यमुना के एक सिपाही का अंत: सत्याग्रही विनय पालीवाल नहीं रहे

आगरा। यमुना संरक्षण की लड़ाई का एक मजबूत स्तंभ ढह गया। प्रसिद्ध सत्याग्रही, वरिष्ठ पत्रकार और समाजवादी चिंतक विनय पालीवाल का गुरुवार प्रातः निधन हो गया। 78 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से सामाजिक और पर्यावरणीय आंदोलनों से जुड़े लोगों में शोक की लहर दौड़ गई है।

Mar 18, 2026 - 22:22
 0
यमुना के एक सिपाही का अंत: सत्याग्रही विनय पालीवाल नहीं रहे
विनय पालीवाल का एक फाइल फोटो, जिसमें वे साथियों के साथ नजर आ रहे हैं।

यमुना नदी के संरक्षण के लिए वर्षों से सक्रिय कार्यकर्ताओं ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया है। रिवर कनेक्ट कैंपेन से जुड़े बृज खंडेलवाल ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि विनय पालीवाल जीवन भर यमुना के प्रति समर्पित रहे। एक सच्चे यमुना भक्त के रूप में उन्होंने नदी की स्वच्छता, अविरलता और संरक्षण के लिए लगातार संघर्ष किया।

उन्होंने कहा कि पालीवाल के विचारों में सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी की गहरी प्रतिबद्धता झलकती थी। उनका पूरा जीवन एक मिशन की तरह था, जिसमें उन्होंने व्यक्तिगत सुविधा से अधिक समाज और प्रकृति को प्राथमिकता दी।

विनय पालीवाल की पहचान सिर्फ एक पत्रकार तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे जन आंदोलनों की आवाज भी थे। वर्ष 1975 में लागू आपातकाल के दौरान उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए खुलकर सत्याग्रह किया और 19 माह तक जेल में रहे। यह उनके अडिग साहस और सिद्धांतों के प्रति निष्ठा का प्रमाण है।

उनका जीवन संघर्ष, सादगी और जनसेवा का प्रतीक रहा। यमुना के किनारे-किनारे चलने वाले उनके अभियान और जागरूकता प्रयासों ने हजारों लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया।

उनकी अंतिम यात्रा गुरुवार प्रातः 9 बजे ताजगंज मोक्षधाम, आगरा में सम्पन्न होगी, जहां उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी। यमुना से जुड़े कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।

SP_Singh AURGURU Editor