शहर का पालीवाल पार्क बदहाल: नियमों के बोर्ड चमक रहे, पर शाम होते ही छलकने लगते हैं जाम, गंदगी का भी आलम, क्या उद्यान विभाग सो रहा है?

आगरा। शहर के हृदय में स्थित पालीवाल पार्क की हालत देखकर ऐसा लगता है मानो इसे सरकारी तंत्र ने अपने हाल पर छोड़ दिया हो। उद्यान विभाग ने पार्क में जगह-जगह बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर नियमों की लंबी सूची जरूर टांग दी है, लेकिन इन नियमों का पालन करवाने की जिम्मेदारी निभाने में विभाग पूरी तरह नाकाम दिखाई दे रहा है। परिणाम यह है कि शहर की हरियाली का प्रतीक माना जाने वाला यह पार्क शाम ढलते ही अवांछित गतिविधियों का अड्डा बनता जा रहा है।

Mar 9, 2026 - 18:26
 0
शहर का पालीवाल पार्क बदहाल: नियमों के बोर्ड चमक रहे, पर शाम होते ही छलकने लगते हैं जाम, गंदगी का भी आलम, क्या उद्यान विभाग सो रहा है?
पालीवाल पार्क में सोमवार की सुबह एकत्रित की गईं बीयर की केन।

बोर्डों पर सख्त नियम, जमीन पर खुली मनमानी

पालीवाल पार्क में लगे बोर्डों पर स्पष्ट लिखा गया है कि यहां सिगरेट पीना, गुटखा खाकर थूकना, गंदगी फैलाना और कूड़ा डालना सख्त मना है। इसके अलावा शोभाकार वृक्षों से छेड़छाड़, टूटे पेड़ों की लकड़ी ले जाना, फूल-पत्तियों को तोड़ना तथा पक्षियों को दाना पात्र से बाहर दाना डालना भी प्रतिबंधित बताया गया है।

यहां तक कि सिंचाई के दौरान पाइपों के ऊपर से वाहन निकालने पर भी रोक की चेतावनी दी गई है। लेकिन सवाल यह है कि जब नियमों का पालन कराने वाला ही कोई नहीं, तो इन सूचना पट लगाने का क्या मतलब रह जाता है?

उद्यान विभाग ने ये बोर्ड लगाकर ही कर्तव्य की इतिश्री कर ली है। विभाग के अधिकारी कभी पलटकर नहीं देखते कि पार्क में इन नियमों का पालन हो रहा है अथवा नहीं।

शाम ढलते ही खुल जाती हैं बीयर की केन और शराब की बोतलें

पार्क में नियमित टहलने आने वाले लोगों का कहना है कि शाम होते ही पार्क के कई कोनों में शराब और बीयर की बोतलें खुलने लगती हैं। देर रात तक चलने वाली इन महफिलों के बाद सुबह के वक्त खाली बोतलें और बीयर की केन पूरे पार्क में बिखरी मिलती हैं। पार्क के अंदर विकसित ईको पार्क को तो शराबियों ने अपना अड्डा ही बना लिया लगता है। 

सुबह जब परिवार, बुजुर्ग और महिलाएं टहलने आते हैं तो उन्हें यही गंदगी और शराब की खाली बोतलें दिखाई देती हैं। इससे न केवल पार्क की गरिमा धूमिल होती है बल्कि आने वाले लोगों को भी असहजता का सामना करना पड़ता है।

पहरेदार रहते हुए भी कैसे छलक रहे जाम?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि पार्क में रात के समय पहरेदार भी तैनात रहते हैं। इसके बावजूद अवांछनीय तत्व अंदर घुसकर आराम से शराब पीते हैं और सुबह तक बोतलें बिखरी छोड़ जाते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहरेदारों की मिलीभगत के बिना यह सब संभव ही नहीं है। यदि निगरानी सही तरीके से हो तो पार्क के भीतर ऐसी गतिविधियां रुक सकती हैं।

ईको क्लब संचालक ने उठाई सफाई की जिम्मेदारी

पालीवाल पार्क की खूबसूरती बनाए रखने के लिए लंबे समय से प्रयासरत ईको क्लब के संचालक और पर्यावरण प्रेमी प्रदीप खंडेलवाल सोमवार सुबह पार्क में बिखरी पड़ी शराब की बोतलों और बीयर की केनों को इकट्ठा करते नजर आए।

खंडेलवाल का कहना है कि यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है। जिम्मेदार विभाग ध्यान नहीं देता, इसलिए मजबूरी में उन्हें ही यह काम करना पड़ता है। वे पार्क में पड़ी खाली बोतलों और केनों को एकत्रित कर कूड़ाघर तक पहुंचवाते हैं ताकि पार्क की स्वच्छता बनी रहे।

अफसरों को नहीं दिखती पार्क की सच्चाई?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उद्यान विभाग के अधिकारियों को शायद पार्क में हो रही इन गतिविधियों की जानकारी ही नहीं है। या फिर जानकारी होने के बावजूद वे आंखें मूंदे बैठे हैं।

लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर क्यों अधिकारी अपने एयरकंडीशंड कार्यालयों से बाहर निकलकर कभी पार्क का निरीक्षण नहीं करते। यदि समय-समय पर निरीक्षण हो और जिम्मेदारी तय की जाए तो पालीवाल पार्क को अव्यवस्था और गंदगी से बचाया जा सकता है।

शहर के बीचोंबीच स्थित यह ऐतिहासिक पार्क केवल हरियाली का प्रतीक ही नहीं बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण से भी जुड़ा है। ऐसे में उद्यान विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि वह केवल बोर्ड लगाने तक सीमित न रहे, बल्कि नियमों का सख्ती से पालन भी सुनिश्चित कराए।

SP_Singh AURGURU Editor