गुरमत समागम में उमड़ा आस्था का सैलाब, कीर्तन-कथा से गूंजा गुरुद्वारा गुरु का ताल, देशभर से पहुंचे रागी जत्थे और प्रचारक, देर रात तक चला कीर्तन दरबार, 3 अक्टूबर को होगा अमृत संचार
आगरा। गुरुद्वारा गुरु का ताल में चल रहे 39वें सालाना तीन दिवसीय गुरमत समागम के दूसरे दिन कीर्तन और कथा विचार की अमृतमयी धारा में बड़ी संख्या में संगत ने भाग लिया। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे रागी जत्थों, प्रचारकों और सिंह साहिबान ने गुरबाणी कीर्तन और कथा विचार के माध्यम से संगत को गुरु चरणों से जोड़ने के साथ नई पीढ़ी को सिखी के मार्ग पर चलने और गुरु मर्यादा का पालन करने का संदेश दिया। सुबह से देर रात तक कीर्तन दरबार में श्रद्धालुओं की बड़ी मौजूदगी रही।

गुरमत समागम में लंगर की व्यवस्थाओं का जायजा लेते संत बाबा प्रीतम सिंह।
दूसरे दिन का पहला दीवान भाई नंदलाल दीवान हॉल में सुबह आठ बजे शुरू हुआ। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की सवारी के दीवान हॉल में पहुंचने और गुरु महाराज के प्रकाश के बाद कीर्तन समागम आरंभ हुआ। सबसे पहले गुरुद्वारा गुरु का ताल में संचालित गुरमत विद्यालय के बच्चों ने कीर्तन प्रस्तुत किया। इसके बाद गुरुद्वारा गुरु का ताल के हजूरी रागी जत्थों ने हाजिरी भरी।
समागम में भाई हरजोत सिंह जख्मी और भाई तरनवीर सिंह रब्बी ने इलाही वाणी का कीर्तन कर संगत को निहाल किया। पंजाब से पहुंचीं बीबी दिलेर कौर खालसा के दाढ़ी जत्थे ने वीर रस में गुरुओं की शौर्य गाथाएं प्रस्तुत कीं। इससे कीर्तन दरबार का माहौल जोश और श्रद्धा से भर उठा।
गुरुद्वारा बंगला साहिब, नई दिल्ली के हेड ग्रंथी ज्ञानी रणजीत सिंह, गुरुद्वारा शीशगंज साहिब, चांदनी चौक दिल्ली के हेड ग्रंथी ज्ञानी अंग्रेज सिंह, दरबार साहिब अमृतसर से आए सिंह साहिब निशान सिंह और पंजाब के कथा वाचक भाई रणजीत सिंह गौहरे मस्कीन ने कथा विचार किया। उन्होंने नई पीढ़ी को गुरमत से जोड़ने, सिखी की राह पर चलने और गुरु मर्यादा का पालन करने का संदेश दिया।
गुरुद्वारा गुरु का ताल के मौजूदा मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह ने बताया कि गुरुद्वारा गुरु का ताल की सेवा संभालकर उसे भव्य स्वरूप प्रदान करने वाले संत बाबा साधू सिंह जी मौनी और बाबा निरंजन सिंह जी की स्मृति में प्रतिवर्ष इस गुरमत समागम का आयोजन किया जाता है।
दूसरा दीवान शाम छह बजे रहिरास साहिब के पाठ के साथ शुरू हुआ और रात दो बजे तक चला। समापन से पहले आनंद साहिब का पाठ हुआ। इसके बाद अरदास और हुकमनामा के साथ दीवान की समाप्ति हुई।
24 घंटे लंगर-चाय की सेवा
गुरमत समागम में उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर, पीलीभीत के साथ उत्तराखंड और मध्य प्रदेश के धौलपुर, डबरा, ग्वालियर तथा पंजाब से भी बड़ी संख्या में संगत पहुंची। श्रद्धालुओं के ठहरने और लंगर की विशेष व्यवस्था की गई है।
गुरुद्वारा में वर्षों से लंगर की सेवा संभाल रहे बाबा अमरीक सिंह ने बताया कि कीर्तन समागम के दौरान 24 घंटे लंगर और चाय की सेवा चलती है। हर चार से पांच घंटे बाद अलग-अलग व्यंजन तैयार किए जाते हैं। इस बार उड़द, चना और मूंग की दाल, बेसन की कढ़ी, आलू की सब्जी, पूरी, खीर और विशेष रूप से जलेबी तैयार की जा रही है।
लंगर की सेवा के लिए सितारगंज से भाई मंजसेवा समिति के 150 से अधिक सदस्य भी प्रतिवर्ष पहुंचते हैं। संगत को श्रद्धा और प्रेम के साथ लंगर वितरित किया जा रहा है। संत बाबा प्रीतम सिंह कीर्तन दरबार के साथ श्रद्धालुओं के ठहरने, लंगर और चाय की व्यवस्थाओं का लगातार निरीक्षण कर रहे हैं।
3 अक्टूबर को होगा अमृत संचार
गुरुद्वारा गुरु का ताल के मीडिया प्रभारी जसबीर सिंह जस्सी ने बताया कि समागम के अंतिम दिन 3 अक्टूबर को सुबह गुरुद्वारा मंजी साहिब में अमृत संचार कराया जाएगा। अमृत पान करने वाले श्रद्धालुओं से सुबह केसी स्नान कर स्वच्छ वस्त्रों में सुबह नौ बजे तक गुरुद्वारा मंजी साहिब पहुंचने को कहा गया है।
दिल्ली से आए पंज प्यारे श्रद्धालुओं को अमृत पान कराएंगे। अमृत पान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को ककार दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से उपलब्ध कराए जाएंगे।
ये रहे मौजूद
समागम में जत्थेदार बाबा पाल सिंह सितारगंज, जत्थेदार बाबा अमर सिंह बंडा शाहजहांपुर, जत्थेदार सतनाम सिंह निजामाबाद, महंत महेंद्र सिंह, राजू सलूजा, श्री गुरु सिंह सभा के प्रधान कवलदीप सिंह, गुरुद्वारा माईथान के हेड ग्रंथी ज्ञानी कुलविंदर सिंह, दलजीत सिंह सेतिया, उपेंद्र सिंह लवली, बॉबी वालिया, परमजीत सिंह सरना, श्याम भोजवानी, चौधरी मनजीत सिंह, महंत हरपाल सिंह, ग्रंथी अजायब सिंह टीटू, ग्रंथी हरबंस सिंह, ग्रंथी सतवीर सिंह, सुशील, हरनाम सिंह, ज्ञानी केवल सिंह और भाई जोगा सिंह प्रमुख रूप से मौजूद रहे।