अमेरिका को ईरानी युद्धपोत की जानकारी भारतीय नेवी ने नहीं दी थी, सरकार ने दावे को किया खारिज, कहा-निराधार और बेतुका
अमेरिका ने जिस ईरानी युद्धपोत को हिंद महासागर में डुबोया, उसको लेकर भारतीय नौ सेना ने किसी तरह की खुफिया जानकारी नहीं दी थी। सरकारी सूत्रों ने इस तरह के दावों को पूरी तरह से खारिज किया है।
नई दिल्ली। शीर्ष सरकारी सूत्रों ने शुक्रवार को उन दावों को निराधार और बेतूका बताया है कि भारतीय नौसेना ने अमेरिका को उस ईरानी युद्धपोत के बारे में खुफिया जानकारी मुहैया करवाई थी, जिसे उसने समुद्र में डुबो दिया। दो दिन पहले एक अमेरिकी मिलिट्री सबमरीन ने टॉरपीडो से हमला करके ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना को हिंद महासागर में डुबो दिया था।
सरकारी सूत्रों ने इस तरह की रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए इन दावों को पूरी तरह से निराधार बताया है। बुधवार को अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी ने श्रीलंकाई समुद्र के पास, भारत के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन से लगभग 370 किलोमीटर दूर ईरान के युद्धपोत आईआरआईएस ना पर हमला करके उसे समु्द्र में डुबो दिया था।
एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार भारत ने अमेरिका या उसकी मिलिट्री को किसी भी तरह की कोई खुफिया सहायता नहीं उपलब्ध करवाई। उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत और अमेरिका के बीच जो संवाद और लॉजिस्टिक समझौता (लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट ) है, ऐसी परिस्थितियों में वह खुद से अमल में नहीं आता।
इस अमेरिकी हमले में कम से कम 87 ईरानी नाविक मारे गए हैं। इस हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध की तीव्रता और बढ़ गई है। ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस देना भारत की ओर से विशाखापत्तनम में आयोजित मिलन 2026 मल्टीलैटेरल नेवल एक्सरसाइज में हिस्सा लेकर ईरान लौट रहा था और पश्चिम एशिया में जारी जंग से हजारों किलोमीटर दूर आकर उसपर हमला कर दिया गया।
इस बीच रायसीना डायलॉग में ईरानी उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने दावा किया है कि ईरान का युद्धपोत 'निहत्था और खाली'था। उन्होंने कहा, 'यह बहुत दुखद, बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। वह हमारे भारतीय मित्र के निमंत्रण पर था,एक अंतरराष्ट्रीय युद्धाभ्यास में भाग ले रहा था। यह औपचारिक था, बिना हथियार के था, खाली था।'
सच्चाई तो ये है कि यह श्रीलंका के उत्तरदायित्व वाले समुद्री क्षेत्र में था, लेकिन फिर भी जब भारतीय नौ सेना को आपात संदेश मिला तो इसने सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन लॉन्च किया। श्रीलंकाई नेवी की मदद के लिए एक मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट भी तुरंत भेजा गया और एक और एयरक्राफ्ट भी गिराए जा सकने वाले लाइफ राफ्ट के साथ स्टैंडबाय पर रखा गया था।