राजनीतिक दलों की मांग पूरी, पश्चिम बंगाल में दो चरणों में वोटिंग का फैसला, आयोग का हिंसामुक्त चुनाव का वादा
पश्चिम बंगाल में दो चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव पर बहस शुरू हो गई है, क्योंकि इससे पहले 7-8 चरणों में मतदान होते रहे हैं। टीएमसी को छोड़कर अन्य राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग से दो चरणों में वोटिंग कराने की मांग की थी।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 दो चरणों में होंगे। पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे। दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे। 2016 के विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में सात चरणों में मतदान हुआ था। कोविड के दौर में 2021 का विधानसभा चुनाव भी 8 चरणों में हुए थे। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि राज्य में तैयारियों की समीक्षा और राजनीतिक दलों की मीटिंग के बाद चुनाव की घोषणा की गई है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव निष्पक्ष और हिंसामुक्त होंगे।
2021 के विधानसभा चुनाव में 8 चरणों में मतदान हुए थे, तब टीएमसी ने आरोप लगाया था कि बीजेपी नेताओं के प्रचार कार्यक्रम के हिसाब से चुनाव की तिथियां तय की गई हैं। एसआईआर की प्रक्रिया अभी पश्चिम बंगाल में खत्म नहीं हुई है, इसलिए आयोग ने वोटिंग के लिए लंबा समय रखा है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, राज्य में 6.44 करोड़ वोटर मतदान करेंगे। असम विधानसभा चुनाव, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के बाद पश्चिम बंगाल में चुनाव की तिथियां रखी गई हैं। बताया जा रहा है कि सर्वदलीय मीटिंग में तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर सभी राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग से कम से कम समय में चुनाव खत्म कराने की मांग की थी। इसके बाद से तीन या चार चरणों में चुनाव की उम्मीद जताई जा रही थी।
एक्सपर्ट मानते हैं कि निर्वाचन आयोग ने पिछले चुनावों से सबक लिया है। जब ज्यादा चरणों में चुनाव होते हैं तो उसके लिए लंबे समय तक आयोग को भी तैयारी करनी पड़ती है। पैरामिलिट्री फोर्स और सुरक्षा बलों की उपलब्धता का भी आयोग ने ध्यान रखा है। 9 अप्रैल के बाद पैरामिलिट्री फोर्स को अन्य चुनावी राज्यों से बंगाल भेजा जाएगा। बंगाल में चुनावी हिंसा का इतिहास भी रहा है। ऐसे में दो चरण में चुनाव से लॉ एंड ऑर्डर के लिए बेहतर होगा।
बिहार में भी दो चरणों में चुनाव हुए थे और चुनावी हिंसा कम हुई थी। इसे चुनाव सुधार के एंगल से भी देखा जा रहा है, क्योंकि चुनावी प्रक्रिया के दौरान आचार संहिता लागू रहती है। कई विश्लेषक इसे अलग नजरिये से देख रहे हैं। असम और केरल, जहां कांग्रेस सीधे मुकाबले में है, वहां जल्दी चुनाव कराए गए हैं। इससे उलट पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में अप्रैल के आखिरी हफ्ते को मतदान के लिए चुना गया है।