तमिलनाडु में द्रमुक का टूटा ख्वाब,  'विजय' की लहर में पसरा सन्नाटा, बड़ी बढ़त हासिल की

तमिलनाडु चुनाव की मतगणना में द्रमुक रुझानों में कमजोर दिखाई दे रही थी। इस वजह से दफ्तर खाली लग रहे। हालांकि टीवीके और अद्रमुक काफी  आगे है।

May 4, 2026 - 16:20
May 4, 2026 - 18:01
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तमिलनाडु में द्रमुक का टूटा ख्वाब,  'विजय' की लहर में पसरा सन्नाटा, बड़ी बढ़त हासिल की


चेन्नई। काउंटिंग के दिन बीतने के साथ ही चेन्नई स्थित द्रमुक मुख्यालय में माहौल काफी शांत और उदास नजर आया। पार्टी के कार्यकर्ता अपना सामान समेटते दिखे और धीरे-धीरे दफ्तर से बाहर जाते नजर आए। अन्ना अरिवालयम में लगाया गया अस्थायी टेंट भी हटाया जाने लगा, कुर्सियां समेटी गईं। यह सब शुरुआती रुझानों में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन की ओर इशारा कर रहा था, जिससे अंदर ही अंदर चिंता बढ़ती दिखी।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, अद्रमुक 54 सीटों पर आगे चल रही है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) 108 सीटों पर बढ़त के साथ आगे थी। इसके मुकाबले डीएमके 72 सीटों पर आगे है।

अद्रमुक  वेप्पनहल्ली, हरूर, चेय्यर, धारापुरम, पेरुंदुरई, कुन्नूर, कवुंदमपलायम, पोलाची, मनप्पाराई, अरियालुर, पनरुति, कुड्डालोर, तेनकासी और अलंगुलम जैसी सीटों पर आगे चल रही है। दूसरी तरफ टीवीके, जो पहली बार बड़े स्तर पर चुनाव लड़ रही है, माधवरम, थिरुवोट्टियूर, एग्मोर, केवी कुप्पम, मोदक्कुरिची, कंगायम, किनाथुकदावु, तिरुचिरापल्ली (पूर्व और पश्चिम), तंजावुर, थूथुकुडी, श्रीवैकुंठम और राधापुरम जैसी अहम सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। डीएमके वेल्लोर, मनचनल्लूर, पेरम्बलुर, कुन्नम, थिरुवरूर, मदुरै पूर्व, तिरुचेंदूर और वासुदेवनल्लूर सीटों पर आगे है. कांग्रेस दो सीटों पर और पीएमके एक सीट पर बढ़त बनाए हुए है।

रुझानों से यह भी संकेत मिले कि टीवीके उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर रही है। कई जगहों पर उसने एआईएडीएमके को पीछे छोड़ा और डीएमके के वोट बैंक में भी सेंध लगाई। अगर यही रुझान जारी रहते हैं, तो टीवीके तमिलनाडु की राजनीति में एक मजबूत ताकत बन सकती है और भविष्य में सरकार बनाने की स्थिति में भी आ सकती है। काफी समय से तमिलनाडु की राजनीति डीएमके और एआईएडीएमके के बीच ही घूमती रही है, लेकिन इस बार तस्वीर बदलती दिख रही है। टीवीके की बढ़त से मुकाबला अब तीन तरफा हो गया है। हालांकि अभी वोटों की गिनती जारी है और अंतिम नतीजे आना बाकी हैं, लेकिन  रुझान और डीएमके मुख्यालय का माहौल इस बात का संकेत दे रहा है कि राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव संभव है।