टीटीजेड में पेड़ लगाने से डर रहे किसान, 6% हरियाली पर अटका हुआ है आगरा, जिला पर्यावरण समिति की बैठक में एडवोकेट केसी जैन ने उठाया मुद्दा- जब पेड़ काटने पर सुप्रीम कोर्ट जाना पड़े तो कौन करेगा वृक्षारोपण?

आगरा। आगरा में पर्यावरण संरक्षण की सरकारी योजनाओं और जमीनी सच्चाई के बीच का बड़ा विरोधाभास जिला पर्यावरण समिति की बैठक में खुलकर सामने आ गया। जिलाधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में हुई बैठक में वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने निजी भूमि पर वृक्षारोपण से जुड़े कठोर नियमों और नीतिगत विसंगतियों पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जब किसान को एक पेड़ काटने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़े और बदले में 10 पेड़ लगाने की बाध्यता हो, तो आखिर कोई किसान या भू-धारक पेड़ लगाएगा ही क्यों?

May 7, 2026 - 19:38
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टीटीजेड में पेड़ लगाने से डर रहे किसान, 6% हरियाली पर अटका हुआ है आगरा, जिला पर्यावरण समिति की बैठक में एडवोकेट केसी जैन ने उठाया मुद्दा- जब पेड़ काटने पर सुप्रीम कोर्ट जाना पड़े तो कौन करेगा वृक्षारोपण?
जिला पर्यावरण समिति की बैठक की अध्यक्षता करते जिलाधिकारी मनीष बंसल। मौजूद हैं सदस्य एवं अन्य अधिकारी।

बैठक में यह भी सामने आया कि 10,400 वर्ग किलोमीटर में फैले ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) क्षेत्र में वन आवरण महज 3 प्रतिशत है, जबकि आगरा जिले में यह करीब 6 प्रतिशत ही है। राष्ट्रीय औसत 22 प्रतिशत और राष्ट्रीय लक्ष्य 33 प्रतिशत होने के बावजूद निजी भूमि पर वृक्षारोपण की अनदेखी ने हरित आगरा के सपने को संकट में डाल दिया है।

वरिष्ठ अधिवक्ता के.सी. जैन ने जिलाधिकारी के समक्ष स्पष्ट कहा कि वर्तमान में लगभग सभी सरकारी भूमि पर पौधारोपण हो चुका है, लेकिन कठोर अनुमति प्रक्रिया के कारण किसान और निजी भू-धारक अब पेड़ लगाने से बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि नीति नहीं बदली गई तो हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण सुधार की सारी योजनाएं कागजों में ही सीमित रह जाएंगी। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने मामले को गंभीरता से सुनते हुए परीक्षण और समीक्षा कराने का आश्वासन दिया।

उत्तरी बाईपास बनने के बाद भी शहर में घुस रहे भारी वाहन

बैठक में अधिवक्ता जैन ने आगरा के प्रदूषण और जाम की बड़ी वजह बने भारी वाहनों का मुद्दा भी मजबूती से उठाया। उन्होंने कहा कि 14 किलोमीटर लंबा उत्तरी बाईपास बन चुका है और सर्वोच्च न्यायालय वर्ष 1996 तथा 2006 में गैर-गंतव्य भारी वाहनों को शहर से बाहर डायवर्ट करने के आदेश दे चुका है, इसके बावजूद ट्रक और भारी वाहन शहर में प्रवेश कर रहे हैं।

इस पर जिलाधिकारी ने ट्रैफिक इंस्पेक्टर से चर्चा कर स्थिति की जानकारी ली और पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर भारी वाहनों को रोकने का अनुरोध करने के निर्देश दिए। साथ ही कीठम और कुबेरपुर पर बैरियर लगाकर ट्रैफिक डायवर्ट करने की बात कही गई।

मियांवाकी मॉडल पर भी उठे सवाल

बैठक में मियांवाकी पद्धति से हो रहे सघन पौधारोपण पर भी सवाल उठे। अधिवक्ता जैन ने कहा कि सार्वजनिक पार्क बच्चों और स्थानीय निवासियों के उपयोग के लिए होते हैं, लेकिन मियांवाकी शैली में अत्यधिक घना पौधारोपण होने से पार्कों में खुला स्थान ही समाप्त हो जाता है।

उन्होंने पार्कों में निकलने वाले हॉर्टीकल्चर वेस्ट के निस्तारण के लिए गड्ढे बनाने की आवश्यकता बताई, जिस पर जिलाधिकारी ने नगर निगम को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

अब अमलताश और गुलमोहर से सजेगा आगरा

जिलाधिकारी मनीष बंसल ने कहा कि भविष्य में होने वाले पौधारोपण में केवल संख्या नहीं बल्कि गुणवत्ता और सौंदर्य पर भी ध्यान दिया जाए। उन्होंने ऐवेन्यू प्लांटेशन के तहत अमलताश, गुलमोहर जैसे छायादार और आकर्षक वृक्ष लगाने पर जोर दिया।

दो लाख पौधों में 10 प्रतिशत सड़क किनारे लगाने के निर्देश

नगर निगम द्वारा प्रस्तावित पौधारोपण अभियान पर अधिवक्ता जैन ने सुझाव दिया कि शहर की अधिकतम सड़कों पर ट्री-गार्ड लगाकर पौधे लगाए जाएं ताकि आम नागरिकों को वास्तविक हरियाली का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि किसी एक स्थान पर मियांवाकी पद्धति से सघन पौधारोपण करने से पूरे शहर को लाभ नहीं होगा।

इस पर जिलाधिकारी ने नगर निगम को निर्देश दिए कि प्रस्तावित लगभग दो लाख पौधों में से कम से कम 10 प्रतिशत पौधे सड़क किनारे लगाए जाएं।

वायु प्रदूषण रोकने को मांगी गई बिंदुवार कार्ययोजना

बैठक में जिलाधिकारी ने नगर निगम से शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए विस्तृत और बिंदुवार कार्ययोजना मांगी। उन्होंने पूछा कि नगर निगम किन क्षेत्रों में क्या कार्य करेगा और कुल सड़कों में कितने हिस्से पर दोनों ओर टाइलें लगाई जा चुकी हैं, ताकि रोड डस्ट कम हो सके।

संजय प्लेस क्षेत्र में फुटपाथ निर्माण और पुनर्विकास योजना पर भी नगर निगम को विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए।

पर्यावरण बचाने की नीतियां या किसानों को हतोत्साहित करने वाला सिस्टम?

बैठक ने एक बार फिर यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया कि यदि सरकार निजी भूमि पर वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने के बजाय कानूनी जटिलताओं में उलझाए रखेगी, तो आगरा जैसे प्रदूषण प्रभावित शहर में हरित क्षेत्र आखिर बढ़ेगा कैसे? सरकारी अभियान और धरातल की वास्तविकता के बीच की दूरी अब प्रशासनिक समीक्षा की मांग कर रही है।

SP_Singh AURGURU Editor