पॉक्सो केस में विवेचक ही लापरवाह तो फिर कैसे मिलेगा त्वरित न्यायः गवाही से गायब दरोगा पर कोर्ट सख्त, पुलिस कमिश्नर को दिये वेतन रोकने के आदेश

आगरा। आगरा में नाबालिग से दुष्कर्म जैसे संवेदनशील पॉक्सो एक्ट के मुकदमे में पुलिस की लापरवाही न्याय की राह में रोड़ा बनती नजर आ रही है। अदालत में सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि मामले के विवेचक लगातार समन और वारंट के बावजूद गवाही देने न्यायालय नहीं पहुंच रहे हैं। इस गंभीर स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कुंदन किशोर सिंह ने पुलिस कमिश्नर को संबंधित दरोगा का वेतन अग्रिम आदेश तक रोकने के आदेश जारी कर दिए हैं। अब बड़ा सवाल उठ रहा है कि जब खुद विवेचक ही अदालत में पेश नहीं होंगे तो पीड़ित को त्वरित न्याय कैसे मिलेगा।

Mar 11, 2026 - 18:55
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पॉक्सो केस में विवेचक ही लापरवाह तो फिर कैसे मिलेगा त्वरित न्यायः गवाही से गायब दरोगा पर कोर्ट सख्त, पुलिस कमिश्नर को दिये वेतन रोकने के आदेश

2021 का मामला, नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म का आरोप

मामला आगरा के अछनेरा थाना क्षेत्र का है। वर्ष 2021 में आरोपी राम सिंह उर्फ रामू सिंह पर आरोप लगा था कि उसने एक नाबालिग बालिका को अगवा कर धमकी दी और उसके साथ दुष्कर्म किया।

घटना सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। मामला न्यायालय में विचाराधीन है और इसकी सुनवाई जारी है।

वारंट जारी होने के बावजूद अदालत नहीं पहुंचे विवेचक

इस केस के विवेचक एसआई प्रदीप कौशिक हैं, जो वर्तमान में थाना एकता में तैनात बताए जा रहे हैं। अदालत में केस की सुनवाई के दौरान बार-बार उन्हें गवाही के लिए बुलाया गया।

न्यायालय की ओर से समन और वारंट जारी होने के बावजूद भी विवेचक अदालत में उपस्थित नहीं हुए। लगातार अनुपस्थिति से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी।

अदालत ने दिखाया कड़ा रुख

मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कुंदन किशोर सिंह ने कड़ा रुख अपनाया। न्यायालय ने आदेश देते हुए पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि एसआई प्रदीप कौशिक का वेतन अग्रिम आदेशों तक रोक दिया जाए। अदालत का यह कदम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि न्यायिक प्रक्रिया में लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

न्याय व्यवस्था पर बड़ा सवाल

यह मामला एक गंभीर सवाल खड़ा करता है कि जब पॉक्सो जैसे संवेदनशील मामलों में भी विवेचक समय पर गवाही देने नहीं पहुंचेंगे तो पीड़ित को त्वरित न्याय कैसे मिलेगा?

नाबालिग पीड़ितों के मामलों में न्याय में देरी का मतलब है पीड़ित परिवार की पीड़ा का और लंबा खिंचना। ऐसे में पुलिस और विवेचना अधिकारियों की जिम्मेदारी और भी अधिक बढ़ जाती है।

SP_Singh AURGURU Editor