यूपी कांग्रेस में बड़ा फेरबदल, आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश की कमान; इमरान मसूद कार्यकारी अध्यक्ष, देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद वरिष्ठ उपाध्यक्ष; चौधरी वीरेंद्र सिंह बने कांग्रेस विधायक दल के नेता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस में शुक्रवार को बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया गया। कांग्रेस ने प्रतापगढ़ की रामपुर खास विधानसभा सीट से विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। उनके साथ सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को प्रदेश कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अजय राय की जगह आराधना मिश्रा को यह जिम्मेदारी दी गई है। नई नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी।
कांग्रेस ने संगठन में दो वरिष्ठ उपाध्यक्षों की भी नियुक्ति की है। देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को प्रदेश कांग्रेस कमेटी में वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा चौधरी वीरेंद्र सिंह को उत्तर प्रदेश में कांग्रेस विधायक दल का नया नेता नियुक्त करने के प्रस्ताव को पार्टी अध्यक्ष ने मंजूरी दी है।
आराधना मिश्रा ‘मोना’ रामपुर खास से लगातार तीन बार विधायक चुनी गई हैं। वह वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी की बेटी हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने से पहले वह उत्तर प्रदेश कांग्रेस विधायक दल की नेता की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।
आराधना मिश्रा के प्रदेश अध्यक्ष बनने के साथ ही कांग्रेस विधायक दल में भी बदलाव हुआ है। अब चौधरी वीरेंद्र सिंह विधानसभा में पार्टी के विधायक दल का नेतृत्व करेंगे। इस बदलाव से प्रदेश संगठन और विधानसभा में कांग्रेस के नेतृत्व की जिम्मेदारियां अलग-अलग नेताओं के पास चली गई हैं।
सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को प्रदेश कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के साथ उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। वह इससे पहले उत्तर प्रदेश कांग्रेस में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
कांग्रेस ने निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के कार्यकाल और पार्टी के लिए उनके योगदान की भी सराहना की है। आराधना मिश्रा की नियुक्ति के साथ उत्तर प्रदेश कांग्रेस की प्रदेश इकाई का नेतृत्व अब नई टीम के हाथों में होगा।
यह फेरबदल ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से नियुक्तियों के औपचारिक फैसले के अलावा इन बदलावों के राजनीतिक प्रभाव को लेकर कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है। विभिन्न रिपोर्टों ने इसे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक पुनर्गठन के रूप में रिपोर्ट किया है।