सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी, आगरा के राजामंडी जमीन विवाद में 8 अफसरों के खिलाफ अवमानना याचिका

राजा की मंडी बाजार स्थित चंद्रलोक होटल और दुकानों से जुड़े सरकारी जमीन कब्जा मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कार्रवाई न होने पर वादी अमरजोत सिंह सूरी ने अवमानना याचिका दायर की है। याचिका में प्रमुख सचिव सहित आठ प्रशासनिक अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है। कोर्ट ने 3 फरवरी को 17 फरवरी तक कब्जा हटाने का आदेश दिया था, लेकिन अभी तक प्रशासन ने कार्रवाई पूरी नहीं की है।

Mar 9, 2026 - 16:52
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी, आगरा के राजामंडी जमीन विवाद में 8 अफसरों के खिलाफ अवमानना याचिका
राजामंडी बाजार

आगरा। आगरा के राजा की मंडी बाजार स्थित चंद्रलोक होटल और आसपास की दुकानों से जुड़े सरकारी जमीन कब्जा विवाद में मामला फिर गरमा गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर वादी अमरजोत सिंह सूरी ने कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। याचिका में प्रदेश के प्रमुख सचिव सहित आठ प्रशासनिक अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 3 फरवरी को सुनवाई के दौरान प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि बाजार में सरकारी जमीन पर हुए कब्जों को हटाकर जमीन को मुक्त कराया जाए। कोर्ट ने इस कार्रवाई को 17 फरवरी तक पूरा करने का समय भी निर्धारित किया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 10 फरवरी को प्रशासन की संयुक्त कमेटी ने राजा की मंडी बाजार में पैमाइश करवाई थी। इस दौरान जिन दुकानों के निर्माण में सरकारी जमीन पर कब्जा पाया गया, उन पर निशान भी लगाए गए थे। लेकिन पैमाइश के बाद करीब दो सप्ताह बीत जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से आगे की कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

इसी देरी को लेकर वादी अमरजोत सिंह सूरी ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की है। याचिका में प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को पक्षकार बनाया गया है। इसके अलावा एडीएम, एसडीएम और सहायक नगर आयुक्त को भी याचिका में शामिल किया गया है।

बताया जा रहा है कि राजा की मंडी बाजार की जमीन को लेकर यह विवाद करीब 18 वर्षों से चल रहा है। विभिन्न जांचों में यह सामने आया है कि बाजार की कई दुकानों के निर्माण में सरकारी जमीन पर कब्जा किया गया है। इसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। अब अवमानना याचिका दाखिल होने के बाद माना जा रहा है कि प्रशासन पर कोर्ट के आदेश का पालन करने का दबाव और बढ़ सकता है।