दिमाग में मिला तनाव का ‘मेमोरी सर्किट’, पुराने अनुभव तय करते हैं नए खतरे पर प्रतिक्रिया, वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस में खोजा अनदेखा तंत्र
न्यूयॉर्क। तनाव बीत जाने के बाद भी उसका असर दिमाग में बना रह सकता है। वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क में एक ऐसे सर्किट की पहचान की है, जो पिछले तनावपूर्ण अनुभवों की जानकारी को संभालकर रखता है और बाद में सामने आने वाले खतरे पर प्रतिक्रिया की तीव्रता को प्रभावित करता है। अमेरिका के माउंट सिनाई स्थित इकान स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने यह सर्किट मस्तिष्क के एंटीरियर हाइपोथैलेमिक न्यूक्लियस (एएचएन) नामक हिस्से में पाया है। शोध के निष्कर्ष 30 सितंबर को प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका नेचर में प्रकाशित हुए हैं।
शोधकर्ताओं ने तनाव और खतरे से जुड़ी मस्तिष्क की गतिविधियों को समझने के लिए चूहों पर प्रयोग किए। उन्होंने पाया कि जिन चूहों को पहले तनावपूर्ण अनुभव हो चुका था, उनके मस्तिष्क में बाद की तनावपूर्ण परिस्थितियों के दौरान एएचएन सर्किट अधिक संवेदनशील हो गया। यह सर्किट नए खतरे के सामने शरीर की रक्षात्मक प्रतिक्रिया की तीव्रता को प्रभावित करता दिखाई दिया।
तनाव का असर ‘वॉल्यूम कंट्रोल’ जैसा
शोधकर्ताओं के अनुसार एएचएन की गतिविधि बढ़ाने पर चूहों की रक्षात्मक प्रतिक्रिया अधिक तीव्र हुई, जबकि इसकी गतिविधि कम करने पर प्रतिक्रिया घट गई। वरिष्ठ शोधकर्ता डेनिस काई ने इसकी तुलना एक ऐसे ‘वॉल्यूम कंट्रोल’ से की, जो खतरे के प्रति प्रतिक्रिया को तेज या धीमा कर सकता है।
शोध में यह भी पाया गया कि अमिगडाला से एएचएन तक पहुंचने वाले तंत्रिका मार्ग को निष्क्रिय करने पर पिछले तनाव के कारण बाद के खतरे के प्रति बढ़ी हुई प्रतिक्रिया दिखाई नहीं दी। इससे वैज्ञानिकों को संकेत मिला कि मस्तिष्क पिछली प्रतिकूल परिस्थितियों की जानकारी का इस्तेमाल भविष्य की प्रतिक्रिया की तीव्रता तय करने में करता है।
हाइपोथैलेमस में ऐसी भूमिका ने चौंकाया
तनाव से जुड़े अध्ययन आमतौर पर अमिगडाला, हिप्पोकैम्पस और प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स जैसे मस्तिष्क क्षेत्रों पर केंद्रित रहे हैं। इस शोध में वैज्ञानिकों ने पहले से तय किसी हिस्से पर ध्यान देने के बजाय पूरे मस्तिष्क में उन क्षेत्रों की तलाश की, जो पिछले तनाव के बाद बदलते हैं। इसी प्रक्रिया में एएचएन सामने आया।
शोधकर्ताओं ने पाया कि यह छोटा-सा क्षेत्र केवल तनाव को दर्ज नहीं करता, बल्कि खतरे के प्रति प्रतिक्रिया की तीव्रता को नियंत्रित करने में भी भूमिका निभाता है। पहले इसे मुख्य रूप से शरीर के बुनियादी कार्यों और रक्षात्मक व्यवहारों से जोड़ा जाता था।
मानसिक स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए नई दिशा
वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले तनाव के बाद कुछ लोग भविष्य के तनाव के प्रति अधिक संवेदनशील क्यों हो जाते हैं, इसे समझने में यह खोज मदद कर सकती है। भविष्य में यह जानकारी पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी), चिंता और अन्य तनाव संबंधी स्थितियों के अध्ययन में उपयोगी हो सकती है।
हालांकि शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि अभी यह निर्धारित करना बाकी है कि यही सर्किट इंसानों में तनाव की संवेदनशीलता में किस हद तक भूमिका निभाता है। इसलिए इस शोध को फिलहाल संभावित जैविक तंत्र की खोज के रूप में देखना उचित है, न कि किसी नए उपचार की खोज के रूप में।