रंग नहीं, भक्ति के सुरों से सजी दयालबाग की होली: सतगुरु के सानिध्य में तिलक, सेवा और आध्यात्मिक आनंद से सराबोर हुआ सतसंग जगत
आगरा। फाल्गुन मास के पावन अवसर पर होली का पर्व राधास्वामी मत के अनुयायियों द्वारा दयालबाग में अत्यंत श्रद्धा, आनंद, उल्लास और आध्यात्मिक भावनाओं के साथ मनाया गया। ‘होली खेल है जाने सांवरिया, सतगुरु से सर्व-रंग मिलाई’ के भाव के साथ आयोजित इस विशेष उत्सव में भक्ति, सेवा और सतसंग की अद्भुत छटा देखने को मिली। गुरु महाराज सतसंगी साहब एवं रानी साहिबा की गरिमामयी उपस्थिति में संगत ने आध्यात्मिक होली का आनंद लिया।

ईवी में बैठकर कार्यक्रम देखते गुरु महाराज सतसंगी साहब और रानी साहिबा।
आरती, सतसंग और सेवा के साथ हुआ उत्सव का शुभारंभ
होली के पावन दिवस पर प्रातःकाल सभी सतसंगी भाई-बहनें और बच्चे बड़े उत्साह के साथ आरती पाठ, सतसंग तथा सेवा कार्य के लिए पूर्व निर्धारित डेयरी परिसर में एकत्रित हुए। यहां संगत ने खेतों में गन्ना कटाई और अन्य कृषि कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए सेवा भाव का परिचय दिया।
सतगुरु की कृपा से आरंभ हुआ तिलक उत्सव
कृषि सेवा के बीच ही होली मिलन कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस पावन अवसर पर गुरु महाराज सतसंगी साहब ने तिलक लगवाने की स्वीकृति प्रदान की। इसके बाद गुरु महाराज सतसंगी साहब और रानी साहिबा को तिलक अर्पित किया गया तथा समस्त संगत को भी तिलक लगाया गया। तिलक के साथ ही पूरे सतसंग परिसर में भव्य होली मिलन उत्सव का वातावरण बन गया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न समूहों द्वारा होली विशेष पाठ प्रस्तुत किए गए। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। संत परह्यूमन के बच्चों द्वारा प्रस्तुत मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित संगत को विशेष रूप से आकर्षित किया और पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
खेतों में सेवा और संगत का प्रीतिभोज

होली के दौरान खेतों में काम करते सतसंगी।
दोपहर के समय खेतों में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विशेष प्रीतिभोज का आयोजन किया गया, जिसमें सभी सतसंगी भाई-बहनों और बच्चों ने सहभागिता की। कृषि सेवा के अंतर्गत संगत ने गन्ना कटाई सहित अन्य खेतों के कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लिया और सेवा को ही सच्ची होली का स्वरूप बताया।
दयालबाग की होली: आंतरिक आनंद का पर्व

राधास्वामी सतसंग सभा के अध्यक्ष गुर सरूप सूद।
राधास्वामी सतसंग सभा के अध्यक्ष गुर सरूप सूद (भूतपूर्व आईएएस) ने बताया कि दयालबाग में मनाई जाने वाली होली पारंपरिक शोर-शराबे और रंगों से अलग एक अनूठी आध्यात्मिक होली है। उन्होंने कहा कि फाल्गुन का महीना सभी ऋतुओं में श्रेष्ठ माना जाता है और इसकी तुलना मानव शरीर से की जाती है, क्योंकि मनुष्य को प्राप्त यह श्रेष्ठ शरीर ही वह माध्यम है जिससे व्यक्ति आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर परमपिता के चरणों तक पहुंच सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य के भीतर पात्रता विकसित हो जाए तो वह उस अनादि ‘शब्द’ का अनुभव कर सकता है जो निरंतर उसके भीतर गूंजता रहता है। दयालबाग की होली का केंद्र आंतरिक होली है, जिसमें श्रद्धालु अपने समय के संत सतगुरु के सानिध्य में बैठकर उनके दर्शन करते हैं और पवित्र ‘शब्द’ का श्रवण करते हैं। यह अनुभव जीवात्मा को भीतर की ओर ले जाकर आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करता है।
स्वच्छ और सात्विक जीवनशैली के साथ मनाया गया पर्व
दयालबाग में होली पूरी तरह स्वच्छ, पवित्र और लैक्टो-वेजिटेरियन (दुग्ध-शाकाहारी) जीवनशैली के साथ मनाई जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य आत्मा की आंतरिक शुद्धि और परमात्मा के चरणों में समर्पण की भावना को मजबूत करना है।
ईवी पर विराजमान होकर संगत को दिए दर्शन
सुबह और दोपहर दोनों समय खेतों से ई.वी. पर विराजमान होकर कोठी लौटते समय परम गुरु महाराज ने उपस्थित संगत को अपनी दिव्य दृष्टि से भाव-विभोर कर दिया। भक्तों ने इस पावन क्षण को अत्यंत सौभाग्यपूर्ण बताया।
होली के अवसर पर आयोजित सभी कार्यक्रमों का सजीव प्रसारण देश-विदेश के 580 से अधिक केंद्रों पर भी किया गया, जिससे दूर-दराज में बैठे श्रद्धालु भी इस आध्यात्मिक उत्सव से जुड़ सके।