आगरा में रिचर एग्रो क्रॉप इंडिया फ्रेंचाइजी विवाद- 15 लाख के लेनदेन पर घमासान, मामला कोर्ट में
आगरा में रिचर एग्रो क्रप इंडिया कंपनी की फ्रेंचाइजी को लेकर अमित और प्रतेन्द्र पाल के बीच 15 लाख रुपये के लेनदेन पर विवाद गहरा गया है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर धोखाधड़ी और धमकी के आरोप लगाते हुए मुकदमे दर्ज कराए हैं। पुलिस जांच पूरी कर रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल कर चुकी है और अब फैसला कोर्ट में लंबित है।
आगरा। आगरा में रिचर एग्रो क्रॉप इंडिया कंपनी के फ्रेंचाइजी अमित से चल रहा आर्थिक विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। इस मामले में अमित और प्रतेन्द्र पाल के बीच करीब 15 लाख रुपये के लेनदेन को लेकर गंभीर आरोप-प्रत्यारोप सामने आए हैं। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए हैं और फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
प्रतेन्द्र पाल ने आरोप लगाया है कि फ्रेंचाइजी और माल देने के नाम पर उनसे बड़ी रकम ली गई और कूटरचित दस्तावेज दिखाकर धोखाधड़ी की गई। उनका कहना है कि पैसा वापस मांगने पर अमित, रजनी और अन्य आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। इस शिकायत के आधार पर थाना एकता में मुकदमा दर्ज किया गया है और पुलिस जांच में जुटी है।
वहीं दूसरी ओर, अमित ने भी 20 जनवरी 2026 को न्यायालय के माध्यम से प्रतेन्द्र पाल और नरेंद्र सिंह सहित अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की, जिसकी रिपोर्ट विवेचनाधिकारी द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत की जा चुकी है।
अमित का दावा है कि उन्होंने प्रतेन्द्र पाल और उनके साथियों को लगभग 7 लाख रुपये का मटेरियल दिया था, साथ ही 5.5 लाख रुपये बैंक खाते में ट्रांसफर किए थे। उनके अनुसार, इन सभी लेनदेन के पुख्ता साक्ष्य उनके पास मौजूद हैं। अमित का कहना है कि उल्टा उनका करीब ढाई लाख रुपये बकाया निकल रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि जिन स्थानों पर माल रखा गया, उसका रेंट एग्रीमेंट, फोटो और वीडियो सहित अन्य दस्तावेज उनके पास हैं। इसके अलावा कुछ गोपनीय साक्ष्य भी मौजूद हैं, जिन्हें वे न्यायालय में प्रस्तुत करेंगे। अमित का यह भी आरोप है कि करीब 5.6 लाख रुपये के माल में से लगभग 2 लाख रुपये का सामान प्रतेन्द्र पाल पक्ष अपने गांव ले गया।
इस पूरे मामले में पुलिस अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल कर चुकी है। अब अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा ही लिया जाएगा कि किस पक्ष के आरोप सही हैं और किसके नहीं।