आगरा की अदालत का कड़ा रुख: कंगना रनौत पर 500 रुपये का जुर्माना, अधिवक्ता के बार-बार गैरहाजिर रहने पर अंतिम चेतावनी; 3 अप्रैल को बहस की आखिरी तारीख
आगरा। हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ चल रहे किसानों के अपमान और राजद्रोह से जुड़े मामले में स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए ने सख्त रुख अपनाया है। लगातार तीसरी बार उनकी वरिष्ठ अधिवक्ता के कोर्ट में पेश न होने पर अदालत ने कंगना रनौत पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया और बहस के लिए अंतिम अवसर देते हुए अगली सुनवाई की तारीख 3 अप्रैल 2026 तय कर दी।
फिर नहीं पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता
यह मामला स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए के न्यायाधीश अनुज कुमार सिंह की अदालत में विचाराधीन है। सोमवार को इस प्रकरण में बहस निर्धारित थी, लेकिन कंगना रनौत की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अनुसूया चौधरी एक बार फिर अदालत में उपस्थित नहीं हुईं।
उनकी ओर से जूनियर अधिवक्ता सुधा प्रधान और स्थानीय अधिवक्ता विवेक शर्मा अदालत में पेश हुए। उन्होंने प्रार्थना पत्र देकर बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ता की तबीयत खराब होने के कारण वे आगरा आकर बहस करने में असमर्थ हैं, इसलिए सुनवाई के लिए अगली तारीख दी जाए।
वादी पक्ष ने जताया कड़ा विरोध
प्रार्थना पत्र पर वादी रमाशंकर शर्मा की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान और राजवीर सिंह ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने अदालत को बताया कि पिछले तीन सुनवाई तिथियों से विपक्षी पक्ष की अधिवक्ता हर बार बीमारी का हवाला देकर बहस टाल रही हैं।
वादी पक्ष के अधिवक्ताओं ने अदालत से मांग की कि विपक्षी पक्ष को बार-बार मौका देने के बजाय अब बहस का अवसर समाप्त किया जाए, क्योंकि यह न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है।
कोर्ट ने लगाया जुर्माना, दिया अंतिम मौका
हालांकि विपक्षी पक्ष की ओर से उपस्थित अधिवक्ता सुधा प्रधान ने अदालत से बार-बार निवेदन किया कि वरिष्ठ अधिवक्ता को अंतिम अवसर दिया जाए। इसके बाद अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कंगना रनौत पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया और स्पष्ट किया कि अगली तिथि अंतिम अवसर होगी।
कोर्ट ने बहस के लिए 3 अप्रैल 2026 की तिथि नियत करते हुए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।
कोर्ट में पेश की गई सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता दुर्ग विजय सिंह ‘भैया’ ने अदालत में सुप्रीम कोर्ट का एक महत्वपूर्ण निर्णय भी प्रस्तुत किया। उन्होंने दलील दी कि कोई भी अधिवक्ता किसी पक्षकार की ओर से पैरवी कर सकता है, लेकिन वह स्वयं पक्षकार का बयान दर्ज कराने का अधिकार नहीं रखता।
अदालत ने उक्त रूलिंग को रिकॉर्ड में लेते हुए पत्रावली पर संलग्न कर लिया और अगली सुनवाई की तारीख 3 अप्रैल 2026 तय कर दी।
अब इस बहुचर्चित मामले में अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि अदालत पहले ही इसे बहस का अंतिम अवसर घोषित कर चुकी है।