जयशंकर पहुंचे दक्षिणी अमेरिकी देश सूरीनाम, सामरिक और सांस्कृतिक पहुंच को करेंगे मजबूत

विदेश मंत्री एस जयशंकर 9 दिनों की विदेश यात्रा में अब सूरीनाम पहुंचे हैं। खाड़ी संकट के बीच उनकी इस विदेश यात्रा का मकसद गिरमिटिया देशों में मौजूद भारत की विरासत को और मजबूत करना है।

May 6, 2026 - 19:48
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 जयशंकर पहुंचे दक्षिणी अमेरिकी देश सूरीनाम, सामरिक और सांस्कृतिक पहुंच को करेंगे मजबूत

नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर पहली बार बुधवार को दक्षिणी अमेरिकी देश सूरीनाम की यात्रा पर पहुंचे। कैरिबियन और दक्षिण अमेरिका के तीन देशों की उनकी इस हाई-प्रोफाइल यात्रा का यह दूसरा चरण है। लेकिन, ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी तनाव की वजह से पैदा हुए खाड़ी संकट के दौरान उनकी यह यात्रा अपने आप में दिलचस्प है।

विदेश मंत्री की इस सूरीनाम यात्रा का तात्कालिक मकसद दक्षिणी अमेरिकी और कैरिबियन क्षेत्र में भारत के सामरिक और सांस्कृतिक पहुंच को और मजबूत करना है, जिसके तार 'गिरमिटिया समुदाय' की वजह से डेढ़ सौ से ज्यादा वर्षों से जुड़े हुए हैं।

सूरीनाम से पहले एस जयशंकर तीन दिनों तक जमैका का यात्रा कर आए हैं। सूरीनाम के बाद जयशंकर अपनी इस विदेश यात्रा के अंतिम चरण में त्रिनिदाद और टोबैगो जाने वाले हैं। इन तीनों ही देशों में बड़ी संख्या में 'गिरमिटिया मजदूर' रहते हैं, जिनका भारत से कभी न खत्म होने वाला संबंध है।

विदेश मंत्री की इस यात्रा का मुख्य एजेंडा भारत-सूरीनाम के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत करना है। खासकर के विदेश मंत्री की इस यात्रा का मकसद भारत के 'गिरमिटिया विरासत' को नए जियोपॉलिटिक्स के दौर में सहेजना है। सूरीनाम में मौजूद 'गिरमिटिया समुदाय' 150 वर्षों से भी पहले भारत से चले गए थे।

सूरीनाम की मौजूदा जनसंख्या में भारतीय मूल के इन लोगों की तादाद लगभग 27 प्रतिशत है। गिरमिटिया वैसे अनुबंधित भारतीय मजदूर थे, जिन्हें 18वीं सदी के मध्य और 19वीं सदी की शुरुआत में अंग्रेज भारत से मजदूरी करवाने के लिए अनुबंध करके ले गए थे।

तब बेहतर काम की तलाश में बड़ी आबादी भारत से अन्य देशों में शिफ्ट हो गई थी। शुरू में उन्हें वहां पर ब्रिटिश कॉलोनियों में काम करने के इरादे से रखा गया, लेकिन धीरे-धीरे वे वहीं पर बस गए। आज की तारीख में भारतीय मूल के ये लोग काफी बेहतर स्थिति में हैं। गिरमिटिया शब्द गिरमिट से बना है, जिसका मतलब होता है एग्रीमेंट या अनुबंध। इस तरह से करार के तहत जिन भारतीय मजदूरों को अंग्रेज दूसरे देशों में ले गए, वह गिरमिटिया मजदूर कहलाने लगे।

गिरमिटिया मजदूर मॉरीशस, गुयाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, सूरीनाम, दक्षिण अफ्रीका, जमैका, केन्या, युगांडा और तंजानिया गए थे और वहीं बस गए।