बच्चों में ब्रेन फीवर सबसे बड़ा खतरा: 50% दौरों की यही जड़, इंट्राक्रैनियल प्रेशर मॉनिटरिंग से ही बचेगी जान, 44 शोध पत्रों के साथ आगरा में आयोजित न्यूरो आईडीकॉन 2026 का समापन

बच्चों में होने वाले न्यूरोलॉजिकल रोगों में न्यूरो इन्फेक्शन आज नंबर वन कारण बन चुका है और इनमें ब्रेन फीवर सबसे घातक रूप में सामने आ रहा है। समय रहते सही मॉनिटरिंग और उपचार न होने पर यह संक्रमण जानलेवा साबित हो सकता है। इसी गंभीर विषय पर विशेषज्ञों ने आगरा में आयोजित दो दिवसीय न्यूरो आईडी कॉन 2026 में गहन मंथन किया।

Mar 1, 2026 - 21:34
Mar 2, 2026 - 13:38
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बच्चों में ब्रेन फीवर सबसे बड़ा खतरा: 50% दौरों की यही जड़, इंट्राक्रैनियल प्रेशर मॉनिटरिंग से ही बचेगी जान, 44 शोध पत्रों के साथ आगरा में आयोजित न्यूरो आईडीकॉन 2026 का समापन
आगरा के होटल क्लार्क्स शिराज में आयोजित दो दिवसीय न्यूरो आईडीकॉन 2026 के अंतिम दिन के एक सत्र में मौजूद प्रमुख चिकित्सकगण।

आगरा। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के तत्वावधान में होटल क्लार्क्स शिराज में आयोजित दो दिवसीय न्यूरो आईडी कॉन 2026 के दूसरे दिन वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञों ने बच्चों में न्यूरो इन्फेक्शन की भयावहता और आधुनिक इलाज पद्धतियों पर विस्तृत चर्चा की।

पीजीआई चंडीगढ़ के वरिष्ठ चिकित्सक पीजीआई चंडीगढ़ से आए डॉ. सुनित सिंघी ने अपने सत्र में कहा कि बच्चों में मस्तिष्क के भीतर संक्रमण यानी इंट्राक्रैनियल संक्रमण एक आपातकालीन स्थिति है और मृत्यु का प्रमुख कारण भी बन सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संक्रमण मस्तिष्क या मेनिन्जेस को प्रभावित करता है और इससे बचाव के लिए मस्तिष्क के प्रेशर की निरंतर मॉनिटरिंग अत्यंत आवश्यक है।

डॉ. सिंघी ने बताया कि कई बार बच्चों के मस्तिष्क में लगातार दौरे पड़ते रहते हैं, लेकिन माता-पिता को इसकी जानकारी नहीं होती। तेज ब्रेन फीवर के बाद यदि बच्चा बेहोशी की अवस्था में चला जाए तो तत्काल न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए। आधुनिक तकनीकों से की जाने वाली इंट्राक्रैनियल प्रेशर मॉनिटरिंग से मस्तिष्क में संक्रमण की स्थिति स्पष्ट हो जाती है, जिससे इलाज में काफी सहूलियत मिलती है।

कार्यक्रम के दौरान इंटरनेशनल न्यूरोलॉजी ऑफ पीडियाट्रिक्स की अध्यक्ष डॉ. प्रतिभा सिंघी ने कहा कि बच्चों में होने वाले लगभग 50 प्रतिशत दौरों का मुख्य कारण ब्रेन फीवर है। न्यूरो इन्फेक्शन के लक्षण दिखते ही तुरंत उपचार शुरू करना जरूरी है, अन्यथा स्थायी न्यूरोलॉजिकल क्षति का खतरा बढ़ जाता है।

दूसरे सत्र में चीफ ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. राकेश भाटिया ने मस्तिष्क संक्रमण की पहचान में रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल फ्लूइड) की जांच के महत्व पर विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि सही समय पर की गई जांच से रोग की गंभीरता और इलाज की दिशा तय करने में मदद मिलती है। इसके अलावा डॉ. बालासुब्रमण्यम, डॉ. अनीता हेगडे, डॉ. भास्कर और डॉ. सुरेश नाथ एम ने ट्रॉपिकल न्यूरो इन्फेक्शन पर चर्चा करते हुए इसके टीकाकरण और रोकथाम की जानकारी साझा की। वहीं डॉ. संजय जोशी, डॉ. अशोक राय, डॉ. आनंद केशव नाथ और डॉ. एन.सी. प्रजापति ने न्यूरो इन्फेक्शन से जुड़ी अन्य गंभीर बीमारियों पर अपने विचार रखे।

सम्मेलन में पीडा के नेशनल चेयरपर्सन डॉ. संजय घोरपड़े, एओपीएन के नेशनल सेक्रेटरी डॉ. विनीत बनखंडे, आईएपी के प्रदेश अध्यक्ष व ऑर्गेनाइजिंग चेयरपर्सन डॉ. आर.एन. द्विवेदी, एओपीएन के नेशनल चेयरपर्सन डॉ. जितेंद्र कुमार साहू, डॉ. आर.एन. शर्मा, डॉ. प्रदीप चावला, डॉ. संजय सक्सेना, डॉ. संजीव अग्रवाल, डॉ. स्वाति द्विवेदी, डॉ. राहुल पैंगोरिया, डॉ. अभिषेक गुप्ता, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. राजीव जैन, डॉ. सोनिया भट्ट, डॉ. प्रीति जैन, डॉ. अश्विनी यादव, डॉ. अमित सक्सेना और डॉ. मनीष सिंह सहित बड़ी संख्या में विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद रहे।

चीफ ऑर्गेनाइजिंग चेयरपर्सन डॉ. राकेश भाटिया और ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. अरुण जैन ने बताया कि दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर से आए विशेषज्ञों द्वारा 44 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जो न्यूरो इन्फेक्शन के इलाज में चिकित्सकों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे। सम्मेलन में 450 से अधिक डेलीगेट्स ने भाग लिया, जिनमें अंतरराष्ट्रीय वक्ता भी शामिल रहे। समापन अवसर पर डॉ. अरुण जैन ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया तथा चिकित्सकों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।

SP_Singh AURGURU Editor