मेलों में रिकॉर्ड बिक्री, आगरा समेत प्रदेशभर में बढ़ी परंपरागत कला की चमक

लखनऊ । उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में आयोजित माटीकला मेलों में प्रदेश के कारीगरों और उनके हस्तशिल्प उत्पादों के विपणन में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है। इस अवधि में बोर्ड ने 10 दिवसीय माटीकला महोत्सव, 7 दिवसीय क्षेत्रीय मेले और 3 दिवसीय लघु माटीकला मेले आयोजित किए, जिनमें कुल 691 दुकानों के माध्यम से ₹4,20,46,322 की बिक्री हुई।

Nov 3, 2025 - 18:45
 0
मेलों में रिकॉर्ड बिक्री, आगरा समेत प्रदेशभर में बढ़ी परंपरागत कला की चमक
इमेज फोटो

योगी सरकार के प्रयासों से बढ़ी माटीकला उत्पादों की मांग, ₹4.20 करोड़ की हुई बिक्री, पिछले वर्ष से 27.7% की वृद्धि

लखनऊ । उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में आयोजित माटीकला मेलों में प्रदेश के कारीगरों और उनके हस्तशिल्प उत्पादों के विपणन में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है। इस अवधि में बोर्ड ने 10 दिवसीय माटीकला महोत्सव, 7 दिवसीय क्षेत्रीय मेले और 3 दिवसीय लघु माटीकला मेले आयोजित किए, जिनमें कुल 691 दुकानों के माध्यम से ₹4,20,46,322 की बिक्री हुई।

यह आंकड़ा पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 की कुल बिक्री ₹3,29,28,410 से ₹91,17,912 अधिक है।  यानी लगभग 27.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई।  

 आगरा रहा आकर्षण का केंद्र

लखनऊ के खादी भवन में 10 से 19 अक्टूबर 2025 तक आयोजित 10 दिवसीय माटीकला महोत्सव में 56 दुकानों द्वारा ₹1,22,41,700 की बिक्री हुई।
वहीं गोरखपुर, आगरा, कानपुर देहात और मुरादाबाद में 13 से 19 अक्टूबर तक आयोजित 7 दिवसीय क्षेत्रीय मेलों में कुल 126 दुकानों द्वारा ₹78,84,410 का विक्रय दर्ज हुआ।


इसी क्रम में प्रदेश के 70 जनपदों, जिनमें आगरा भी शामिल है, में 17 से 19 अक्टूबर तक आयोजित 3 दिवसीय लघु माटीकला मेलों में 509 दुकानों द्वारा ₹2,19,20,212 की बिक्री की गई।

 गुणवत्ता और सहयोग से मिली सफलता

हालांकि इस वर्ष कुल दुकानों की संख्या पिछले वर्ष से कम रही, फिर भी बिक्री में वृद्धि यह दर्शाती है कि उत्पादों की गुणवत्ता, प्रदर्शनी व्यवस्था और विपणन सहयोग अत्यंत प्रभावी रहा। यह प्रवृत्ति इस बात का संकेत है कि माटीकला उत्पादों के प्रति लोगों में जागरूकता और आकर्षण तेजी से बढ़ रहा है। बोर्ड का लक्ष्य है कि उन्नत प्रदर्शनी प्रबंधन, प्रशिक्षण, डिजाइन विकास और ब्रांडिंग गतिविधियों के माध्यम से कारीगरों को दीर्घकालिक आर्थिक सशक्तिकरण प्रदान किया जाए।

योगी सरकार के प्रयासों से संरक्षित हो रही परंपरागत कला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार परंपरागत कारीगरों और शिल्पियों की सामाजिक सुरक्षा, तकनीकी विकास और आर्थिक सुदृढ़ता के लिए निरंतर कार्यरत है। माटीकला बोर्ड के गठन से हजारों परिवारों को आत्मनिर्भरता का नया आधार मिला है। सरकार ने प्रजापति समुदाय से जुड़े कारीगरों के लिए गांवों के तालाबों से मिट्टी निकालने की सुविधा निःशुल्क कर दी है, जिससे उत्पादन लागत में कमी और लाभ में वृद्धि हुई है।

कारीगरों को मिल रहा सीधा बाजार और पहचान

सीईओ खादी एवं ग्रामोद्योग माटीकला बोर्ड के महाप्रबंधक ने बताया कि योगी सरकार के समग्र समर्थन से कारीगर अब सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ पा रहे हैं।
मेलों में आने वाले खरीदारों ने स्थानीय शिल्प और पारंपरिक उत्पादों को उत्साहपूर्वक अपनाया, जिससे कारीगरों की आय में बढ़ोतरी और माटीकला उत्पादों की ब्रांड वैल्यू में वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में इन मेलों का दायरा और अधिक जिलों, विशेष रूप से आगरा जैसे प्रमुख शिल्प केंद्रों तक, विस्तार किया जाएगा ताकि उत्तर प्रदेश की माटीकला राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान बना सके।