जुर्माना भरकर ओवरलोड ट्रक को आगे जाने देना सड़क सुरक्षा के खिलाफ, केसी जैन ने सुप्रीम कोर्ट में उठाया मुद्दा
नई दिल्ली। ओवरलोड वाहनों से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं और मौतों के खिलाफ आगरा के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता के. सी. जैन ने सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी कार्रवाई की मांग उठाई है। सड़क सुरक्षा से जुड़े मामले में जैन ने स्वयं अदालत के समक्ष उपस्थित होकर कहा कि केवल जुर्माना या अतिरिक्त टोल वसूलकर ओवरलोड वाहन को आगे जाने देना सड़क सुरक्षा के उद्देश्य को पूरा नहीं करता। उनका जोर इस बात पर रहा कि वाहन से अतिरिक्त भार उतरवाकर दोबारा वजन कराया जाए और निर्धारित सीमा में आने के बाद ही उसे आगे जाने दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में जैन की ओर से दायर अंतरिम आवेदन संख्या 233571/2025 को ओवरलोडिंग से होने वाली दुर्घटनाओं से संबंधित आवेदन के रूप में दर्ज किया गया है।
जैन ने न्यायालय के समक्ष भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओवरलोडिंग संबंधी मानक कार्यप्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करने, भार मापन व्यवस्था को मजबूत करने, इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन तथा अतिरिक्त भार उतारने की प्रक्रिया का नियमित रिकॉर्ड रखने का सुझाव दिया। उनका तर्क है कि आर्थिक दंड लगाने से वाहन का अतिरिक्त भार खत्म नहीं होता और वास्तविक सड़क सुरक्षा तभी सुनिश्चित होगी, जब अतिरिक्त भार हटाया जाए।
जैन ने खुद पेश होकर रखे सुझाव
सुप्रीम कोर्ट के सड़क सुरक्षा संबंधी मामले में के. सी. जैन व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर विभिन्न सड़क सुरक्षा मुद्दों पर सुझाव देते रहे हैं। 15 सितंबर 2026 के आदेश में भी अदालत के रिकॉर्ड में उन्हें ‘इन-पर्सन’ आवेदक के रूप में दर्ज किया गया है। इसी कार्यवाही में ओवरलोडिंग से संबंधित आईए 233571/2025 को भी सूचीबद्ध किया गया था।
जैन ने ओवरलोडिंग के मामले में यह सवाल उठाया कि यदि वाहन निर्धारित सीमा से अधिक भार लेकर चल रहा है तो केवल जुर्माना या अतिरिक्त शुल्क लेकर उसे उसी भार के साथ आगे जाने की अनुमति कैसे दी जा सकती है। उनके अनुसार अतिरिक्त भार से ब्रेकिंग, टायर, स्टीयरिंग, वाहन के संतुलन और सड़क पर नियंत्रण प्रभावित हो सकता है।
2005 के फैसले का भी दिया हवाला
जैन ने अपने आवेदन में वर्ष 2005 के परमजीत भसीन बनाम भारत संघ मामले का हवाला देते हुए कहा कि जुर्माना भरना अतिरिक्त भार ढोने का अधिकार नहीं देता। उनके अनुसार अतिरिक्त भार हटाना आवश्यक है और इस पुराने कानूनी सिद्धांत को प्रभावी प्रवर्तन के साथ लागू करने की जरूरत है।
ओवरलोडिंग के खिलाफ प्रस्तावित व्यवस्था
जैन के सुझाव का मूल ढांचा ओवरलोड वाहन की पहचान, वाहन को रोकना, अतिरिक्त भार उतरवाना, दोबारा वजन करना और निर्धारित सीमा में आने के बाद ही वाहन को आगे जाने देना है। इसके साथ इलेक्ट्रॉनिक वजन प्रणाली, नियमित आंकड़ों और अधिकारियों की जवाबदेही पर भी जोर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के सड़क सुरक्षा मामले में अदालत पहले भी राज्यों और केंद्र को विभिन्न सड़क सुरक्षा उपायों के अनुपालन और रिपोर्टिंग के निर्देश देती रही है।
पांच वर्षों में 1.40 लाख से अधिक दुर्घटनाओं का दावा
आवेदन में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्टों के आधार पर 2019 से 2023 के बीच ओवरलोड वाहनों से संबंधित 1,40,945 दुर्घटनाओं और 60,082 मौतों के आंकड़े दिए गए हैं। आवेदन के अनुसार इसी अवधि में 61,411 लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि 82,732 अन्य घायल हुए।
28.80 लाख ओवरलोड वाहन पकड़े जाने का दावा
जैन के आवेदन में आरटीआई से प्राप्त जानकारी का भी उल्लेख है। इसके अनुसार 27 टोल प्लाजा से तीन वर्षों में 28,80,115 ओवरलोड वाहनों का पता लगाया गया। आवेदन में सवाल उठाया गया है कि इन वाहनों से अतिरिक्त भार वास्तव में उतरवाए जाने का रिकॉर्ड कितना है। इसी बिंदु को जैन ने ओवरलोडिंग के खिलाफ मौजूदा प्रवर्तन व्यवस्था की बड़ी कमी के रूप में उठाया है।
ओवरलोडिंग से वाहन की ब्रेकिंग दूरी बढ़ने, टायरों पर दबाव बढ़ने, वाहन के संतुलन और नियंत्रण पर असर पड़ने तथा सड़क की संरचना को अधिक नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। जैन का कहना है कि ओवरलोडिंग को केवल आर्थिक दंड के रूप में देखने के बजाय इसे सीधे सड़क सुरक्षा से जोड़कर प्रभावी ढंग से लागू करना जरूरी है।