नगर निगम कैंप में कर्मचारी गायब, बिना बिल 5 साल का बढ़ा टैक्स मांगने पर भड़क रहा आक्रोश
आगरा। शहर में नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर नागरिकों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। एक्मा (आगरा क्लॊथ मर्केंटाइल एसोसिएशन) द्वारा गृहकर और जलकर जमा करवाने तथा समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से मुखर्जी मार्केट, रोशन मोहल्ला में लगाए गए कैंप ने नगर निगम की लापरवाही और कथित भ्रष्ट रवैये की पोल खोल दी। निर्धारित समय पर आयोजित इस कैंप में नगर निगम का एक भी कर्मचारी मौजूद नहीं मिला, जिससे आम नागरिकों और संगठन पदाधिकारियों में भारी नाराजगी देखी गई।
बताया गया कि एक्मा के पदाधिकारी और सदस्य करीब ढाई बजे 40 सीढ़ियां चढ़कर कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी नहीं था। कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार कुछ कर्मचारी आए जरूर थे, लेकिन महज आधा घंटा बैठकर बिना किसी सूचना के चले गए। इस पूरे मामले की शिकायत तत्काल नगर निगम के संबंधित अधिकारियों को दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
वसूली में मनमानी, जहां ‘मौका’ वहीं फोकस
नगर निगम के कर्मचारियों पर आरोप है कि वे गृहकर और जलकर की वसूली पूरी तरह अनमने और चयनात्मक तरीके से करते हैं। कुछ स्थानों पर जरूर विशेष ध्यान दिया जाता है। आम नागरिकों की समस्याओं और वैध भुगतान के मामलों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
पांच साल पुराने टैक्स की मांग, बिना बिल के टैक्स!
सबसे गंभीर आरोप यह है कि नगर निगम अब पिछले पांच वर्षों के बढ़े हुए टैक्स की मांग कर रहा है, जबकि संबंधित गृह स्वामियों को समय पर कोई बिल या इनवॉइस जारी ही नहीं किया गया। ऐसे में 2021 के बकाया टैक्स की मांग पूरी तरह अवैध और मनमानी प्रतीत होती है। नागरिकों का कहना है कि यह वसूली किसी प्रशासनिक प्रक्रिया से ज्यादा मनमानी जैसी लग रही है।
भुगतान के बाद भी दोबारा वसूली का दबाव
कई नागरिकों ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2023 तक का जलकर पूरी तरह जमा कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद नगर निगम द्वारा बढ़े हुए टैक्स के नाम पर पुनः वसूली की जा रही है। यह स्थिति सीधे-सीधे दोहरी वसूली और प्रशासनिक अराजकता को दर्शाती है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी
नागरिकों ने यह भी सवाल उठाया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा बैंक डेट से टैक्स वसूली को लेकर कई स्पष्ट आदेश दिए गए हैं, बावजूद इसके नगर निगम उन निर्देशों की अनदेखी कर रहा है। इससे प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बिना सदन अनुमोदन के टैक्स वृद्धि?
आरोप है कि गृहकर और जलकर में की गई भारी वृद्धि को नगर निगम सदन द्वारा विधिवत अनुमोदित तक नहीं किया गया है। इसके बावजूद वेबसाइट पर मनमाने बकाया दिखाकर नागरिकों पर दबाव बनाया जा रहा है।
नगर निगम की इस कथित मनमानी का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ा है। कई मामलों में टैक्स की राशि 10 गुना तक बढ़ा दी गई है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवार आर्थिक संकट में आ गए हैं।
एक्मा के पदाधिकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पूरे मामले में पारदर्शिता और न्यायपूर्ण कार्रवाई नहीं हुई, तो व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी।