आगरा भाजपा की महानगर-जिला कार्यकारिणी का गठन अंतिम दौर में, प्रदेश दफ्तर में जातीय संतुलन देखा जा रहा, बड़े नेताओं की सिफारिशों पर भी मंथन, जल्द घोषित होने वाली कार्यकारिणी का हर किसी को बेसब्री से इंतजार

आगरा। भारतीय जनता पार्टी में आगरा महानगर और जिला इकाइयों के गठन का काम अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। महानगर अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष की ओर से पर्यवेक्षकों के साथ बैठक कर पदाधिकारियों के नामों को अंतिम रूप देकर सूची प्रदेश नेतृत्व को भेज दी गई है, लेकिन अब असली माथापच्ची लखनऊ स्थित प्रदेश कार्यालय में चल रही है। प्रदेश स्तर पर इन सूचियों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है कि प्रस्तावित कार्यकारिणी में जातीय संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठन के तय मानकों का पालन हुआ है या नहीं। इसके साथ ही बड़े नेताओं द्वारा की जा रही सिफारिशों पर भी विचार हो रहा है।

Mar 16, 2026 - 11:43
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आगरा भाजपा की महानगर-जिला कार्यकारिणी का गठन अंतिम दौर में, प्रदेश दफ्तर में जातीय संतुलन देखा जा रहा, बड़े नेताओं की सिफारिशों पर भी मंथन, जल्द घोषित होने वाली कार्यकारिणी का हर किसी को बेसब्री से इंतजार

भाजपा में पहले तो जिलाध्यक्ष पद के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया गया था। अब कार्यकारिणी में पद पाने के लिए भी वैसी ही कसरत चल रही है। हालत यह है कि पद के आकांक्षी भाजपा नेताओं ने हर स्तर पर तिकड़में भिड़ाई हैं। ऐसी-ऐसी सिफारिशें कराई गई हैं जिनके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता। इनमें भाजपा के वे दिग्गज नेता भी शामिल हैं, जो सक्रिय राजनीति से संन्यास ले चुके हैं, लेकिन तिकड़मबाज उन तक भी पहुंच गये हैं।

हर जिला इकाई में सात महिला पदाधिकारी होंगी

भाजपा नेतृत्व ने इस बार जिला इकाइयों में महिलाओं को प्रमुख स्थान देने का फैसला किया है। पार्टी की रणनीति के अनुसार प्रत्येक जिला इकाई में सात महिलाओं को पदाधिकारी बनाना लगभग तय किया गया है। इसके जरिए संगठन महिला सशक्तिकरण का संदेश देना चाहता है। हालांकि यदि किसी जिले में सात योग्य महिला कार्यकर्ता उपलब्ध न हों तो पदों की संख्या में कुछ कमी भी संभव है, लेकिन पार्टी का लक्ष्य हर जिले में कम से कम सात महिला पदाधिकारी सुनिश्चित करना है।

पर्यवेक्षकों ने विधायकों और सांसदों से ली थी राय

प्रदेश नेतृत्व ने जिला इकाइयों के गठन के लिए हर जिले में पर्यवेक्षक भेजे थे और उन्हें निर्देश दिया गया था कि पांच मार्च तक अपनी रिपोर्ट प्रदेश कार्यालय को सौंप दी जाए। इसी क्रम में आगरा में भी महानगर और जिला इकाई के गठन के लिए पर्यवेक्षक पहुंचे थे।

महानगर भाजपा इकाई में शहर के तीनों विधानसभा क्षेत्रों के साथ एत्मादपुर क्षेत्र भी शामिल है। पर्यवेक्षक ने महानगर क्षेत्र के चारों विधायकों पुरुषोत्तम खंडेलवाल, योगेंद्र उपाध्याय, डॊ. जीएस धर्मेश, डॊ. धर्मपाल सिंह और सांसद प्रो. एसपी सिंह बघेल से भी पदाधिकारियों को लेकर उनकी राय जानी। इसके बाद महानगर अध्यक्ष के साथ बैठक कर कार्यकारिणी के नामों को अंतिम रूप देकर सूची प्रदेश को भेज दी गई।

जिला भाजपा में भी अपनाई गई यही प्रक्रिया

जिला भाजपा इकाई के गठन में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई। पर्यवेक्षक ने फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर के अलावा क्षेत्रीय विधायकों से भी पदाधिकारियों के लिए नाम मांगे। इनमें बाह की विधायक रानी पक्षालिका सिंह, फतेहाबाद के विधायक छोटेलाल वर्मा, खेरागढ़ के विधायक भगवान सिंह कुशवाह, फतेहपुर सीकरी के विधायक चौधरी बाबूलाल और आगरा ग्रामीण की विधायक बेबीरानी मौर्य शामिल रहीं।

इन सभी जनप्रतिनिधियों से राय लेने के बाद पर्यवेक्षक ने जिलाध्यक्ष प्रशांत पौनिया के साथ बैठकर प्रस्तावित जिला कार्यकारिणी को अंतिम रूप दिया और उसे प्रदेश नेतृत्व को भेज दिया।

जातीय संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व सबसे बड़ी चुनौती

दोनों इकाइयों के गठन के दौरान पर्यवेक्षक और जिलाध्यक्षों के सामने सबसे बड़ी चुनौती जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की रही। जिन जातीय वर्गों को संगठन में प्रतिनिधित्व देना था, उन्हें शामिल करने के साथ-साथ विधायक चाहते थे कि उनके विधानसभा क्षेत्र से भी अधिक से अधिक पदाधिकारी बनाए जाएं।

इसी कारण कई पदों को लेकर लंबी चर्चा और समन्वय बैठकों का दौर चला। संगठनात्मक संतुलन और राजनीतिक समीकरणों को साधना पर्यवेक्षकों के लिए आसान नहीं रहा।

प्रदेश स्तर पर फिर शुरू हुई पैरोकारी

अब जब महानगर और जिला इकाइयों की सूचियां प्रदेश कार्यालय पहुंच चुकी हैं, तो वहां उनका परीक्षण किया जा रहा है। यह देखा जा रहा है कि कार्यकारिणी के गठन में संगठन के नियमों का पालन हुआ है या नहीं। इसके साथ ही सांसदों और विधायकों की ओर से अपने समर्थकों को पद दिलाने के लिए प्रदेश स्तर पर भी पैरोकारी शुरू हो गई है।

संगठन सूत्रों के अनुसार महानगर इकाई को लेकर ज्यादा विवाद नहीं है, लेकिन जिला भाजपा में कई पदों को लेकर भारी खींचतान चल रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि पर्यवेक्षकों और जिलाध्यक्षों द्वारा तैयार की गई सूची में कुछ पदों पर फेरबदल भी हो सकता है।

19 सदस्यीय कार्यकारिणी में जगह पाने लिए इसलिए है मारामारी

दरअसल भाजपा संगठन में पदों की चाह रखने वालों में सवर्ण समाज के नेताओं की संख्या ज्यादा है। जिले की कार्यकारिणी में 19 पद होते हैं। इनमें से सात पद तो महिलाओं के लिए रिजर्व कर दिए गए हैं जबकि दो पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। इन नौ पदों के बाद केवल 10 पद बचते हैं। इन्हीं दस पदों में पार्टी को सवर्णों के साथ ही पिछड़ा वर्ग को भी साधना है। सवर्णों और पिछड़ा वर्ग के पदों पर भी बड़े नेताओं की अपनी-अपनी अलग पसंद है। इसी वजह से पार्टी को इकाइयों के गठन में इतनी माथापच्ची करनी पड़ रही है।

घोषणा का इंतजार, संगठन में हलचल

कुल मिलाकर आगरा भाजपा के अंदरूनी गलियारों में नई कार्यकारिणी की घोषणा को लेकर जबरदस्त उत्सुकता बनी हुई है। पदों की दावेदारी और राजनीतिक समीकरणों के चलते संगठन के अंतःपुर में हलचल तेज है। अब सभी की नजरें प्रदेश नेतृत्व के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।

SP_Singh AURGURU Editor