सपा में राहुल चतुर्वेदी का कद बढ़ा, ढाई दशक की सक्रियता के बाद बने प्रदेश सचिव
आगरा के वरिष्ठ समाजवादी नेता राहुल चतुर्वेदी को प्रदेश सचिव बनाया गया है। 25 वर्षों से संगठन में सक्रिय चतुर्वेदी ने युवा ब्रिगेड से शुरुआत कर प्रदेश स्तर तक पहचान बनाई। संगठन विस्तार, युवा जुड़ाव और सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रियता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें यह जिम्मेदारी दी है।
युवा राजनीति से उठकर प्रदेश स्तर तक पहुंचे, संगठन विस्तार में निभाई अहम भूमिका
आगरा। आगरा की समाजवादी राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे राहुल चतुर्वेदी को पार्टी ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए प्रदेश सचिव नियुक्त किया है। करीब 25 वर्षों से संगठन से जुड़े चतुर्वेदी का राजनीतिक सफर जमीनी स्तर से शुरू होकर अब प्रदेश नेतृत्व तक पहुंच गया है।
समाजवादी पार्टी के इस फैसले को संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
राहुल चतुर्वेदी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1998 में मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड से की। 1998–2005 तक ब्रिगेड के आगरा महानगर अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और उनका युवाओं को जोड़ने और संगठन मजबूत करने पर फोकस रहा। इसके बाद उन्होंने प्रदेश स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई। वह 2005–2009 तक यूथ ब्रिगेड के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे। इस दौरान 25 से अधिक जिलों में युवा सम्मेलन आयोजित कराए। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाई।
महानगर संगठन में मजबूत पकड़
2009 से 2016 के बीच चतुर्वेदी ने आगरा महानगर में पार्टी के उपाध्यक्ष और महामंत्री के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने बूथ स्तर तक संगठन विस्तार पर जोर दिया और स्थानीय स्तर पर पार्टी की पकड़ मजबूत करने का प्रयास किया।
मेयर चुनाव में भी आजमाया दम
2017 में राहुल चतुर्वेदी ने आगरा से मेयर पद का चुनाव सपा प्रत्याशी के रूप में लड़ा।
हालांकि वे जीत दर्ज नहीं कर सके, लेकिन उन्हें युवाओं और व्यापारिक वर्ग का अच्छा समर्थन मिला, जिसने उन्हें शहर की राजनीति में एक मजबूत चेहरा बना दिया।
संगठन विस्तार और सामाजिक सक्रियता
पार्टी सूत्रों के अनुसार उन्होंने 1000 से अधिक कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़ा। स्थानीय मुद्दों पर आंदोलनों में राहुल की सक्रिय भागीदारी रही। साथ ही, उन्होंने सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए परशुराम जयंती, बुद्ध पूर्णिमा और ईद मिलन जैसे आयोजनों में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
क्या संकेत देता है यह फैसला
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह नियुक्ति आगामी चुनावों को देखते हुए संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। युवा और अनुभवी नेतृत्व के संतुलन के साथ पार्टी आगरा समेत पश्चिमी यूपी में ब्राह्मणों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है।