स्मार्ट मीटर विवाद गरमाया, किसानों का एमडी ऑफिस पर प्रदर्शन का ऐलान

आगरा के कागारौल क्षेत्र में बिजली विभाग द्वारा 12 ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमे के खिलाफ किसानों में भारी आक्रोश है। आरोप है कि निर्दोष लोगों को फंसाया गया है। स्मार्ट मीटर को लेकर चल रहे विरोध के बीच यह विवाद बढ़ा है। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि मुकदमे वापस नहीं हुए तो दक्षिणांचल एमडी कार्यालय पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

May 2, 2026 - 22:03
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स्मार्ट मीटर विवाद गरमाया, किसानों का एमडी ऑफिस पर प्रदर्शन का ऐलान
स्मार्ट मीटर फेंके जाने का फाइल फोटो।

12 ग्रामीणों पर मुकदमे से भड़के किसान बड़े आंदोलन की तैयारियों में जुटे किसान 

आगरा। आगरा जनपद के ग्रामीण क्षेत्र में बिजली विभाग के खिलाफ किसानों और आम जनता का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। किसानों ने आरोप लगाया है कि विभाग ने निर्दोष लोगों को निशाना बनाते हुए थाना कागारौल में झूठे मुकदमे दर्ज कराए हैं। इसको लेकर क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है और अब इसे लेकर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

किसान नेताओं का कहना है कि जिन 12 ग्रामीणों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, उनमें से कई लोग घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे, फिर भी उनके नाम रिपोर्ट में शामिल कर दिए गए। इसे किसानों ने अन्यायपूर्ण और दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई बताया है।

स्मार्ट मीटर बना विवाद की जड़

ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर तेज गति से चल रहे हैं, जिससे बिजली बिल अधिक आ रहा है। इसी के विरोध में अकोला बिजलीघर पर धरना-प्रदर्शन किया जा रहा था। किसान नेता सोमवीर यादव का कहना है कि जो लोग इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे, उनका नाम मुकदमे में नहीं है, जबकि आम और निर्दोष लोगों को फंसा दिया गया है।

मीटर तोड़ने की घटना पर भी उठे सवाल

घटना के दौरान कुछ मीटरों को फीडर पर लाकर तोड़ने की बात सामने आई है। इस पर किसान नेताओं ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना गलत है और इसकी जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि अगर विरोध करना था तो शांतिपूर्ण तरीके से धरना, प्रदर्शन या अनशन किया जा सकता था।

आंदोलन की चेतावनी

किसान नेता श्याम सिंह चाहर, सोमवीर यादव और मुकेश पाठक समेत कई नेताओं ने स्पष्ट कहा है कि यदि 12 बेकसूर ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो जल्द ही दक्षिणांचल के एमडी कार्यालय पर बड़ा धरना-प्रदर्शन और आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इस दौरान किसी भी स्थिति की जिम्मेदारी बिजली विभाग और जिला प्रशासन की होगी। नेताओं ने एक स्वर में कहा कि किसानों और गरीब परिवारों के खिलाफ की गई कार्रवाई पूरी तरह गलत है और इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।