अमित शाह ने सदन में राहुल की गैर मौजूदगी पर उठाया सवाल, बोले- जब बोलने का मौका होता है तब  विदेश में होते हैं एलओपी,  विपक्ष से कहा- किसी मुगालते में ना रहें

लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ संकल्प पत्र पर जवाब के दौरान अमित शाह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा। शाह ने संसद में महत्वपूर्ण मौके पर राहुल गांधी की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठाए। इस पर विपक्ष की तरफ से सदन में हंगामा हुआ।

Mar 11, 2026 - 19:16
Mar 11, 2026 - 20:00
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 अमित शाह ने सदन में राहुल की गैर मौजूदगी पर उठाया सवाल, बोले- जब बोलने का मौका होता है तब  विदेश में होते हैं एलओपी,  विपक्ष से कहा- किसी मुगालते में ना रहें

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में राहुल गांधी की गैरमौजूदगी पर निशाना साधा। अमित शाह ने राहुल गांधी को कांग्रेस पार्टी का बड़ा नेता बताते हुए कहा कि शीतकालीन सत्र के दौरान वो जर्मनी की यात्रा पर थे। जब जब संसद सत्र चलता है, विदेश यात्रा लग जाती है और फिर कहते हैं कि बोलने नहीं देते। जो व्यक्ति विदेश में है, यहां कैसे बोलेगा। यहां वीडियो कॉन्फ्रेंस की सुविधा नहीं है।

उन्होंने कहा कि 17वीं लोकसभा में गांधी की अटेंडेंस लगभग 51 परसेंट थी, जबकि नेशनल एवरेज लगभग 66-67 परसेंट है। शाह ने कहा कि 16वीं लोकसभा में गांधी की अटेंडेंस 52 परसेंट थी, जबकि हाउस का एवरेज लगभग 80 परसेंट था और 15वीं लोकसभा में उनकी अटेंडेंस लगभग 43 परसेंट थी, जबकि नेशनल एवरेज 76 परसेंट था। शाह ने इस दौरान राहुल गांधी के सदन में आंख मारने का भी जिक्र किया।

लोकसभा में हंगामे के दौरान, कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने अमित शाह के भाषण को बीच में ही टोक दिया। वेणुगोपाल ने चर्चा के फोकस पर सवाल उठाया। वेणुगोपाल ने पूछा कि क्या बहस स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बारे में थी या विपक्ष के नेता के बारे में। उनकी यह टिप्पणी तब आई जब शाह के राहुल गांधी के अटेंडेंस रिकॉर्ड की आलोचना करने के दौरान सदन में तनाव बढ़ गया।

शाह के भाषण को लेकर विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। इस पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि माननीय अगर मेरा शब्द कोई संसदीय मर्यादा के अनुकूल नहीं होगा तो उसे कार्यवाही से हटा दीजिएगा। इसके बाद आसन पर बैठे जगदंबिका पाल ने कहा कि माननीय गृहमंत्री जी का जवाब या वक्त्वय में कोई शब्द असंसदीय होगा तो कार्यवाही का हिस्सा नहीं बनने दूंगा। उन्होंने कहा कि मैंने यह रूलिंग दे दी है।
वहीं, शाह के बोलने के दौरान विपक्षी सांसदों ने नारे लगाए और ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ। जब गृह मंत्री ने 15वीं से 17वीं लोकसभा में राहुल गांधी की मौजूदगी के आंकड़े पढ़े, तो सदस्यों ने 'अमित शाह माफी मांगो जैसे नारे लगाए। विरोध के बीच, शाह ने गुस्से में कहा कि सदस्यों को अब उनकी बात सुननी होगी।

गृहमंत्री अमित शाह ने सदन में विपक्ष के संकल्प पर चर्चा का जवाब देते हुए लोकसभा के स्पीकर के सदन को सुचारु रूप से संचालन संबंधी अधिकारों का जिक्र किया। इसके साथ ही लोकसभा सदस्यों के अधिकारों का भी जिक्र किया। उन्होंने इसके साथ ही विपक्ष को नसीहत भी दे डाली। शाह ने कहा कि आपको संविधान के तहत अधिकार है लेकिन विशेषाधिकार नहीं है। उन्होंने विपक्ष पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि आप लोग किसी मुगालते में ना रहे हैं। शाह ने कहा कि जो नियमानुसार नहीं चलेगा उसका माइक बंद ही हो जाना चाहिए।

शाह ने कहा कि सदन आपसी विश्वास से चलता है। पक्ष और विपक्ष के लिए स्पीकर कस्टोडियन होते हैं। उन्होंने कहा कि सदन कैसे चलेगा इसके लिए नियम बनाए गए हैं। केंद्रीय गृहमंत्री कहा कि यह सदन कोई मेला नहीं है। सदन चलाने के लिए सदन के नियमों के अनुसार बोलना पड़ता है। शाह ने कहा कि लोकसभा के नियम हमारे समय में नहीं बने हैं। उन्होंने कहा कि सदन में नियम के अनुसार सबको बोलना होता है। शाह ने कहा कि स्पीकर के निर्णय पर शंका नहीं कर सकते हैं।

शाह के कहा कि स्पीकर का निर्णय से असहमति व्यक्त कर सकते हैं लेकिन निर्णय की निष्ठा पर सवाल उठाना निंदनीय है। उन्होंने कहा कि जब आप स्पीकर की निष्ठा पर सवाल करते हो तो यह अफसोसजनक घटना है। उन्होंने कहा कि देश के लोकतंत्र में अनेक परिवर्तन हुए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ही अधिक समय तक सत्ता में ही रही है।

शाह ने कहा कि संसद के इतिहास में लोकसभा स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव आया लेकिन हमने कभी इसका समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा कि हम कभी भी स्पीकर के सामने अविश्वास का प्रस्ताव लेकर नहीं आए। उन्होंने कहा कि अब तक तीन अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले दल इस समय एक साथ हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास में आए तीनों प्रस्ताव ध्वनि मत से खारिज हो गए थे।

शाह ने कहा कि मैं राजनीतिक आरोप नहीं लगाऊंगा लेकिन राजनीतिक आरोपों का जवाब जरूर दूंगा। उन्होंने कहा कि लोकसभा स्पीकर के कार्यवाही के बारे में किए गए फैसलों पर सर्वोच्च अदालत भी दखल नहीं कर सकती है। शाह ने कहा कि अध्यक्ष का प्रथम कर्तव्य है कि व्यवस्था और नियम को बनाए रखना।

शाह ने विपक्ष की तरफ से प्रस्ताव की गंभीरता को लेकर भी सवाल उठाया। शाह ने प्रस्ताव में संलग्नक और तारीख की गलतियों का जिक्र किया। केंद्रीय मंत्री ने उच्च नैतिकता और गंभीरता का जिक्र करते हुए कहा कि दो बार प्रस्ताव में गड़बड़ी के बाद भी विपक्ष को प्रस्ताव का मौका दिया गया। शाह ने कहा कि विपक्ष नियम को नहीं मानता है और कहते हैं कि हमें बोलने नहीं दिया जाता।