लोकतंत्र और अपने नाम के अर्थ पर धब्बा हैं ममता बनर्जी, स्टालिन के सनातन विरोधी बयानों का हश्र सामने आ चुका- पूरन डावर
आगरा के उद्योगपति पूरन डावर ने बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव नतीजों को लोकतंत्र के लिए सकारात्मक बताते हुए अब तक हुई हिंसा के आरोपों पर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
आगरा। शहर के प्रमुख उद्योगपति पूरन डावर ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु की अब तक की राजनीति को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बंगाल में लंबे समय से चली आ रही हिंसक और भय आधारित राजनीति अब समाप्त होती दिख रही है, जो लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत है।
श्री डावर ने कहा कि ममता बनर्जी लोकतंत्र पर धब्बा हैं। वे अपने नाम के अर्थ पर भी धब्बा हैं। बंगाल में वर्षों तक रक्तरंजित राजनीति होती रही, जहां सैकड़ों लोग मारे जाते रहे और आम लोगों के लिए अपनी बात कहना भी कठिन हो गया था। पंचायत चुनावों में स्थिति ऐसी बताई जाती रही कि लोग खुलकर चुनाव तक नहीं लड़ पाते थे। अब लंबे समय बाद पहले वामपंथ और फिर ममता बनर्जी के शासन से प्रदेश को मुक्ति मिली है, जो लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है।
उन्होंने आगे कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से राजनीतिक प्रतिशोध का समर्थक नहीं हैं, लेकिन जिन मामलों में ममता बनर्जी की सरकार के दौरान राजनीतिक हिंसा और हत्याओं के आरोप लगे हैं, उनमें निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए।
तमिलनाडु के चुनाव परिणाम पर श्री डावर ने कहा कि स्टालिन सनातन को खत्म करने में लगे हुए थे। सनातन उन्हें बीमारी लगती थी। शायद वे भूल गये कि सनातन को चुनौती का मतलब है- समस्त सृष्टि को चुनौती। सनातन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की आधारशिला है। सनातन विरोधी बयानों का हश्र सामने है। स्टालिन अपनी सीट तो हारे ही, अपने बेटे उदयनिधि की सीट भी हारने से नहीं बचा सके।
श्री डावर ने कहा कि देश की जनता अब अधिक जागरूक हो चुकी है और वह शासन, विचारधारा और सामाजिक मूल्यों, तीनों को ध्यान में रखकर अपना निर्णय ले रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में राजनीति अधिक सकारात्मक और विकास केंद्रित दिशा में आगे बढ़ेगी।