ट्रेड टैक्स पर घिरता जा रहा नगर निगम, अब होटल और अस्पतालों ने भी मांगी राहत, सवाल- व्यापारियों को राहत तो होटल-हॉस्पिटल से भेदभाव क्यों?टैक्स खत्म न होने पर होटल व पर्यटन संस्थाएं बंद करने की चेतावनी
आगरा। महापौर द्वारा विभिन्न व्यवसायिक मदों में ट्रेड टैक्स समाप्त करने की घोषणा अब नगर निगम के के लिए नई-नई चुनौतियां सामने ला रही है। व्यापारियों को राहत देने के फैसले के बाद अब होटल कारोबारियों और स्वास्थ्य संस्थानों ने भी अपने ऊपर से ट्रेड टैक्स हटाने की मांग तेज कर दी है। होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि अन्य व्यवसायों को राहत दी जा सकती है तो पर्यटन और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संस्थानों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है।
होटल कारोबारियों ने दी आंदोलन की चेतावनी
होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश चौहान और आईएमए के संयुक्त सचिव डॊ. रावत और डॊ. संजय चतुर्वेदी ने रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में नगर निगम की नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नगर निगम आगरा के विभिन्न व्यवसायों पर लगाया जाने वाला ट्रेड टैक्स समाप्त कर रहा है, जिससे अन्य व्यापारी वर्ग को सीधा लाभ मिलेगा।
उन्होंने मांग उठाई कि सबका साथ-सबका विकास की नीति के तहत होटल उद्योग और पर्यटन से जुड़े अन्य व्यवसायों को भी ट्रेड टैक्स से मुक्त किया जाए।
राकेश चौहान ने बताया कि इस संबंध में मेयर हेमलता दिवाकर कुशवाह को पत्र भी भेजा गया है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि नगर निगम ने पर्यटन व्यवसाय और होटल उद्योग के साथ भेदभाव किया तो शहर के होटल और अन्य प्रतिष्ठान बंद कर दिए जाएंगे।
आईएमए ने भी उठाई टैक्स राहत की मांग
उधर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की ओर से डॊ. रावत और डॊ. संजय चतुर्वेदी ने भी नगर निगम के फैसले पर सवाल खड़े करते हुए अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को ट्रेड टैक्स से बाहर करने की मांग की।
इस बारे में आईएमए के सचिव डॉ. रजनीश कुमार मिश्रा ने नगर आयुक्त को ज्ञापन भेजकर कहा है कि अस्पतालों पर लगाए जाने वाले विभिन्न कर और शुल्क स्वास्थ्य सेवाओं की लागत बढ़ा देते हैं, जिसका सीधा बोझ आम जनता पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि यदि अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को ट्रेड टैक्स व अन्य शुल्कों से राहत दी जाती है तो आमजन को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
नगर निगम की नीति पर उठने लगे सवाल
अब सवाल यह उठने लगा है कि जब नगर निगम व्यापारिक प्रतिष्ठानों को राहत देने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है तो पर्यटन और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को इससे बाहर क्यों रखा जा रहा है।
आगरा जैसी पर्यटन नगरी में होटल उद्योग हजारों लोगों को रोजगार देता है, वहीं अस्पताल और स्वास्थ्य संस्थान सीधे आम जनता की जरूरत से जुड़े हैं। ऐसे में दोनों संगठनों की मांगों ने नगर निगम की टैक्स नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
शहर के अन्य व्यापारिक संगठनों में भी इस मुद्दे को लेकर हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि यदि नगर निगम ने जल्द स्पष्ट नीति नहीं बनाई तो आने वाले दिनों में विरोध और तेज हो सकता है।