भारत-पाक सीमा के पास राष्ट्रपति की ऐतिहासिक उड़ान, 'प्रचंड' से दिया आत्मनिर्भरता का मैसेज
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राजस्थान के जैसलमेर में भारत-पाक सीमा के पास स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में सह-पायलट के रूप में लगभग 25 मिनट की उड़ान भरी। ‘ऑलिव ग्रीन’ वर्दी में उन्होंने इसे आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया और वायु सैनिकों पर गर्व जताया। उड़ान जैसलमेर वायुसेना स्टेशन से भरी गई तथा पोकरण फायरिंग रेंज के ऊपर से गुजरी।
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राजस्थान के जैसलमेर जिले में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर (एलसीए) 'प्रचंड' में उड़ान भरी। इस दौरान भारतीय सेना की सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति ने 'आलिव ग्रीन' रंग की वर्दी और हेलमेट पहन प्रचंड में बतौर सह-पायलट उड़ान भरी। इस दौरान उन्होंने अपना अनुभव साझा किया।
शुक्रवार को जैसलमेर में स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में उड़ान भरने के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा, 'प्रचंड हेलिकॉप्टर आत्मनिर्भरता का एक प्रबल प्रतीक है। इस समय मैं प्रसिद्ध जैसलमेर किले के ऊपर उड़ान भर रही हूं। मुझे देश के वीर वायु सैनिकों पर अत्यंत गर्व है। आप लोगों को मेरा प्यार भरा नमस्कार... जय हिंद, जय भारत।' इस ‘प्रचंड’ हेलिकॉप्टर ने जैसलमेर वायुसेना स्टेशन से उड़ान भरी। उड़ान से पहले कैप्टन ने राष्ट्रपति को जानकारी दी।
राष्ट्रपति ने उड़ान भरने से पहले कॉकपिट से हाथ हिलाकर अभिभावन किया। इस लगभग 25 मिनट की उड़ान में ‘प्रचंड’ पोकरण फायरिंग रेंज के ऊपर से उड़ा जहां वायुसेना आज शाम ‘वायु शक्ति’ अभ्यास कर रही है। राष्ट्रपति मूर्मू भी इस अभ्यास में मौजूद हैं।
इससे पहले वायुसेना के चीफ एयर मार्शल ए.पी. सिंह ने वायुसेना स्टेशन पर राष्ट्रपति की अगुवाई की। इसके साथ मुर्मू लड़ाकू हेलीकॉप्टर में बतौर ‘सह-पायलट’ उड़ान भरने वाली देश की पहली राष्ट्रपति बनी हैं।
उन्होंने पिछले साल अक्टूबर में हरियाणा के अंबाला के वायुसेना स्टेशन पर राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी। अप्रैल 2023 में मूर्मू ने असम के तेजपुर वायुसेना स्टेशन पर सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी। लगभग 30 मिनट की उड़ान में उन्होंने हिमालय के साथ ब्रह्मपुत्र और तेजपुर घाटी को आसमान से देखा।
एलसीएच ‘प्रचंड’ भारत का पहला देश में ही डिजाइन और बनाया गया लड़ाकू हेलीकॉप्टर है। इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने बनाया है। इसमें कई ऐसी खूबियां है जो भारतीय वायुसेना की क्षमता को और मजबूत बनाते हैं।