जयघोष, पुष्पवर्षा और अभूतपूर्व सुरक्षा के बीच बरेली में निकली 166 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक राम बरात, 165 साल पुराने लकड़ी के रथ पर सजा दिव्य श्रीराम दरबार

-रमेश कुमार सिंह- बरेली। आस्था, परंपरा और सामाजिक सौहार्द का विराट संदेश देती हुई बरेली की ऐतिहासिक राम बरात सोमवार को पूरे वैभव और अनुशासन के साथ निकली। ब्रह्मपुरी स्थित नृसिंह मंदिर से प्रारंभ हुई यह राम बरात अपने 166वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है, जबकि 165 वर्ष पुराने लकड़ी के रथ पर विराजमान प्रभु श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान का दिव्य दरबार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा। जैसे ही मंत्रोच्चार और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद रथ के पहिए आगे बढ़े, पूरा क्षेत्र जय श्रीराम के गगनभेदी जयघोष से गूंज उठा।

Mar 2, 2026 - 19:45
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जयघोष, पुष्पवर्षा और अभूतपूर्व सुरक्षा के बीच बरेली में निकली 166 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक राम बरात, 165 साल पुराने लकड़ी के रथ पर सजा दिव्य श्रीराम दरबार
बरेली में सोमवार को निकली 166 साल पुरानी एतिहासिक राम बरात की एक झलक।

करीब 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की मौजूदगी में निकली राम बरात नृसिंह मंदिर से मलूकपुर चौराहा, बिहारीपुर ढाल, कुतुबखाना घंटाघर, नावल्टी चौराहा, बरेली कॉलेज गेट, कालीबाड़ी, श्यामगंज, साहू गोपीनाथ, मठ की चौकी, शिवाजी मार्ग, बड़ा बाजार, किला चौराहा और सिटी सब्जी मंडी से होते हुए पुनः मंदिर परिसर पहुंचकर संपन्न हुई। मार्ग में घरों की छतों और बालकनियों से पुष्पवर्षा होती रही, वहीं श्रद्धालुओं ने जगह-जगह जलपान और स्वागत की व्यवस्था की।

राम दरबार, हनुमान लीला और धार्मिक प्रसंगों पर आधारित आकर्षक झांकियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। रंग-बिरंगे परिधान, जीवंत प्रस्तुतियां और ढोल-नगाड़ों की थाप ने पूरे शहर को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी उल्लास में डूबे नजर आए। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी कई स्थानों पर पुष्पवर्षा कर राम बारात का स्वागत किया, जिससे आपसी भाईचारे की मिसाल कायम हुई।

चंद्रग्रहण के कारण इस वर्ष राम बारात को होली से एक दिन पूर्व निकाला गया। रामलीला सभा के प्रवक्ता विशाल मेहरोत्रा ने बताया कि सूतक काल में भगवान के स्वरूप को रथ पर नहीं बैठाया जाता, इसी कारण परंपरा के अनुरूप समय में परिवर्तन किया गया। इसके बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी और आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग राम बारात के साक्षी बने।

सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व रही। पुलिस अधीक्षक नगर मनुष्य पारीक के अनुसार शोभायात्रा को लेकर पुलिस-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। पांच क्षेत्राधिकारी, पांच थाना प्रभारी, सात इंस्पेक्टर, बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी और महिला कांस्टेबल तैनात किए गए। एक कंपनी पीएसी और आरएएफ राम बारात के साथ चलती रही। संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन से निगरानी की गई, जबकि सादी वर्दी में पुलिसकर्मी हुरियारों की टोली में शामिल होकर हर गतिविधि पर नजर बनाए रहे।

सौहार्द बनाए रखने के लिए मार्ग में पड़ने वाली 50 से अधिक मस्जिदों और इमामबाड़ों को एहतियातन तिरपाल से ढंका गया, ताकि रंग या अन्य सामग्री वहां तक न पहुंचे। नगर निगम और पुलिस टीमों ने यह कार्य पूर्व संध्या पर ही पूरा कर लिया था। पेयजल व्यवस्था के लिए 15 स्थानों पर 17 टैंकर लगाए गए।

श्रद्धा, अनुशासन और भाईचारे के अद्भुत संगम के साथ देर शाम जब राम बरात पुनः मंदिर पहुंची, तो पूरा शहर इस ऐतिहासिक परंपरा का साक्षी बनकर गौरवान्वित नजर आया।

SP_Singh AURGURU Editor