मौत के बाद भी रोशनी का संकल्प: आगरा के दो परिवारों ने नेत्रदान कर चार जिंदगियों में जगाई नई उम्मीद
मानवता की सबसे ऊंची मिसाल तब बनती है, जब कोई परिवार अपने गहरे दुख के बीच भी दूसरों के जीवन में उजाला भरने का फैसला करता है। आगरा में दो परिवारों ने अपने स्वजनों के निधन के बाद नेत्रदान कर न सिर्फ समाज को प्रेरित किया, बल्कि चार जरूरतमंदों के जीवन में रोशनी की नई किरण जगा दी।
आगरा। नेत्रदान को सबसे बड़ी मानव सेवा माना जाता है और इसी सेवा भाव को साकार करते हुए शहर के दो परिवारों ने समाज के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। इन परिवारों ने अपने स्वजनों के निधन के बाद उनके कॊर्निया दान कर दिए, जिससे अंधकारमय जीवन जी रहे चार लोगों की दुनिया रोशन हो सकेगी।
नेहरू नगर, आगरा निवासी रमेश चंद भाटिया (72), सुपुत्र स्व. हरीकिशन भाटिया का रविवार रात निधन हो गया। गमगीन माहौल के बीच उनके पुत्र गौरव भाटिया ने साहस और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए नेत्रदान का निर्णय लिया। उन्होंने क्षेत्र बजाजा कमेटी के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल से संपर्क कर पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।
इसी तरह प्रभु नगर, जयपुर हाउस निवासी श्रीमती सरोज देवी गोयल (66), धर्मपत्नी स्वर्गीय अनिल कुमार गोयल का सोमवार सुबह निधन हो गया। इस दुखद क्षण में भी उनके पुत्र पवन गोयल और आशीष कुमार गोयल ने समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाते हुए नेत्रदान का संकल्प लिया और कमेटी के पूर्व मंत्री राजेंद्र कुमार गोयल से संपर्क साधा।
सूचना मिलते ही एस.एन. मेडिकल कॉलेज की आई बैंक टीम सक्रिय हो गई। आई बैंक इंचार्ज डॉ. शेफाली मजूमदार के निर्देशन में ग्रीफ काउंसलर दीपक शर्मा और डॉक्टरों की टीम ने मौके पर पहुंचकर पूरी नेत्रदान प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।
इस सराहनीय कार्य में बजाजा कमेटी के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल, महासचिव राजीव अग्रवाल, नेत्रदान प्रभारी विष्णु जैन और मीडिया प्रभारी नंदकिशोर गोयल की सक्रिय भूमिका रही। सभी ने समाज के लोगों से अपील की है कि वे अपने जीवनकाल में नेत्रदान का संकल्प लें और मृत्यु के बाद अपने परिजनों को इसके लिए प्रेरित करें, ताकि अधिक से अधिक लोगों के जीवन में रोशनी लाई जा सके। नेत्रदान के लिए इच्छुक लोग 9319809451 पर संपर्क कर सकते हैं।