विश्वगुरु और अमृतकाल के दावों के बीच अब जनता को त्याग का पाठ पढ़ा रही भाजपा, सपा महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास का केंद्र सरकार पर तीखा हमला
आगरा। समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि चुनावों के दौरान जनता को बड़े-बड़े सपने दिखाने वाली भाजपा अब आर्थिक संकट के दौर में आम लोगों पर त्याग और कटौती थोप रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने वोट लेते समय विकास, समृद्धि और विश्वगुरु भारत का सपना दिखाया, लेकिन अब हकीकत यह है कि जनता से कहा जा रहा है कि सोना मत खरीदो, पेट्रोल बचाओ, तेल कम खाओ, विदेश मत जाओ और शादी-ब्याह भी सादगी से करो।
शब्बीर अब्बास ने कहा कि प्रधानमंत्री के हालिया बयान यह साबित करते हैं कि देश आर्थिक बदहाली की तरफ धकेला जा चुका है। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों से भाजपा ‘5 ट्रिलियन इकॉनमी’, ‘अमृतकाल’ और ‘विश्वगुरु’ जैसे नारों का प्रचार करती रही, लेकिन अब जनता को खर्च कम करने और जरूरतें घटाने की सलाह दी जा रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि देश की अर्थव्यवस्था वास्तव में इतनी मजबूत है तो फिर हर संकट में केवल आम जनता से ही त्याग क्यों मांगा जा रहा है। उन्होंने कहा कि क्या बड़े उद्योगपतियों के मुनाफे कम हुए हैं? क्या भाजपा के प्रचार-प्रसार पर होने वाला अरबों रुपये का खर्च रोका गया है? क्या मंत्रियों के काफिले छोटे किए गए हैं? यदि नहीं, तो फिर केवल गरीब और मध्यम वर्ग को ही बलिदान देने के लिए क्यों कहा जा रहा है।
सपा महानगर अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की गलत आर्थिक नीतियों, बेलगाम महंगाई और पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाली नीतियों ने देश की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा कि अब जब हालात बिगड़ रहे हैं तो सरकार जनता को ‘कम खाओ, कम चलो और कम खर्च करो’ का उपदेश दे रही है।
शब्बीर अब्बास ने कहा कि देश का गरीब पहले ही महंगाई से टूटा हुआ है। रसोई गैस महंगी है, खाद्य पदार्थ महंगे हैं, शिक्षा और इलाज महंगा हो चुका है, पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है और अब सरकार लोगों से कह रही है कि अपनी जरूरतें ही कम कर दो।
उन्होंने कहा कि देश जनता की थाली छोटी करके नहीं चल सकता। सरकार को अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए जनता पर त्याग थोपना बंद करना चाहिए। पहले भाजपा को अपने महंगे प्रचार अभियान, इवेंटबाजी और पूंजीपतियों पर मेहरबानी रोकनी चाहिए, उसके बाद जनता को नसीहत देनी चाहिए।