आगरा में डॉ. शेषपाल सिंह ‘शेष’ की मुक्त-मणि माला’ और राज फौजदार की ‘दोहादित्य’ समेत छह कृतियों का एक साथ लोकार्पण, बाल साहित्य की भूमिका पर हुआ सार्थक विमर्श

आगरा। साहित्य की विभिन्न विधाओं में बाल रचनाओं के सृजन की बढ़ती आवश्यकता को रेखांकित करता एक महत्वपूर्ण साहित्यिक आयोजन आगरा में सम्पन्न हुआ। युवा समाजसेविका श्रीमती प्रीति फौजदार द्वारा स्थापित एवं संचालित सामाजिक संस्था ‘यस वी कैन’ के तत्वावधान में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शेषपाल सिंह ‘शेष’ की एक तथा बहुआयामी साहित्य साधिका श्रीमती राज फौजदार की छह (कुल सात पुस्तकों) का एक साथ लोकार्पण किया गया।

Feb 26, 2026 - 14:12
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आगरा में डॉ. शेषपाल सिंह ‘शेष’ की मुक्त-मणि माला’ और राज फौजदार की ‘दोहादित्य’ समेत छह कृतियों का एक साथ लोकार्पण, बाल साहित्य की भूमिका पर हुआ सार्थक विमर्श
यस वी कैन संस्था के बैनर तले श्रीमती राज फौजदार और डॉ. शेषपाल सिंह ‘शेष’ की साहित्यिक कृतियों का लोकार्पण करते डॉ. आर. एस. तिवारी ‘शिखरेश’, डॉ. ब्रज बिहारी लाल ‘बिरजू’, डॉ. सुषमा सिंह, प्रो. बीना शर्मा एवं अन्य वरिष्ठ साहित्यकार।

यह आयोजन हरीश नगर, सिकंदरा स्थित श्रीमती राज फौजदार के आवास पर देश और शहर के साहित्यकारों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।

लोकार्पित कृतियों में देश के अग्रणी बाल साहित्यकार डॉ. शेषपाल सिंह ‘शेष’ की संस्कृत श्लोकों के काव्यात्मक भावार्थ पर आधारित पुस्तक ‘मुक्त-मणि माला’ तथा श्रीमती राज फौजदार की 730 दोहों की महत्वपूर्ण कृति ‘दोहादित्य’ के साथ-साथ उनकी पांच बाल साहित्य कृतियां- ‘किस्सा कोटर का’, ‘चलें गांव की ओर’, ‘चूहे की शादी’, ‘चटपटी बाल पहेलियां’ और ‘कोयल काकी’ शामिल रहीं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. आर. एस. तिवारी ‘शिखरेश’ ने इन कृतियों को बच्चों के मनोविज्ञान को स्पर्श करने वाली सरल, प्रभावी और संवेदनशील अभिव्यक्ति बताते हुए कहा कि बाल साहित्य ही सशक्त समाज की नींव है।

मुख्य अतिथि, वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रख्यात गीतकार डॉ. देवेंद्र तोमर (मुरैना) ने ‘किस्सा कोटर का’ पर चर्चा करते हुए कहा कि पक्षियों के जीवन से जुड़े इतने जीवंत, रोचक और ज्ञानवर्धक किस्सों का ऐसा प्रस्तुतीकरण विरल है, जो बच्चों को सहज ही प्रकृति से जोड़ देता है।

विशिष्ट अतिथि, आरबीएस कॉलेज की पूर्व प्राचार्य डॉ. सुषमा सिंह ने कहा कि श्रीमती राज फौजदार की बाल रचनाएं बच्चों की जिज्ञासा वृत्ति को बढ़ाने वाली, कल्पनाशील और चमत्कृत करने वाली हैं। विशेष रूप से चटपटी बाल पहेलियाँ बच्चों की सोच और रचनात्मकता को नया आयाम देती हैं।

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. ब्रज बिहारी लाल ‘बिरजू’ ने ‘दोहादित्य’ की समीक्षा करते हुए श्रीमती राज फौजदार को एक बहुआयामी साहित्य साधिका बताया, जिनकी लेखनी में ईमानदारी और सामाजिक सरोकार स्पष्ट झलकते हैं। वहीं ‘मुक्त-मणि माला’ पर उन्होंने कहा कि डॉ. शेष ने भारतीय ज्ञान परंपरा का उपदेशपरक और स्मरणीय संयोजन काव्य रूप में प्रस्तुत कर सराहनीय कार्य किया है।

देश के अग्रणी बाल साहित्यकार डॉ. शेषपाल सिंह ‘शेष’ ने अपने उद्बोधन में कहा कि साहित्य की सभी विधाओं में बाल रचनाओं का सृजन आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने अन्य साहित्यकारों से भी आह्वान किया कि वे बच्चों के लिए काव्य, कहानी, निबंध और पहेलियों जैसी विधाओं में रचनात्मक लेखन करें, ताकि बालक कल्याणकारी और मूल्यपरक मार्ग अपना सकें।

विशिष्ट अतिथियों में केंद्रीय हिंदी संस्थान की पूर्व निदेशक प्रो. बीना शर्मा एवं श्रीमती निवेदिता दिनकर ने भी लोकार्पित कृतियों की मुक्त कंठ से सराहना की।

इस अवसर पर डॉ. राजेंद्र मिलन, डॉ. राजीव शर्मा ‘निस्प्रह’, रामेंद्र शर्मा ‘रवि’, रेनू उपाध्याय, एस.एन. शर्मा, आचार्य उमाशंकर पाराशर, संजय गुप्त, प्रभु दत्त उपाध्याय, रवींद्र वर्मा, राकेश निर्मल, राम अवतार शर्मा, डॉ. अखिलेश शुक्ल, अशोक गोयल, रेखा अग्रवाल, विजया तिवारी, डॉ. आभा चतुर्वेदी, दुर्गेश शर्मा, श्रीमती कमला देवी और नीनू गर्ग सहित अनेक साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं की बानगी प्रस्तुत कर वातावरण को भाव-विभोर कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमती रमा वर्मा ‘श्याम’ द्वारा मां शारदे की वंदना से हुआ। कार्यक्रम संयोजन अशोक फौजदार, अलका शर्मा, एडवोकेट संजय कुमार, नंद नंदन गर्ग एवं शरद गुप्त द्वारा किया गया। संचालन कुमार ललित ने किया तथा आभार प्रदर्शन कर्नल वैभव फौजदार ने किया।

SP_Singh AURGURU Editor