संघ की हरियाणा बैठक में यूपी में प्रचारकों के दायित्व बदले, हरीश रौतेला क्षेत्र संपर्क प्रमुख व मनोज नीखरा को नई जिम्मेदारी
हरियाणा के समालखा में 13–15 मार्च तक चली RSS की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा रविवार को समाप्त हो गई। बैठक के अंतिम दिन सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुछ प्रचारकों के दायित्व बदले गए हैं। हरीश रौतेला को पश्चिम उत्तर प्रदेश का क्षेत्र संपर्क प्रमुख बनाया गया है, जबकि मनोज नीखरा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाते हुए नेपाल सीमा से सटे जिलों में नेपाली समाज के बीच संघ कार्य विस्तार की जिम्मेदारी दी गई है। बैठक में शताब्दी वर्ष कार्यक्रम, सामाजिक समरसता, संगठन विस्तार और संघ के ढांचे में संभावित बड़े बदलाव पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, संघ अब प्रांत प्रचारक व्यवस्था खत्म कर संभाग प्रचारक मॉडल लागू करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।
समालखा में संपन्न अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में शताब्दी वर्ष, सामाजिक समरसता, संगठन विस्तार और ढांचे में बदलाव पर हुआ मंथन
आगरा। हरियाणा के समालखा स्थित माधव सृष्टि परिसर में तीन दिनों तक चली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा रविवार को संपन्न हो गई। संघ के शताब्दी वर्ष के बीच आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक के अंतिम दिन संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलावों के संकेत सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कुछ प्रचारकों और प्रमुख पदाधिकारियों के दायित्वों में बदलाव किया गया है, जबकि संघ अपने पारंपरिक संगठनात्मक ढांचे में भी बड़ा पुनर्गठन करने की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है।
सूत्रों से मिली प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हरीश रौतेला को पश्चिम उत्तर प्रदेश का क्षेत्र संपर्क प्रमुख बनाया गया है। अब तक वे पश्चिम उत्तर प्रदेश के सह संपर्क प्रमुख के रूप में दायित्व निभा रहे थे। इस बदलाव को पश्चिमी यूपी में संघ के संपर्क तंत्र को और अधिक सक्रिय तथा प्रभावी बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
इसी क्रम में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के क्षेत्रीय संगठन मंत्री मनोज नीखरा को अब संघ में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही उन्हें एक विशेष और रणनीतिक जिम्मेदारी भी सौंपी गई है, नेपाल से सटे जिलों में नेपाली समाज के बीच संघ कार्य के विस्तार का दायित्व। माना जा रहा है कि सीमावर्ती जिलों में सामाजिक-सांस्कृतिक संपर्क, संगठन विस्तार और वैचारिक पहुंच को मजबूत करने के लिहाज से यह जिम्मेदारी काफी अहम है।
संघ के ढांचे में बड़ा बदलाव
बैठक से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण चर्चाओं में से एक संघ के संगठनात्मक ढांचे में संभावित बड़ा परिवर्तन भी रहा। संघ अब ‘प्रांत प्रचारक’ व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर ‘संभाग प्रचारक’ मॉडल की ओर बढ़ रहा है। यानी अब बड़े प्रांतों के बजाय छोटे और अधिक कार्यक्षम संभागीय ढांचे के जरिए संगठन को जमीनी स्तर तक अधिक प्रभावी तरीके से संचालित करने की योजना है।
इस बदलाव का उद्देश्य निर्णय प्रक्रिया को तेज करना, नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच दूरी कम करना, क्षेत्रीय चुनौतियों के अनुसार त्वरित प्रतिक्रिया, सीमावर्ती, संवेदनशील और सामाजिक रूप से विशेष क्षेत्रों पर केंद्रित विस्तार बताया जा रहा है।
संघ के अंदर इस तरह के ढांचागत पुनर्गठन की चर्चा पिछले कुछ समय से चल रही थी और अब माना जा रहा है कि संभाग प्रचारक नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द पूरी की जा सकती है। पहले भी मीडिया रिपोर्ट्स में संकेत मिले थे कि संघ 46 प्रांतों की जगह अधिक सूक्ष्म प्रशासनिक-संगठनात्मक इकाइयों की दिशा में विचार कर रहा है।
आज समाप्त हुई हरियाणा बैठक की प्रमुख बातें
हरियाणा के समालखा में 13 से 15 मार्च तक चली संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा संघ की सर्वोच्च निर्णयकारी बैठकों में से एक मानी जाती है। इस बार की बैठक विशेष रूप से इसलिए अहम रही क्योंकि यह संघ के शताब्दी वर्ष के बीच आयोजित हुई। संघ की ओर से पहले ही बताया गया था कि इस बैठक में शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों, सामाजिक चुनौतियों और संगठन विस्तार पर व्यापक चर्चा होगी।
शताब्दी वर्ष कार्यक्रमों की समीक्षा
बैठक में देशभर में चल रहे RSS शताब्दी वर्ष कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। संघ ने पहले बताया था कि कई राज्यों में गृह संपर्क अभियान के जरिए करोड़ों परिवारों तक पहुंच बनाई गई है और शेष क्षेत्रों में यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
सामाजिक समरसता पर विशेष फोकस
बैठक में सामाजिक समरसता को केंद्रीय विषयों में रखा गया। संत शिरोमणि रविदास जयंती के 650वें वर्ष से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए समाज में समरसता का संदेश व्यापक स्तर पर ले जाने पर भी चर्चा हुई।
संगठन विस्तार और सूक्ष्म पुनर्गठन
सूत्रों के मुताबिक, संघ ने इस बैठक में संगठन के भौगोलिक और प्रशासनिक ढांचे को अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने की दिशा में गंभीर विचार किया। उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्यों में दायित्व परिवर्तन इसी बड़े पुनर्गठन का हिस्सा माना जा रहा है।
सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों पर फोकस
नेपाल सीमा से सटे जिलों में विशेष दायित्व दिए जाने की जानकारी इस बात का संकेत है कि संघ आने वाले समय में सीमावर्ती क्षेत्रों, सांस्कृतिक संपर्क क्षेत्रों और सामाजिक प्रभाव वाले जिलों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
बैठक के अंतिम दिन संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने संगठन के भविष्य की दिशा पर बात करते हुए समाज-निर्माण, एकात्म दृष्टि और व्यापक राष्ट्रीय मुद्दों पर संघ की सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने सरकार के कुछ कदमों को देशहित में बताया और सामाजिक एकता पर जोर दिया।