म्यांमार में चुनाव, पहले चरण में सैन्य जुंटा समर्थित पार्टी की बड़ी बढ़त,  96 में से 87 सीटें जीतीं

  जनरल मिन आंग हलिंग ने 2021 में सेना के तख्तापलट के बाद से म्यांमार पर शासन किया है। 2021 के बाद यह पहला चुनाव है। सैन्य सरकार ने इस वोट को लोकतंत्र की वापसी के तौर पर पेश किया है।  

Jan 4, 2026 - 19:32
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म्यांमार में चुनाव, पहले चरण में सैन्य जुंटा समर्थित पार्टी की बड़ी बढ़त,  96 में से 87 सीटें जीतीं

नेपीडा। म्यांमार की सत्ता पर काबिज सैन्य शासन, जुंटा की समर्थक पार्टी ने बड़ी बढ़त हासिल की है। जुंटा की देखरेख में हुए चुनावों के पहले चरण में उसके समर्थन वाली USDP ने अब तक घोषित निचली सदन की 90 फीसदी सीटें जीत ली हैं। सेना ने साल 2021 में तख्तापलट करके देश की सत्ता हथिया ली थी। इसके बाद से देश गृह युद्ध में घिरा है। देशभर के विद्रोही गुट जुंटा बलों के खिलाफ लड़ रहे हैं। इस बीच जुंटा ने म्यांमार में ये चुनाव कराए हैं।

म्यांमार में एक हफ्ते पहले चरणबद्ध महीने भर चलने वाले चुनाव के लिए वोटिंग शुरू हुई है। जुंटा ने इसे देश में लोकतंत्र बहाल करने का रास्ता बताया है। दूसरी ओर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पश्चिमी राजनयिकों ने इसे एक दिखावा और मार्शल लॉ का नया रूप बताया है। चुनाव में विपक्षियों पर काफी सख्त रुख दिखाया गया है।  

म्यांमार के सरकारी मीडिया में शनिवार और रविवार को जारी यूनियन इलेक्शन कमीशन के नतीजों के अनुसार, सेना समर्थक यूनियन सॉलिडेरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी (यूएसडीपी) ने 96 निचली सदन सीटों में से 87 सीटें जीत ली हैं। छह जातीय अल्पसंख्यक पार्टियों ने नौ सीटें जीती हैं। यूएसडीपी ने पहले चरण में घोषित 15 क्षेत्रीय और राज्य निर्वाचन क्षेत्र सीटों में से 14 सीटें भी जीतीं।

वोटिंग के पहले चरण में छह और टाउनशिप के विजेताओं की घोषणा अभी बाकी है। दो और चरण 11 और 25 जनवरी को होने हैं। भंग हो चुकी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) की लोकतांत्रिक नेता आंग सान सू की का नाम मतपत्रों पर नहीं था। वह तख्तापलट के बाद से जेल में हैं। इस चुनाव में पहले चरण में 50% लोगों ने वोट डाला, जो 2020 की 70% भागीदारी से काफी कम है

सेना ने 2020 के पिछले चुनाव के नतीजों को पलट दिया था, जब एनएलडी ने यूएसडीपी को भारी बहुमत से हराया था। इसके बाद सेना और यूएसडीपी ने बड़े पैमाने पर मतदाता धोखाधड़ी का आरोप लगाया और सेना ने तख्तापलट करते हुए सत्ता हथिया ली थी। इसके बाद से देश में बड़े पैमाने पर उथल पुथल मची है।