यूपी में भाजपा का ‘मिशन 2027’ तेज, हार वाली सीटों पर तावड़े ने मांगा हिसाब

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने संगठनात्मक तैयारियों को तेज कर दिया है। प्रदेश कार्यकारिणी और विभिन्न मोर्चों के गठन के बाद अब पार्टी का फोकस चुनावी सीटों के माइक्रो मैनेजमेंट पर है। प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने क्षेत्रीय अध्यक्षों से 2017, 2022 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजों का तुलनात्मक विश्लेषण मांगते हुए हार के कारण और संभावित समाधान बताने को कहा है। चार सह-प्रभारियों को विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी देकर जमीनी समीक्षा कराई जाएगी। 3-4 अक्टूबर को मथुरा में होने वाली भाजपा की चिंतन बैठक में भी चुनावी रणनीति पर व्यापक मंथन प्रस्तावित है।

Oct 2, 2026 - 01:14
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यूपी में भाजपा का ‘मिशन 2027’ तेज, हार वाली सीटों पर तावड़े ने मांगा हिसाब
भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े प्रदेश पदाधिकारियों, क्षेत्रीय अध्यक्षों के साथ प्रदेश कार्यालय में बैठक करते हुए।

क्षेत्रीय अध्यक्षों से तीन चुनावों के नतीजों का मांगा विश्लेषण, हार के कारणों के साथ समाधान भी बताना होगा, तीसरी बार वापसी के लिए अब बूथ से विधानसभा तक बनेगा रोडमैप, चार सह-प्रभारियों को जल्द मिलेंगी विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारियां

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी अब संगठन से लेकर चुनावी मैदान तक अपनी मशीनरी को सक्रिय करने में जुट गई है। प्रमुख मोर्चों की प्रदेश कार्यकारिणी और क्षेत्रीय अध्यक्षों की घोषणा के बाद पार्टी ने अब सीधे उन सीटों पर फोकस करना शुरू कर दिया है, जहां पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में उसे झटका लगा था। पार्टी नेतृत्व का लक्ष्य 2017 के प्रदर्शन को आधार बनाकर 2027 के लिए कमजोर कड़ियों की पहचान करना और उनके समाधान की कार्ययोजना तैयार करना है।

इसी क्रम में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने गुरुवार को लखनऊ में क्षेत्रीय अध्यक्षों के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों का फीडबैक लिया। उन्होंने क्षेत्रीय नेतृत्व से सिर्फ आंकड़े जुटाने के बजाय यह पता लगाने को कहा कि किस सीट पर पार्टी क्यों हारी और उस कमजोरी को 2027 से पहले कैसे दूर किया जा सकता है। रिपोर्ट में हार के कारणों के साथ संभावित समाधान भी शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

तीन चुनावों के नतीजों को जोड़कर तैयार होगी रिपोर्ट

तावड़े ने क्षेत्रीय अध्यक्षों के सामने तीन प्रमुख सवाल रखे हैं। पार्टी अब इन्हीं सवालों के आधार पर विधानसभा क्षेत्रों का चुनावी विश्लेषण तैयार करेगी।

पहला सवाल— 2017 में भाजपा जिन विधानसभा सीटों पर चुनाव जीत चुकी थी, उन सीटों पर 2022 में पार्टी को हार क्यों मिली?

दूसरा सवाल— 2022 में जिन विधानसभा सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की, वहां 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी क्यों हार गए?

तीसरा सवाल— ऐसी विधानसभा सीटें, जहां भाजपा को 2017 और 2022 दोनों चुनावों में हार मिली, वहां लगातार कमजोरी के क्या कारण हैं?

इन सवालों के जरिए पार्टी विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव के बीच मतदाताओं के रुझान में आए बदलाव को समझने की कोशिश कर रही है। खास तौर पर उन सीटों की पहचान की जा रही है, जहां विधानसभा चुनाव में भाजपा की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत रही, लेकिन लोकसभा चुनाव में उसी क्षेत्र में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा।

2022 की जीत और 2024 की हार के बीच तलाशा जा रहा अंतर

भाजपा के लिए 2024 लोकसभा चुनाव के आंकड़े भी इस समीक्षा का महत्वपूर्ण आधार हैं। उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में भाजपा 2024 में 33 सीटों पर सिमट गई, जबकि 2019 में उसने 62 सीटें जीती थीं। दूसरी ओर 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 255 सीटें जीती थीं। ऐसे में पार्टी संगठन अब यह समझने में जुटा है कि विधानसभा चुनाव में मिली बढ़त का लोकसभा चुनाव में कई जगहों पर उसी अनुपात में फायदा क्यों नहीं मिला।

भाजपा की समीक्षा अब केवल विधानसभा सीटों तक सीमित नहीं है। पार्टी स्तर पर बूथवार राजनीतिक स्थिति, सामाजिक समीकरण, संगठन की सक्रियता और मतदाताओं के रुझान को भी देखा जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, भाजपा ने 2022 में जीते करीब 18,900 बूथों पर 2024 में हुए बदलाव को भी अपनी आंतरिक समीक्षा का हिस्सा बनाया है।

हार का कारण ही नहीं, समाधान भी बताना होगा

तावड़े ने क्षेत्रीय अध्यक्षों को स्पष्ट किया कि रिपोर्ट महज समीक्षा रिपोर्ट नहीं होगी। इसमें यह भी बताना होगा कि जिन सीटों पर पार्टी कमजोर हुई है, वहां वापसी के लिए क्या किया जा सकता है। यानी किसी सीट पर हार का कारण यदि संगठन की कमजोरी है तो संगठन को मजबूत करने का उपाय क्या होगा। यदि स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधि और संगठन के बीच समन्वय की कमी सामने आती है तो उसे कैसे दूर किया जाएगा। इसी तरह सामाजिक समीकरण, स्थानीय मुद्दे, बूथ प्रबंधन और मतदाताओं से संपर्क जैसे विषयों पर भी क्षेत्रवार रिपोर्ट तैयार की जाएगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इन रिपोर्टों के आधार पर विधानसभा क्षेत्रों के लिए आगे की चुनावी रणनीति तय की जाएगी। पहले कमजोर सीटों की पहचान, फिर वहां संगठन की सक्रियता और उसके बाद लगातार फीडबैक लेने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

चार सह-प्रभारियों को मिलेंगी विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारियां

भाजपा ने यूपी चुनाव की तैयारियों को और व्यवस्थित करने के लिए प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े के साथ चार सह-प्रभारियों को भी जिम्मेदारी दी है। अनंत ओझा, मेधा कुलकर्णी, प्रदीप वर्मा और जगदीश ईश्वरभाई पटेल को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी जाएगी। ये सह-प्रभारी अपने-अपने क्षेत्रों में दौरा कर संगठन की स्थिति, चुनावी तैयारियों और विधानसभा क्षेत्रों के फीडबैक की समीक्षा करेंगे। इससे पार्टी की चुनावी रणनीति को प्रदेश मुख्यालय से सीधे विधानसभा और क्षेत्रीय स्तर तक ले जाने की कोशिश दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में सह-प्रभारियों के दौरे बढ़ने की संभावना है।

मोर्चों की टीम के बाद अब जिलाध्यक्षों की बारी

प्रदेश मुख्यालय में हुई बैठक में तावड़े ने संगठनात्मक विस्तार को भी चुनावी तैयारियों से जोड़ा। अग्रिम मोर्चों की प्रदेश टीम घोषित होने के बाद अब जिलाध्यक्षों की घोषणा जल्द करने के निर्देश दिए गए हैं। भाजपा के लिए जिला संगठन चुनावी मशीनरी की महत्वपूर्ण कड़ी है। जिलाध्यक्षों के जरिए मंडल, बूथ और शक्ति केंद्र स्तर तक संगठनात्मक गतिविधियों को गति दी जाती है। ऐसे में जिलाध्यक्षों की घोषणा के बाद चुनावी तैयारियों को और अधिक जमीनी स्तर पर ले जाने की कवायद तेज हो सकती है। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह की मौजूदगी में क्षेत्रीय अध्यक्षों, प्रदेश महामंत्रियों, क्षेत्रीय प्रभारियों और अग्रिम मोर्चों के प्रदेश अध्यक्षों का सह-प्रभारियों से परिचय भी कराया गया।

मथुरा की चिंतन बैठक में बनेगा बड़ा चुनावी खाका

भाजपा की चुनावी तैयारियों के अगले बड़े पड़ाव के तौर पर 3 और 4 अक्टूबर को मथुरा में दो दिवसीय चिंतन बैठक प्रस्तावित है। इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता और संगठन के प्रमुख पदाधिकारी शामिल होंगे। बैठक में प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, संगठन की तैयारियों और 2027 के चुनावी रोडमैप पर चर्चा होनी है। ब्रज क्षेत्र को बैठक के लिए चुना जाना भी संगठनात्मक समीक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। 2017 में भाजपा ने ब्रज क्षेत्र की 65 विधानसभा सीटों में से 57 पर जीत दर्ज की थी, जो 2022 में घटकर 53 रह गई। वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने ब्रज की 13 में से 12 सीटें जीती थीं, जबकि 2024 में यह संख्या आठ रह गई।

2017 के प्रदर्शन को फिर हासिल करने की कोशिश

भाजपा नेतृत्व के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती 2027 के लिए संगठन को चुनावी मोड में पूरी तरह सक्रिय करने की है। पार्टी 2017 के प्रदर्शन को एक संदर्भ के तौर पर देखते हुए उन सीटों का हिसाब लगा रही है, जहां समय के साथ उसका जनाधार कमजोर हुआ है। गोरखपुर क्षेत्र में भी तावड़े हाल ही में विधानसभा क्षेत्रों से मिले फीडबैक के आधार पर चुनावी तैयारी का खाका तैयार कर चुके हैं। वहां उन्होंने कार्यकर्ताओं से चुनाव का इंतजार किए बिना अभी से सक्रिय होने और बूथ स्तर तक तैयारी मजबूत करने को कहा था।

अब लखनऊ की बैठक में क्षेत्रीय अध्यक्षों को दी गई रिपोर्ट की जिम्मेदारी इसी प्रक्रिया का अगला चरण मानी जा रही है। यानी भाजपा 2027 के लिए केवल चुनावी अभियान की तैयारी नहीं कर रही, बल्कि 2017 से 2024 तक के चुनावी उतार-चढ़ाव का सीटवार हिसाब लेकर संगठनात्मक कमियों को चिह्नित करने की कवायद में जुटी है।

बैठक में प्रदेश महामंत्री अभिजात मिश्रा, दिलीप पटेल, शंकर लोधी, राम प्रताप सिंह और गीता शाक्य, अवध क्षेत्र के अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी, ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल, एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक रावत, एसटी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष विद्याभूषण गोंड और महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष सरोज कुशवाह समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।