शास्त्र सिद्ध निर्णय: आज दो मार्च को ही होगा होलिका दहन, ग्रहण-भद्रा के बीच धर्मसिंधु का स्पष्ट वचन

आगरा। फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी, प्रदोष काल और पूर्णिमा-भद्रा की जटिल स्थिति के बीच होलिका दहन की तिथि को लेकर चल रहे संशय पर शास्त्रों ने अंतिम और निर्णायक उत्तर दे दिया है। धर्मसिंधु ग्रन्थ के स्पष्ट वचनानुसार वर्ष 2026 में होलिका दहन आज (2 मार्च, सोमवार को) प्रदोष काल में ही करना पूर्णत: शास्त्रसम्मत होगा।

Mar 2, 2026 - 13:18
 0
शास्त्र सिद्ध निर्णय: आज दो मार्च को ही होगा होलिका दहन, ग्रहण-भद्रा के बीच धर्मसिंधु का स्पष्ट वचन

तिथि-निर्णय का शास्त्रीय आधार

दैवज्ञ पं. बृज मोहन दीक्षित ने बताया कि 2 मार्च 2026 को फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी के दिन प्रदोष काल में पूर्णिमा व्याप्त है तथा पूर्ण रात्रि भद्रा का प्रभाव भी है।
दूसरे दिन 3 मार्च को पूर्णिमा सूर्यास्त से पूर्व समाप्त हो रही है, साथ ही पूर्णिमा की व्याप्ति साढ़े तीन प्रहर से अधिक है और प्रतिपदा तिथि वृद्धिगामी है। सामान्य स्थिति में ऐसे योग में होलिका दहन पूर्णिमा को किया जाता है, किन्तु इस वर्ष 3 मार्च को ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण होने से और पूर्णिमा का ग्रहणकाल में ही समाप्त होना, शास्त्रीय नियम बदल देता है।

धर्मसिंधु ग्रन्थ का निर्णायक वचन

इदं चन्द्रग्रहणसत्त्वे वेधमध्ये कार्यम्।
ग्रस्तोदये परदिने प्रदोषे पूर्णिमासत्त्वे ग्रहणमध्य एव कार्यम्।
अन्यथा पूर्वदिने।

अर्थात जब पूर्णिमा ग्रहण से ग्रस्त हो, तो होलिका दहन पूर्व दिन ही किया जाना चाहिए। इसी कारण इस बार 3 मार्च को नहीं, बल्कि 2 मार्च को होलिका दहन करना ही धर्मानुकूल है।

ये हैं होलिका दहन के मुहूर्त

भद्रा अवधि: प्रातः 05:55 बजे (2 मार्च) से 05:29 बजे (3 मार्च) तक।

नियम: भद्रा का मुख त्याग कर, सूर्यास्त से 2 घंटे 24 मिनट के भीतर दहन करें।

श्रेष्ठ मुहूर्त
शाम 06:20 बजे से रात्रि 08:44 बजे तकष

यह समय होलिका दहन, अग्नि प्रज्वलन, होलिका पूजन और भक्तिपूर्ण परिक्रमा के लिए सर्वोत्तम है।

Top of Formहोलिका दहन असत्य, अहंकार और अधर्म के दहन का प्रतीक है। यह पर्व भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति और ईश्वर की कृपा का स्मरण कराता है। अग्नि में नारियल, गेहूं की बालियाँ, उपले अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

होलिका दहन के अगले दिन रंगों का महापर्व होली हर्षोल्लास, भाईचारे और सामाजिक समरसता का संदेश देता है। हालांकि रंगों की होली इस बार 4 मार्च को खेली जाएगी। यह पर्व वैमनस्य को भुलाकर प्रेम और उल्लास के रंगों में सराबोर होने का अवसर है।

SP_Singh AURGURU Editor