जोधपुर झाल वेटलैंड में दिखीं ‘कसाई पक्षी’ की पांच प्रजातियां, ब्रज क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए बन रहा नया सुरक्षित ठिकाना

मथुरा के फरह क्षेत्र स्थित जोधपुर झाल वेटलैंड में शीतकालीन पक्षी सर्वेक्षण के दौरान ‘श्राइक’ यानी कसाई पक्षी की पांच अलग-अलग प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। यह सर्वेक्षण उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा वन विभाग के सहयोग से विकसित किए जा रहे इस वेटलैंड में किया गया, जिसने क्षेत्र की बढ़ती पारिस्थितिक महत्ता को उजागर कर दिया है।

Mar 10, 2026 - 18:15
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जोधपुर झाल वेटलैंड में दिखीं ‘कसाई पक्षी’ की पांच प्रजातियां, ब्रज क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए बन रहा नया सुरक्षित ठिकाना
जोधपुर झाल वेटलैंड में दिखी कसाई पक्षी की प्रजातियों के पक्षी।

मथुरा। जनपद के फरह क्षेत्र में स्थित जोधपुर झाल वेटलैंड एक बार फिर पक्षी प्रेमियों और पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए चर्चा का विषय बन गया है। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा वन विभाग के सहयोग से विकसित किए जा रहे इस वेटलैंड में किए गए शीतकालीन पक्षी सर्वेक्षण के दौरान ‘श्राइक’ यानी कसाई पक्षी की पाँच प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई है।

जानकारी के अनुसार सर्वेक्षण में दो आवासीय प्रजातियां- बे-बैक्ड श्राइक और लोंग-टेल्ड श्राइक के साथ-साथ तीन प्रवासी प्रजातियां- ग्रेट-ग्रे श्राइक, इसेबिलाइन श्राइक और ब्राउन श्राइक देखी गईं। इनमें से तीनों प्रवासी प्रजातियाँ मध्य और पूर्वी एशिया के देशों जैसे रूस, मंगोलिया और कजाकिस्तान से लंबी दूरी तय कर शीतकाल में भारत पहुंचती हैं।

बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डवलपमेंट सोसाइटी के ईकोलॉजिस्ट डॉ. केपी सिंह के अनुसार श्राइक पक्षियों को पक्षी वर्गीकरण में लैनिडी परिवार में रखा जाता है। इस परिवार के अधिकांश पक्षी लेनूअस वंश के अंतर्गत आते हैं। श्राइक मध्यम आकार के पैसराइन पक्षी होते हैं, जो अपनी विशिष्ट शिकार करने की शैली और मांसाहारी प्रवृत्ति के कारण अन्य गीतगायक पक्षियों से अलग माने जाते हैं।

डॉ. केपी सिंह ने बताया कि श्राइक पक्षियों को उनकी अनोखी शिकार शैली के कारण बुचर बर्ड या कसाई पक्षी कहा जाता है। ये पक्षी प्रायः ऊंचे पेड़ों, झाड़ियों, बिजली के तारों या बाड़ों पर बैठकर कीट-पतंगों, छिपकलियों, छोटे पक्षियों और कृन्तकों का शिकार करते हैं। कई बार ये अपने शिकार को कांटेदार झाड़ियों, तारों या नुकीली टहनियों पर फंसा कर भी रखते हैं, जिससे यह ‘कसाई’ जैसी प्रवृत्ति के कारण प्रसिद्ध हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि जोधपुर झाल वेटलैंड में श्राइक की पाँच प्रजातियों का दर्ज होना इस क्षेत्र के वेटलैंड और आसपास के झाड़ीदार घासस्थल पारिस्थितिकी तंत्र की महत्ता को दर्शाता है। यह क्षेत्र प्रवासी पैसराइन पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण विश्राम और भोजन स्थल के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है।

ईकोलॉजिस्ट के अनुसार श्राइक पक्षियों का आकार लगभग 16 से 25 सेंटीमीटर तक होता है। इनके शरीर का रंग सामान्यतः भूरे, धूसर या सफेद रंग का होता है और आंखों के पास चौड़ी काली पट्टी होती है, जो मुखौटे जैसी दिखाई देती है। ये बेहद सतर्क पक्षी होते हैं और अक्सर ऊंची टहनियों या तारों पर बैठकर अपने शिकार पर नजर रखते हैं।

इनकी आवाज तीखी और तेज होती है तथा कई बार ये अन्य पक्षियों की आवाज की नकल भी कर लेते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जोधपुर झाल वेटलैंड में इनकी बढ़ती मौजूदगी इस क्षेत्र के बेहतर पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में सकारात्मक संकेत है।

SP_Singh AURGURU Editor