भारतीय वायुसेना का सुखोई फाइटर जेट लापता,  रडार से संपर्क टूटा,  असम के जोरहाट से भरी थी उड़ान

भारतीय वायुसेना का सुखोई-30 एसकेआई फाइटर जेट लापता हो गया है। गुवाहाटी में रक्षा मंत्रालय के पीआरओ ने बताया है कि फाइटर एयरक्राफ्ट का रडार से संपर्क टूट गया है।

Mar 5, 2026 - 22:13
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भारतीय वायुसेना का सुखोई फाइटर जेट लापता,  रडार से संपर्क टूटा,  असम के जोरहाट से भरी थी उड़ान


गुवाहाटी। भारतीय वायु सेना का एक सुखोई फाइटर जेट लापता हो गया है।  एसयू-30 जेट ने असम के जोरहाट से उड़ान भरी थी। उसके बाद कर्बी आंगलॉन्ग जिले के आसमान में रडार से अचानक गायब हो गया। गुवाहाटी में रक्षा मंत्रालय के पीआरओ ने बताया है कि फाइटर एयरक्राफ्ट का रडार से संपर्क टूट गया है।

भारतीय वायुसेना ने सुखोई 30 के लापता होने की घटना को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर जानकारी दी है। पोस्ट में लिखा, 'भारतीय वायु सेना का एक एसयू-30 एमकेआई विमान लापता बताया जा रहा है। विमान ने असम के जोरहाट से उड़ान भरी थी और आखिरी बार शाम 7:42 बजे संपर्क हुआ था। अधिक जानकारी जुटाई जा रही है। खोज एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है।'

राफेल के बाद एसयू-30एमकेआई भारतीय वायुसेना का सबसे शक्तिशाली फाइटर जेट है। यह एयर डिफेंस, डीप स्ट्राइक और समुद्री अभियानों में निर्णायक भूमिका निभाता है। मौजूदा समय में भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट के बेड़े में सुखोई-30 एमकेआई ही हैं।

सुखोई-30 एमकेआई को 'सुपर सुखोई' प्रोग्राम के तहत आधुनिक बनाने की तैयारी है। साल 2040 तक इनको पूरी तरह से सक्षम बनाने के लिए ऐसा करना जरूरी है। बताया जा रहा है कि 63,000 करोड़ के प्रोजेक्ट में, 84 विमानों को स्वदेशी एएसएई रडार, नई एवियोनिक्स, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट और लंबी दूरी की मिसाइलों (जैसे ब्रह्मोस) से लैस किया जाएगा, जिससे उनकी उम्र 25-30 साल बढ़ जाएगी।

भारतीय वायु सेना में सुखोई एसयू-30एमकेआई फाइटर जेट साल 2002 में शामिल किए गए थे। सुखोई के लिए भारत ने रूस से 1996 में ही डील की थी। सुखोई-30 का पहला बैच 1997 में भारत को डिलीवर किया गया था। हालांकि अपडेटेड सुखोई-30एमकेआई 2002 में भारतीय वायुसेना का हिस्सा बने. इन लड़ाकू विमानों को सुखोई और हिंदुस्तान  एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ मिलकर उत्पादन किया है। ज्वाइंट प्रोडक्शन का पहला सुखोई-30 नवंबर 2004 में वायुसेना में शामिल हुआ. वर्तमान में एसयू-30एमकेआई भारतीय वायुसेना की रीढ़ हैं। इनकी संख्या 200 से ज्यादा है।