भाजपा में अब ‘दंडवत राजनीति’, सांसद के सामने नवनियुक्त मंत्री के दंडवत प्रणाम ने बढ़ाई सियासी गर्मी

भाजपा महानगर कार्यकारिणी की घोषणा के बाद पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष के बीच एक वायरल वीडियो ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। वीडियो में हाल ही में बने भाजपा महानगर मंत्री अनिल सारस्वत, राज्यसभा सांसद नवीन जैन के सामने दंडवत प्रणाम करते नजर आ रहे हैं। इस दृश्य ने भाजपा की संगठनात्मक संस्कृति, नेताओं के प्रति सार्वजनिक निष्ठा और राजनीतिक चाटुकारिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जबकि विपक्ष भी इसे बड़ा मुद्दा बना सकता है।

Mar 19, 2026 - 21:31
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भाजपा में अब ‘दंडवत राजनीति’,  सांसद के सामने नवनियुक्त मंत्री  के दंडवत प्रणाम ने बढ़ाई सियासी गर्मी
नवनियुक्त महानगर मंत्री अनिल सारस्वत राज्यसभा सदस्य नवीन जैन को दंडवत प्रणाम करते हुए।

कार्यकारिणी घोषणा से उपजा असंतोष थमा भी नहीं था, तभी वायरल वीडियो ने खोली ‘चाटुकारिता बनाम संगठन संस्कृति’ की नई बहस

आगरा। भाजपा महानगर कार्यकारिणी की घोषणा के बाद पार्टी के भीतर उठी नाराजगी और असंतोष की लहर अभी शांत भी नहीं हुई थी कि अब एक नए वायरल वीडियो ने सियासी हलकों में नई हलचल पैदा कर दी है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में हाल ही में भाजपा महानगर मंत्री बनाए गए अनिल सारस्वत, राज्यसभा सांसद नवीन जैन के सामने दंडवत प्रणाम करते नजर आ रहे हैं।

वीडियो सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। विपक्ष इसे भाजपा की “आंतरिक चाटुकारिता की संस्कृति” का प्रतीक बता रहा है, तो वहीं संगठन के भीतर भी इसे लेकर दबे स्वर में सवाल उठने लगे हैं।

दरअसल, महानगर कार्यकारिणी की नई सूची जारी होने के बाद से ही कई दावेदारों और कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष की चर्चा थी। ऐसे समय में यह वीडियो सामने आना सिर्फ एक सामान्य सम्मान का दृश्य नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे नियुक्तियों, नजदीकियों और शक्ति-संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा जैसी कैडर आधारित पार्टी, जो अनुशासन और संगठनात्मक संस्कृति की बात करती है, वहां इस तरह का सार्वजनिक दंडवत प्रणाम कई सवाल खड़े करता है। क्या यह एक नेता के प्रति व्यक्तिगत श्रद्धा है? क्या यह पद मिलने के बाद राजनीतिक निष्ठा का सार्वजनिक प्रदर्शन है? या फिर यह पार्टी के भीतर बढ़ती ‘व्यक्तिपूजा’ का संकेत है?

सोशल मीडिया पर वीडियो को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी दो धड़ों में बंटी हुई हैं। एक वर्ग इसे भारतीय संस्कार और सम्मान की परंपरा बता रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे राजनीति में चाटुकारिता का जीवंत उदाहरण करार दे रहा है। विपक्षी दलों और भाजपा विरोधी खेमे को भी इस वीडियो ने बड़ा मुद्दा दे दिया है। वे इसे भाजपा के अंदरूनी समीकरणों, पद पाने की राजनीति और नेताओं के इर्द-गिर्द बनते शक्ति-केंद्रों से जोड़कर हमला बोल सकते हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पार्टी के भीतर नई कार्यकारिणी को लेकर पहले से असंतोष है, तब इस तरह की तस्वीरें और वीडियो संगठन के लिए संदेश क्या दे रहे हैं? क्या यह कार्यकर्ताओं के बीच यह धारणा मजबूत करेगा कि मेहनत से ज्यादा ‘नजदीकी’ मायने रखती है? क्या इससे संगठनात्मक मनोबल प्रभावित होगा?

फिलहाल, यह वायरल वीडियो भाजपा महानगर की नई कार्यकारिणी से ज्यादा चर्चा में है।
और अब सियासी गलियारों में एक ही सवाल तैर रहा है कि  “क्या भाजपा में संगठन बड़ा है, या व्यक्तियों के प्रति सार्वजनिक समर्पण?”