आगरा के स्मारकों की सुरक्षा सवालों में, एडवोकेट केसी जैन ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, कदम न उठाये तो धरोहरें खतरे का अड्डा बन जाएंगी

आगरा के अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता केसी जैन ने देश के आगरा के ऐतिहासिक स्मारकों की बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर बड़ा मुद्दा उठाया है। फतेहपुर सीकरी स्मारक में हुई जघन्य घटना का हवाला देते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब केवल औपचारिक सुरक्षा नहीं, बल्कि ठोस और सख्त सुधार की तत्काल जरूरत है।

May 3, 2026 - 20:25
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आगरा के स्मारकों की सुरक्षा सवालों में, एडवोकेट केसी जैन ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, कदम न उठाये तो धरोहरें खतरे का अड्डा बन जाएंगी

आगरा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा देश भर के संरक्षित स्मारकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए के.सी. जैन एडवोकेट ने प्रधानमंत्री को एक विस्तृत पत्र भेजा है।

पत्र में उन्होंने फतेहपुर सीकरी में 19 वर्षीय छात्रा के साथ दिनदहाड़े हुई रेप जैसी दर्दनाक घटना को एक चेतावनी बताया है। उनका कहना है कि यह केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि पूरे देश के स्मारकों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने वाला मामला है।

अब औपचारिकता नहीं, चाहिए विशेष सुरक्षा बल

एडवोकेट के.सी. जैन ने सुझाव दिया है कि पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित प्रमुख स्मारकों के लिए एक विशेष सुरक्षा बल का गठन किया जाए, जो केवल तैनाती तक सीमित न रहकर सक्रिय गश्त करे और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई करे।

उन्होंने फतेहपुर सीकरी के अलावा ताजमहल, आगरा किला, एतमादुद्दौला और सिकंदरा जैसे प्रमुख स्थलों पर 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

सीसीटीवी और निगरानी तंत्र को आधुनिक बनाने पर जोर

पत्र में कहा गया है कि स्मारकों में अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया जाए, जो केवल प्रवेश द्वारों तक सीमित न रहकर पूरे परिसर, खासकर सुनसान और संवेदनशील क्षेत्रों को कवर करे। इसके लिए केंद्रीकृत कंट्रोल रूम बनाया जाए, जहां प्रशिक्षित कर्मचारी लगातार निगरानी रखें।

श्री जैन ने महिला पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर विशेष प्रावधानों की मांग की है। उन्होंने हर बड़े स्मारक में महिला सुरक्षाकर्मियों की तैनाती, पैनिक बटन, हेल्पलाइन और सहायता केंद्र स्थापित करने की आवश्यकता बताई।

कानूनी और प्रशासनिक सुधार जरूरी

उन्होंने 1958 के प्राचीन स्मारक कानून में संशोधन कर एएसआई को स्वतंत्र और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने का अधिकार देने की बात कही है। साथ ही स्थानीय पुलिस और एएसआई के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत भी बताई, ताकि आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों पर नजर रखी जा सके।

पत्र में यह भी सुझाव दिया गया है कि सभी प्रमुख स्मारकों का नियमित सुरक्षा ऑडिट कराया जाए, जिससे कमजोर क्षेत्रों और संभावित खतरों की पहचान कर समय रहते सुधार किए जा सकें। पर्यटकों को टिकट, सूचना बोर्ड और डिजिटल माध्यमों के जरिए सुरक्षा संबंधी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए।

अब कार्रवाई का समय

एडवोकेट केसी जैन ने स्पष्ट कहा है कि भारत के ऐतिहासिक स्मारक देश की पहचान और गौरव हैं। यदि यहां आने वाले पर्यटक, विशेषकर महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करेंगी, तो यह देश की छवि और पर्यटन दोनों के लिए गंभीर खतरा होगा। उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल प्रभाव से सख्त सुरक्षा व्यवस्था, आधुनिक तकनीक और मजबूत कानूनी ढांचे को लागू करने की मांग की है।

SP_Singh AURGURU Editor