अमेरिकी टैरिफ वॊर में उभरकर निकलेगा भारत

अमेरिका की ट्रम्प सरकार ने अपने टैरिफ्स की घोषणा कर दी है। पांच अप्रैल से अमेरिका में हर निर्यात पर 10 अतिरिक्त टैरिफ़ और 10 अप्रैल से घोषित टैरिफ लागू होंगे। यह टैरिफ उस देश के साथ व्यापार घाटे के आधार पर तय किए गए हैं और यह अब तक जिस देश के साथ जो टैरिफ़ है, यह उस पर अतिरिक्त टैरिफ होगा। 

Apr 4, 2025 - 12:24
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अमेरिकी टैरिफ वॊर में उभरकर निकलेगा भारत

टैरिफ से सभी देश सकते में हैं। उससे भी अधिक अमेरिका के इम्पोर्टर सकते में हैं,  क्योंकि यह भार उन पर पड़ने वाला है न कि निर्यातकों पर। अमेरिका में अभी तक कंज्यूमर प्रोडक्ट काफ़ी सस्ते थे। पूरे विश्व के पर्यटकों के लिए एक बड़ा शॉपिंग सेंटर था। अब इस पर बड़ा झटका लग सकता है। एक ओर अमेरिका का ट्रेड घाटा कम होगा तो दूसरी ओर अमेरिका के उपभोक्ताओं पर सीधे मार पड़ेगी। इससे अर्थव्यवस्था में भी मंदी आ सकती है और ट्रम्प को बड़ा विरोध भी झेलना पड़ सकता है।

हालांकि यह जानने में कुछ समय लगेगा कि एचएसएन कोड के अनुसार किस वस्तु पर कितना टैरिफ़ है। जहां तक जूते का प्रश्न है, भारत सर्वाधिक बेहतर स्थिति में है। निश्चित रूप से भारत का निर्यात अमेरिका में बढ़ेगा। भारत से अमेरिका को निर्यात पर अभी तक 8.5 ड्यूटी थी। यह बढ़कर अब 35.5 प्रतिशत हो सकती है। वहीं चाइना पर 54%, वियतनाम पर 49% कंबोडिया पर 46% , इंडोनेशिया पर 39+10 कुल 49%, बांग्लादेश-पाकिस्तान पर एमएफएन के तहत 0 के बावजूद 37 और 29 % ड्यूटी होगी। यही देश मुख्य रूप से जूता निर्यातक हैं। स्पष्ट रूप से चीन से बड़ा निर्यात शिफ्ट होगा।

भारत लगातार एफटीए मुक्त व्यापार पर भी काम कर रहा है। यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ यह हो चुका है। यूके के साथ एफटीए पर बातचीत में बड़ी प्रगति है। अमेरिका के साथ भी लगातार बात जारी है।

कुल मिलाकर यह भारत का समय है। जूता जैसे श्रम आधारित उद्योगों में संभावनाएं भारत के लिए सदैव बनी रहेंगी। इस टैरिफ़ वॉर में भारत और उभरकर निकलेगा।

-पूरन डावर

चिंतक एवं विश्लेषक

SP_Singh AURGURU Editor