हर चौथी आग के पीछे बिजली का जाल, शॉर्ट सर्किट बना देश का साइलेंट किलर, 48 हजार से ज्यादा मौतों के बाद भी नहीं जागी व्यवस्था, एडवोकेट केसी जैन ने पीएम को पत्र लिख की भवनों की अनिवार्य विद्युत सुरक्षा जांच की मांग
आगरा। देश भर में लगातार बढ़ रहे अग्निकांड अब केवल हादसे नहीं रह गए हैं, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता बनते जा रहे हैं। दिल्ली, इंदौर, ग्वालियर समेत कई शहरों में हाल के वर्षों में हुई दर्दनाक घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक लोग जर्जर विद्युत व्यवस्था और शॉर्ट सर्किट की आग में जलते रहेंगे।
राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2019 से 2024 के बीच देश में अग्निकांडों में 48,588 लोगों की मौत हुई। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि हर चौथा अग्निकांड शॉर्ट सर्किट से जुड़ा पाया गया। इसके बावजूद आज तक देश में भवनों की अनिवार्य विद्युत सुरक्षा ऑडिट की कोई प्रभावी राष्ट्रीय व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है।
एक रात में खत्म हो गए पूरे परिवार
दिल्ली के विवेक विहार में एक ही रात में नौ लोगों की मौत, इंदौर में गर्भवती महिला और मासूम बच्चे सहित आठ लोगों की जिंदा जलकर मौत तथा ग्वालियर में पूरे परिवार के आग में समा जाने जैसी घटनाओं ने देश को झकझोर दिया। लगभग हर मामले में शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट और जर्जर विद्युत व्यवस्था सामने आई।
आगरा के वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन का कहना है कि करोड़ों लोग ऐसे भवनों में रह रहे हैं, जहां वर्षों से विद्युत तारों, लोड क्षमता और सुरक्षा उपकरणों की कोई जांच नहीं हुई। पुराने तारों पर बढ़ते बिजली भार ने घरों, अस्पतालों, होटलों और व्यावसायिक परिसरों को बारूद के ढेर में बदल दिया है।
एनसीआरबी के आंकड़े बढ़ा रहे चिंता
राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 में देश में 11,037 अग्निकांड हुए, जिनमें 2,183 घटनाएं शॉर्ट सर्किट के कारण थीं और 10,915 लोगों की मौत हुई।
वर्ष 2020 में 9,329 अग्निकांडों में 1,943 शॉर्ट सर्किट से जुड़े पाए गए और 9,110 लोगों की जान गई।
वर्ष 2022 में 7,566 अग्निकांडों में 1,567 घटनाएं शॉर्ट सर्किट से हुईं, जबकि 7,435 लोगों की मौत हुई।
वर्ष 2023 में 7,054 अग्निकांड दर्ज हुए, जिनमें 1,780 घटनाएं शॉर्ट सर्किट के कारण थीं और 6,891 लोगों की मौत हो गई।
वर्ष 2024 में 5,971 अग्निकांडों में 5,888 लोगों की मौत और 330 लोग घायल हुए।
आंकड़े यह साफ संकेत दे रहे हैं कि कुल अग्निकांड भले कम हो रहे हों, लेकिन शॉर्ट सर्किट का प्रतिशत लगातार बढ़ता जा रहा है।
प्रधानमंत्री को भेजा गया पत्र
इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए आगरा के अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता केसी जैन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र भेजकर देशभर में अनिवार्य विद्युत सुरक्षा ऑडिट लागू करने की मांग उठाई है।
उन्होंने मांग की है कि बहुमंजिला आवासीय भवनों, अस्पतालों, होटलों, विद्यालयों, व्यावसायिक परिसरों और सरकारी भवनों में नियमित विद्युत सुरक्षा जांच अनिवार्य की जाए।
केसी जैन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने ठोस नीतिगत कार्रवाई नहीं की तो संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जाएगी।
संसद में स्वीकारोक्ति, फिर भी कोई ठोस व्यवस्था नहीं
श्री जैन के अनुसार, 10 फरवरी 2026 को लोकसभा में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने स्वीकार किया कि वर्ष 2023 में देश में 7,054 अग्निकांड हुए, जिनमें 6,891 लोगों की मौत हुई। उन्होंने यह भी कहा कि अग्निशमन सेवाएं राज्यों का विषय हैं।
वहीं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा कि पूर्व अग्निकांडों से कोई सबक नहीं लिया गया।
इसके बावजूद देश में आज भी कोई ऐसी बाध्यकारी राष्ट्रीय व्यवस्था नहीं है, जो यह सुनिश्चित करे कि भवनों की विद्युत प्रणाली समय-समय पर जांची जा रही है।
क्या हैं प्रमुख मांगें
के.सी. जैन ने मांग की है कि तीन मंजिल या उससे ऊंचे सभी भवनों में हर तीन वर्ष में विद्युत सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य हो। अस्पतालों, होटलों और विद्यालयों में प्रतिवर्ष विद्युत सुरक्षा जांच कराई जाए। विद्युत सुरक्षा परीक्षण के बिना फायर एनओसी या उपयोग प्रमाण पत्र जारी न हो। मान्यता प्राप्त विद्युत सुरक्षा परीक्षकों की राष्ट्रीय सूची तैयार की जाए। प्रत्येक भवन की विद्युत सुरक्षा स्थिति का सार्वजनिक ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाए। शॉर्ट सर्किट से हुई मौतों का अलग राष्ट्रीय आंकड़ा प्रकाशित किया जाए। सुरक्षा परीक्षण के अभाव में हुई मौतों पर भवन स्वामी, संबंधित विभाग और बिजली कंपनी को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया जाए।
आग लगने के बाद नहीं, उससे पहले जागना होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि हर हादसे के बाद शोक व्यक्त करना आसान है, लेकिन वास्तविक जिम्मेदारी आग लगने से पहले उसे रोकने की है। यह लड़ाई केवल कानून या नियमों की नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों की सुरक्षा की है जो हर रात यह भरोसा करके सोते हैं कि उनका घर सुरक्षित है।