पालीवाल पार्क अवैध वसूली ही नहीं अय्याशी का भी अड्डा बना, ईको क्लब में मिले शराब पार्टी के सबूत और कंडोम रैपर, ठेका खत्म होने के बाद भी जारी टिकट वसूली, उद्यान विभाग पर मिलीभगत के आरोप, गरीब से बेटी के रिश्ते के नाम पर वसूले गये 200 रुपये

आगरा। शहर के हृदय स्थल कहे जाने वाले पालीवाल पार्क की हालत लगातार बदतर होती जा रही है। हरियाली, पर्यावरण और पारिवारिक वातावरण के लिए पहचाने जाने वाले इस पार्क पर शराबखोरी, अय्याशी और अवैध वसूली के गंभीर आरोप लग रहे हैं। पार्क के अंदर स्थित ईको क्लब से एक बार फिर ऐसे सबूत मिले हैं जिन्होंने पूरे मामले को सनसनीखेज बना दिया है।

May 12, 2026 - 09:14
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पालीवाल पार्क अवैध वसूली ही नहीं अय्याशी का भी अड्डा बना, ईको क्लब में मिले शराब पार्टी के सबूत और कंडोम रैपर, ठेका खत्म होने के बाद भी जारी टिकट वसूली, उद्यान विभाग पर मिलीभगत के आरोप, गरीब से बेटी के रिश्ते के नाम पर वसूले गये 200 रुपये
यही है पर्यावरण प्रेमी वह गरीब, जिससे पालीवाल पार्क में टिकट के अलावा 200 रुपये की अतिरिक्त वसूली की गई।

पालीवाल पार्क के ईको क्लब में पड़ा कचरा, जो रात में शराब पार्टी होने की गवाही दे रहा है।

स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों और पार्क से जुड़े लोगों के अनुसार ईको क्लब परिसर में शराब की बोतलों, बीयर केन, प्लास्टिक गिलासों और अन्य कचरे के साथ कंडोम के रैपर भी मिले हैं। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि रात के अंधेरे में पार्क को अय्याशी का अड्डा बनाया जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी गंभीर गतिविधियां पार्क के भीतर कैसे चल रही हैं और उद्यान विभाग इन्हें रोकने में पूरी तरह विफल क्यों दिखाई दे रहा है।

क्या विभाग की मिलीभगत से चल रहा खेल?

पालीवाल पार्क से जुड़े पर्यावरण प्रेमी लगातार इन मुद्दों को उठा रहे हैं, लेकिन अधिकारियों के स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में भारी नाराजगी है। ईको क्लब के संस्थापक प्रदीप खंडेलवाल ने सीधे तौर पर उद्यान अधीक्षक पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना विभागीय संरक्षण के इस तरह की गतिविधियां संभव नहीं हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण पार्क की गरिमा लगातार खत्म होती जा रही है। प्रदीप खंडेलवाल ने उद्यान अधीक्षक को तत्काल निलंबित कर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

ठेका खत्म, फिर भी जारी टिकटों की अवैध रूप से बिक्री

पालीवाल पार्क में अवैध वसूली का मामला भी एक बार फिर सामने आया है। रतनपुरा निवासी एक गरीब पर्यावरण रक्षक अपनी बेटी के रिश्ते के सिलसिले में पार्क के अंदर गया था। आरोप है कि ठेकेदार ने उससे प्रति व्यक्ति 10 रुपये टिकट के अलावा प्रवेश के नाम पर 200 रुपये वसूल लिये, जबकि उससे पहले 500 रुपये की मांग की जा रही थी। इतना ही नहीं, मोटरसाइकिल पार्किंग के नाम पर भी अलग से रुपये लिये गये। बता दें कि पार्क के आसपास की बस्तियों के लोग अपनी बेटियों को दिखाने के लिए पार्क का इस्तेमाल करते हैं। ठेकेदार ने इसी का लाभ उठाकर 200 रुपये अतिरिक्त झटक लिए।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस ठेकेदार का ठेका 9 अप्रैल को समाप्त हो चुका है, वह अब भी टिकटों की बिक्री कैसे कर रहा है? यही ठेकेदार पहले भी 10 रुपये की टिकट के बदले 20 रुपये वसूलने के आरोपों में घिर चुका है। उस समय मामला सुर्खियों में आया तो कार्रवाई के नाम पर केवल पार्क इंस्पेक्टर को हटाकर मामला शांत कर दिया गया।

अब लोगों का कहना है कि जब इंस्पेक्टर हटाया जा चुका है तो ठेका समाप्त होने के बाद भी उसी ठेकेदार को संरक्षण कौन दे रहा है?

जनाक्रोश बढ़ा, डीएम से कार्रवाई की मांग

पालीवाल पार्क में बढ़ती अव्यवस्थाओं को लेकर अब जनाक्रोश तेज होता जा रहा है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो पार्क की पहचान पूरी तरह खत्म हो जायेगी।

लोगों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर अवैध वसूली, शराब पार्टियों और कथित अय्याशी के मामलों पर कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही पार्क को परिवारों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ बनाने की अपील की गई है।

उद्यान विकास समिति क्या कर रही

ईको क्लब के संस्थापक प्रदीप खंडेलवाल ने कहा कि जब वे उद्यान विकास समिति के सदस्य थे, तब समय-समय पर महत्वपूर्ण विषय मंडलायुक्त और जिलाधिकारी के संज्ञान में लाए जाते थे।

उन्होंने कहा कि मंडलीय राजकीय उद्यान विकास समिति वर्ष 1860 के अधिनियम के अंतर्गत उपनिबंधक कार्यालय, आगरा में पंजीकृत कराई गई थी, जिसमें मुझे भी सदस्य नामित किया गया था। प्रश्न यह है कि पंजीकृत किसी सोसायटी की मूल नियमावली एवं संरचना को बिना साधारण सभा में विधिवत संशोधन पारित किए आखिर कैसे बदला जा सकता है? यदि बिना साधारण सभा की स्वीकृति एवं नियमावली संशोधन के यह परिवर्तन किया गया है, तो यह पूरी प्रक्रिया प्रथम दृष्टया अवैधानिक एवं गंभीर अनियमितताओं से युक्त प्रतीत होती है। ऐसे मामले को विधिक रूप से चुनौती भी दी जा सकती है। हालांकि वर्तमान समिति के सदस्यों और उनकी भूमिका पर क्या कहा जाए, यह विचारणीय विषय है।

SP_Singh AURGURU Editor