आलू की बेकदरी पर भड़के किसान: आगरा आए उद्यान मंत्री को सौंपा ज्ञापन, बोले- लागत 12 रुपये और दाम मिल रहे सिर्फ 6-7 रुपये
आगरा, 10 मार्च। आलू के गिरते बाजार मूल्य और कोल्ड स्टोर भंडारण की बढ़ती दरों को लेकर आगरा मंडल के किसान अब खुलकर आक्रोश जता रहे हैं। मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात दिनेश प्रताप सिंह के आगरा आगमन पर आलू उत्पादक किसानों ने उन्हें ज्ञापन सौंपकर आलू का बाजार मूल्य बढ़ाने और कोल्ड स्टोर भंडारण की दरें कम करने की मांग उठाई। किसानों का कहना है कि वर्तमान हालात में आलू की खेती घाटे का सौदा बन चुकी है और अगर सरकार ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया तो किसान आलू उत्पादन छोड़ने को मजबूर हो जाएंगे।
मंत्री के सामने रखी किसानों की पीड़ा
आलू उत्पादक किसान सेवा समिति के प्रदेश महासचिव लक्ष्मीनारायण बघेल के नेतृत्व में किसान नेताओं ने मंत्री को ज्ञापन दिया। किसानों ने कहा कि इस समय केवल आगरा जनपद ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में आलू की स्थिति बेहद खराब है। सब्जी का राजा कहलाने वाला आलू आज बाजार में बेकदरी का शिकार हो रहा है और किसान अपनी लागत तक नहीं निकाल पा रहा।
लागत 12 रुपये, बाजार में 6–7 रुपये दाम
किसान नेताओं ने बताया कि एक किलोग्राम आलू के उत्पादन में लगभग 12 रुपये की लागत आ रही है, जबकि किसान अपनी फसल का उत्तम कोटि का आलू 6 से 7 रुपये प्रति किलोग्राम बेचने को मजबूर है। ऐसे में किसानों की मेहनत और पूंजी दोनों डूब रही हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बिल्कुल वैसी है जैसे ऊंट के मुंह में जीरा, जिससे किसान आर्थिक संकट के कगार पर पहुंच गया है।
ज्ञापन में मांग की गई कि सरकार आलू उत्पादक किसानों को राहत देने के लिए सब्सिडी की राशि सीधे किसानों के खातों में भेजे। इससे किसानों को तत्काल राहत मिल सकेगी और वे अगली फसल की तैयारी कर पाएंगे।
कोल्ड स्टोर की दरें सरकार तय करे
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि कोल्ड स्टोर भंडारण की दरें शीतगृह स्वामी स्वयं तय कर रहे हैं, जिससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि भंडारण दरें तय करने का अधिकार कोल्ड स्टोर मालिकों से लेकर सरकार अपने हाथ में ले और सरकारी छूट सीधे किसानों के खाते में भेजी जाए।
आगरा मंडल में लगें आलू प्रसंस्करण इकाइयां
किसानों ने मांग उठाई कि आगरा मंडल जैसे बड़े आलू उत्पादक क्षेत्र में आलू प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित की जाएं। इसके अलावा किसानों को अपनी फसल देशभर में बेचने के लिए ट्रक, रेल और हवाई परिवहन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि आगरा का आलू कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक बेहतर दामों पर पहुंच सके।
सड़क पर रखने को मजबूर किसान
किसान नेता लक्ष्मीनारायण बघेल ने कहा कि स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कई किसान अपनी आलू की फसल को सड़क किनारे रखने को मजबूर हो गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस संकट पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया तो आलू किसान आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो सकते हैं।
मंत्री को ज्ञापन देने वालों में प्रमुख रूप से किसान नेता मोहन सिंह चाहर, वीरेंद्र सिंह परिहार और कल्लू यादव सहित कई अन्य किसान मौजूद रहे।