हाथी कल्याण की वैश्विक पाठशाला: वाइल्डलाइफ एसओएस की तीसरी अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला में देशभर के पशु चिकित्सकों को मिला उन्नत प्रशिक्षण
भारत में हाथियों की चिकित्सा देखभाल और कल्याण को नई मजबूती देने की दिशा में एक अहम पहल करते हुए वाइल्डलाइफ एसओएस ने उत्तर प्रदेश वन विभाग के सहयोग से मथुरा स्थित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में तीसरी अंतर्राष्ट्रीय हाथी स्वास्थ्य देखभाल एवं कल्याण कार्यशाला का आयोजन किया है। पांच दिवसीय यह कार्यशाला देशभर के पशु चिकित्सकों को वैज्ञानिक, व्यावहारिक और करुणामूलक प्रशिक्षण प्रदान कर रही है।

कार्यशाला का उद्घाटन करते आगरा के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक भीमसेन। साथ हैं संस्था के अधिकारी।
आगरा/मथुरा। वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा आयोजित यह पांच दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला भारत में हाथियों की पशु चिकित्सा देखभाल और प्रबंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। इस गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से दो दर्जन से अधिक सेवारत पशु चिकित्सकों को शामिल किया गया है।
कार्यशाला का उद्घाटन समारोह 23 फरवरी को आगरा में आयोजित हुआ, जिसका उद्घाटन मुख्य अतिथि भीम सेन (अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, आगरा जोन) ने राजेश कुमार (डीएफओ, आगरा) एवं वेंकट श्रीकर पटेल (डीएफओ, मथुरा) की गरिमामयी उपस्थिति में किया।
उद्घाटन सत्र के उपरांत तकनीकी कार्यशाला सत्र 24 फरवरी से 28 फरवरी तक मथुरा स्थित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में आयोजित किए जा रहे हैं। यह अत्याधुनिक केंद्र वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा उत्तर प्रदेश वन विभाग के सहयोग से संचालित किया जाता है और हाथियों के पुनर्वास एवं दीर्घकालिक देखभाल के लिए समर्पित है।
कार्यशाला में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ संसाधन व्यक्तियों के रूप में शामिल हैं, जिनमें डॉ. सुसान के. मिकोटा (निदेशक, पशु चिकित्सा कार्यक्रम एवं अनुसंधान, एलिफेंट केयर इंटरनेशनल, यूएसए), डॉ. जेनीन एल. ब्राउन (वरिष्ठ वैज्ञानिक एमेरिटस, स्मिथसोनियन राष्ट्रीय चिड़ियाघर एवं संरक्षण जीवविज्ञान संस्थान), डॉ. विलेम शाफ्टेनार (पूर्व प्रमुख, पशु चिकित्सा विभाग, रॉटरडैम चिड़ियाघर) और डॉ. एन. एस. मनोहरन (अतिरिक्त निदेशक, सेवानिवृत्त, पशु चिकित्सा सेवाएं, तमिलनाडु) शामिल हैं। इनके साथ अनुभवी वाइल्डलाइफ एसओएस पशु चिकित्सक भी प्रशिक्षण सत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
इस कार्यशाला में असम, पश्चिम बंगाल, नई दिल्ली, महाराष्ट्र, ओडिशा, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों के पशु चिकित्सा अधिकारी भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण का फोकस हाथियों की शारीरिक जांच, रोग निदान एवं उपचार, सकारात्मक सुदृढ़ीकरण आधारित कल्याणकारी उपाय, पैरों की देखभाल, दंत समस्याएं, प्रमुख बीमारियां, वृद्धावस्था देखभाल और नर हाथियों में मस्त प्रबंधन जैसे जटिल विषयों पर है। विशेषज्ञ सत्रों और व्यावहारिक प्रदर्शनों के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रत्यक्ष अनुभव और गहन ज्ञान प्रदान किया जा रहा है।
उद्घाटन समारोह में भीम सेन ने कहा कि यह कार्यशाला वैज्ञानिक विशेषज्ञता और जमीनी अनुभव को एक साथ लाकर हाथियों की स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो देशभर में बंदी हाथियों के बेहतर कल्याण और दीर्घकालिक संरक्षण परिणाम सुनिश्चित करेगी।
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक एवं सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि हाथियों को विज्ञान और नैतिक कल्याण पर आधारित विशेष एवं करुणामूलक पशु चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है, और यह कार्यशाला पशु चिकित्सकों को उन्नत ज्ञान और व्यावहारिक कौशल से सशक्त बनाने का मंच है।
एलिफेंट केयर इंटरनेशनल की निदेशक डॉ. सुसान के. मिकोटा ने कहा कि यह कार्यशाला वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों के समाधान का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।
वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक एवं सचिव गीता शेषमणि ने प्रशिक्षण और जागरूकता को कैद में रखे गए हाथियों के जीवन में स्थायी सकारात्मक बदलाव की कुंजी बताया।
वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एम.वी. ने कहा कि इस कार्यशाला का तकनीकी स्वरूप प्रतिभागियों को वास्तविक चुनौतियों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करता है और राज्यों में एक समान, उच्च गुणवत्ता वाली पशु चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देता है।