एसआई भर्ती परीक्षा के नाम पर साइबर फ्रॉड, पेपर लीक का झांसा देकर लाखों की ठगी, 3 आरोपी गिरफ्तार

एसआई भर्ती परीक्षा का पेपर दिलाने और चयन कराने का झांसा देकर अभ्यर्थियों से साइबर ठगी करने वाले गिरोह के तीन आरोपियों को एसटीएफ आगरा यूनिट ने राजस्थान से गिरफ्तार किया है। आरोपी टेलीग्राम चैनलों के जरिए पेपर लीक और सेटिंग का दावा कर पैसे वसूलते थे। जांच में सिम कार्ड, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन के जरिए ठगी का नेटवर्क सामने आया है। मामले में साइबर थाना सवाई माधोपुर में मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच जारी है।

Mar 15, 2026 - 01:51
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एसआई भर्ती परीक्षा के नाम पर साइबर फ्रॉड, पेपर लीक का झांसा देकर लाखों की ठगी, 3 आरोपी गिरफ्तार
तीनों आरोपी पुलिस गिरफ्त में।

आगरा। एसआई भर्ती परीक्षा में चयन कराने  और पेपर उपलब्ध कराने का झांसा देकर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले एक बड़े साइबर गिरोह का पर्दाफाश हुआ है।

एसटीएफ आगरा यूनिट ने कार्रवाई करते हुए इस गिरोह से जुड़े तीन आरोपियों शाहिल, साजिद और सुमित को राजस्थान से गिरफ्तार किया है। आरोपी टेलीग्राम चैनलों के जरिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को निशाना बनाते थे और उन्हें भर्ती परीक्षा का पेपर उपलब्ध कराने, पक्की चयन सूची में नाम दिलाने और अंदरूनी सेटिंग का लालच देकर मोटी रकम ऐंठते थे।

जानकारी के मुताबिक, यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर कई चैनल और ग्रुप संचालित कर रहा था। इन चैनलों पर खुद को भर्ती बोर्ड और परीक्षा से जुड़े प्रभावशाली लोगों तक पहुंच रखने वाला बताकर अभ्यर्थियों का विश्वास जीता जाता था। इसके बाद परीक्षार्थियों से कहा जाता था कि उनके पास एसआई भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र, उत्तर कुंजी या एग्जाम से पहले सेटिंग कराने की व्यवस्था है। इस झांसे में आने वाले अभ्यर्थियों से अलग-अलग किस्तों में रकम वसूली जाती थी।

एसटीएफ और भर्ती बोर्ड पहले से ही भर्ती परीक्षा की निगरानी में जुटे हुए थे। परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही थी। इसी दौरान सोशल मीडिया और साइबर माध्यमों के जरिए पेपर दिलाने के दावे सामने आए, जिसके बाद इनपुट के आधार पर एसटीएफ आगरा यूनिट ने जांच तेज की। तकनीकी सर्विलांस, मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की पड़ताल के बाद गिरोह के नेटवर्क तक पहुंच बनाई गई।

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी या किराए पर लिए गए सिम कार्ड, विभिन्न बैंक खातों, और डिजिटल पेमेंट माध्यमों का इस्तेमाल कर साइबर ठगी का पूरा नेटवर्क तैयार किया था। अभ्यर्थियों से ली गई रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराया जाता था, ताकि पुलिस और जांच एजेंसियों को असली मास्टरमाइंड तक पहुंचने में मुश्किल हो। आरोपी पहचान छिपाने के लिए कई मोबाइल नंबरों और वर्चुअल माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे थे।

एसटीएफ की कार्रवाई में यह भी सामने आया कि गिरोह सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं था, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को टारगेट बनाकर “पेपर लीक”, “सेटिंग”, “गैरंटी सेलेक्शन” और “इनसाइड सोर्स” जैसे झूठे दावों के जरिए लंबे समय से ठगी कर रहा था। गिरोह के सदस्य विशेष रूप से उन अभ्यर्थियों को चुनते थे जो भर्ती प्रक्रिया को लेकर तनाव में रहते हैं और जल्दी सफलता पाने के दबाव में ऐसे झांसे में आ जाते हैं।

इस मामले में साइबर थाना सवाई माधोपुर में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस और एसटीएफ अब आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं, कितने अभ्यर्थियों से ठगी की गई है, कुल कितनी रकम वसूली गई, और क्या यह नेटवर्क अन्य राज्यों तक भी फैला हुआ है।

फिलहाल, तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां बैंक खातों, मोबाइल डाटा, टेलीग्राम चैट्स, कॉल डिटेल्स और डिजिटल ट्रांजेक्शन की गहन जांच कर रही हैं। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस गिरोह से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं।

पुलिस और एसटीएफ ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि किसी भी भर्ती परीक्षा में पेपर लीक, सेटिंग, अंदरूनी पहुंच या चयन की गारंटी देने वाले किसी भी व्यक्ति, टेलीग्राम चैनल या सोशल मीडिया अकाउंट पर भरोसा न करें। ऐसे मामलों की सूचना तुरंत संबंधित पुलिस, साइबर सेल या परीक्षा एजेंसी को दें।