पीएम, गृहमंत्री पर एफआईआर के लिए लगाई याचिका, वकील को सीजेआई की फटकार, पूछा- किसने लाइसेंस दिया
सीएए के लिए एक वकील ने पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में डाली। लेकिन, सीजेआई की फटकार के बाद उसने दोबारा बेकार की याचिकाएं नहीं डालने का वादा किया और उसकी अर्जी खारिज हो गई।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करने वाले एक वकील को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई। मामला नागरिकता संशोधन कानून, 2019 ( सीएए ) से जुड़ा है। हालांकि, जब बाद में वकील ने अदालत के सामने यह वादा किया कि वह फिर कभी बेवजह की याचिकाएं नहीं डालेंगे तो सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने याचिका खारिज कर दी, उससे वसूली जाने वाली रकम पर भी रोक लगा दी।
शुक्रवार को भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की अदालत में राजस्थान हाई कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ चुनौती वाली याचिका पर सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने वकील पर सीएए बनाने के खिलाफ पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और तत्कालीन कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के खिलाफ 'बेवजह' याचिका डालने के लिए 50,000 रुपये की रकम वसूलने का आदेश दिया था।
एक समय सीजेआई सूर्यकांत ने वकील पूरन चंद्र सेन से यहां तक कह दिया कि 'इनपर कॉस्ट नहीं लगाया हाई कोर्ट ने? बैंड पहना नहीं है...लग रहा है कोई दंगल में उतरने आए हैं...।' सीजेआई ने फटकार लगाते हुए यहां तक कहा कि 'कितने साल हो गए वकालत करते आपको? आपको लाइसेंस देने की गलती किसने की। प्लीज ऐसी याचिकाएं न दायर करें..।' बेंच ने वकील से सवाल किया कि किस प्रक्रिया के तहत संवैधानिक पदाधिकारियों के खिलाफ संसद से कानून बनाने के लिए एफआईआर दर्ज करने को कहा जा सकता है।
इसके बारे में जस्टिस बागजी ने याचिकाकर्ता को बताया, 'आपके विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ राजनीतिक और सामाजिक मतभेद हो सकते हैं, इस मतभेद से अपराध नहीं बनता। अपराध कहां है?...मुख्य सवाल यह है कि अगर संसद कोई कानून पास करती है...तो क्या यह अपराध की श्रेणी में आ सकता है? आप वकील हैं, प्लीज खुद से ही पूछिए!'
सुनवाई के दौरान पता चला कि याचिकाकर्ता का पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन हुआ था। इसपर सीजेआई सूर्यकांत बोले, 'ओह, तो आप पंजाब और हरियाणा (बार) से हैं? तब आपको लाइसेंस देने की गलती किसने की? उसके लिए मैं जिम्मेदार नहीं हूं।'
सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई कि वकील होने के बाद भी अगर याचिकाकर्ता बेमतलब की याचिकाएं डालेगा तो इससे लीगल प्रोफेशन की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे। उन्होंने कहा, 'प्लीज इस तरह की बेकार की याचिकाएं मत फाइल कीजिए। आप वकील हैं,लोग अभी भी कानूनी बिरादरी को गंभीरता से लेते हैं। अगर आप किसी को सलाह देंगे, तो लोग उसपर भरोसा करेंगे और आप ऐसे केस फाइल करने में शामिल होंगे, तो लोग आप पर कैसे विश्वास करेंगे?'
एक समय वकील के बर्ताव से नाखुश होकर बेंच ने यहां तक चेतावनी दे दी थी कि वह उनपर हाई कोर्ट से लगाए गए 50,000 रुपये की रकम बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर देंगे। आखिर में अदालत ने कहा कि वकील ने दोबारा ऐसी याचिकाएं नहीं दर्ज करने का वादा किया है, इसी शर्त पर जुर्माने पर रोक लगाई जाती है और उसकी याचिका खारिज कर दी गई।