसके बावजूद सिंचाई विभाग के तृतीय मंडल के अधिशासी अभियंता के अधीन आने वाले इस बांध के गेटों को ठीक करने के लिए पिछले पांच वर्षों से कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई है।
अध्ययन करने पहुंची सिविल सोसाइटी टीम
सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा की टीम ने क्षेत्र का दौरा कर स्थिति का अध्ययन किया। टीम में अनिल शर्मा, राजीव सक्सेना, राजेंद्र शुक्ला और असलम सलीमी शामिल थे।

फतेहपुर सीकरी में नागरिकों के साथ तेरहमोरी बांध को लेकर चर्चा करते सिविल सोसाइटी ऒफ आगरा के पदाधिकारी।
टीम का कहना है कि यदि प्रशासन और सिंचाई विभाग थोड़ी गंभीरता दिखाए तो अकबरकालीन यह ऐतिहासिक बांध फिर से फतेहपुर सीकरी और आसपास के गांवों के लिए जीवनदायिनी जल संरचना बन सकता है।