भाजपा में अंदरूनी घमासान, ‘बागी’ को नामित पार्षद बनाने पर बवाल, भाजपा पार्षद शरद चौहान ने खोला मोर्चा
आगरा नगर निगम में चुनाव के दौरान भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले संजय राय को नामित पार्षद बनाए जाने पर भाजपा के वार्ड 95 पार्षद शरद चौहान ने खुलकर विरोध जताया है। उन्होंने वरिष्ठ नेताओं को पत्र लिखकर इसे संगठनात्मक अनुशासन और कार्यकर्ताओं की भावना के खिलाफ बताया है। मामला केवल वार्ड 95 तक सीमित नहीं है, क्योंकि चुनाव के दौरान कई दावेदारों को समायोजन और नामित पार्षद बनाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन सूची में नाम न आने से भाजपा के भीतर असंतोष बढ़ गया है। इस मुद्दे ने आगरा नगर निगम और स्थानीय राजनीति में हलचल तेज कर दी है।
आगरा। आगरा नगर निगम में नामित पार्षदों की सूची जारी होते ही भाजपा के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। वार्ड 95 से भाजपा पार्षद शरद चौहान ने तो चुनाव के दौरान पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ मैदान में उतरे संजय राय को नामित पार्षद बनाए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज करा दिया है। इस मुद्दे पर उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को लिखित आपत्ति भेजते हुए निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है।
पार्षद शरद चौहान ने अपने पत्र में साफ तौर पर कहा है कि जिस व्यक्ति ने नगर निगम चुनाव में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ा हो, उसे बाद में नामित पार्षद जैसी जिम्मेदारी देना न केवल संगठनात्मक अनुशासन के खिलाफ है, बल्कि यह पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता की भावनाओं के भी विपरीत है।
पार्षद ने आरोप लगाया कि वार्ड 95 में भाजपा प्रत्याशी के सामने चुनाव लड़ने वाले संजय राय को अब नगर निगम में नामित पार्षद बनाया गया है, जिससे जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा में ऐसे अनेक समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने वर्षों तक पार्टी संगठन को मजबूत करने में योगदान दिया, लेकिन उनके बजाय चुनाव में पार्टी लाइन के खिलाफ खड़े होने वाले व्यक्ति को महत्व देना सवाल खड़े करता है।
पार्षद चौहान ने यह भी कहा कि इस तरह के फैसले से पार्टी की छवि और अनुशासन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। उनका कहना है कि यदि बागी तेवर दिखाने वालों को बाद में पदों से नवाजा जाएगा, तो इससे भविष्य में संगठनात्मक व्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। उन्होंने वरिष्ठ पदाधिकारियों से आग्रह किया है कि मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर इस निर्णय की समीक्षा की जाए।
सिर्फ वार्ड 95 तक सीमित नहीं है मामला
सूत्रों के अनुसार, यह नाराज़गी केवल वार्ड 95 तक सीमित नहीं है। नगर निगम चुनाव के दौरान कई ऐसे नेता और दावेदार थे, जिन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, जनप्रतिनिधियों और कुछ विधायकों की ओर से यह आश्वासन दिया गया था कि चुनावी समीकरणों को देखते हुए यदि उन्हें मैदान से हटाया गया या समझौते के तहत बैठाया गया, तो भविष्य में उनका “सही समायोजन” किया जाएगा। इनमें से कुछ को नामित पार्षद बनाए जाने का भी संकेत दिया गया था।
लेकिन अब जब नामित पार्षदों की सूची में उनके नाम शामिल नहीं हुए, तो भाजपा के भीतर कई स्तरों पर असंतोष और बेचैनी बढ़ गई है। पार्टी के अंदर यह चर्चा तेज है कि जिन लोगों ने संगठन के लिए त्याग किया, उन्हें दरकिनार कर ऐसे चेहरों को प्राथमिकता दी गई, जिनकी भूमिका चुनाव में विवादित रही।
नगर निगम और स्थानीय राजनीति में चर्चा तेज
इस पूरे घटनाक्रम ने आगरा नगर निगम की राजनीति को गर्मा दिया है। स्थानीय राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या नामित पार्षदों की नियुक्ति में संगठनात्मक निष्ठा, चुनावी अनुशासन और कार्यकर्ताओं के योगदान को पर्याप्त महत्व दिया गया या नहीं। भाजपा के अंदरूनी समीकरणों पर भी इस फैसले का असर पड़ता दिखाई दे रहा है।
फिलहाल, शरद चौहान की लिखित आपत्ति के बाद यह मामला पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व तक पहुंच गया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी इस विरोध को किस तरह संभालती है और क्या नामित पार्षद को लेकर लिए गए निर्णय पर कोई पुनर्विचार होता है या नहीं।