सुप्रीम कोर्ट से टीएमसी को झटका, मतगणना के लिए केंद्रीय कर्मियों की तैनाती मामले में दखल से किया इनकार, चुनाव आयोग का फैसला नियमों के दायरे में
जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग का फैसला पूरी तरह से नियमों के दायरे में है।
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले तृणमूल कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. मतगणना में केंद्र सरकार के कर्मचारियों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में कोई आदेश देने की ज़रूरत नहीं है। जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग का फैसला पूरी तरह से नियमों के दायरे में है।
तृणमूल की याचिका पर सुनवाई के लिए शनिवार को विशेष रूप से दोनों जज बैठे थे। तृणमूल कांग्रेस की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग पर मनमानी का आरोप लगाया लेकिन बेंच ने इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने साफ किया कि मतगणना के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति चुनाव आयोग का अधिकार है।
बेंच के अध्यक्ष जस्टिस बागची ने कहा, "चुनाव आयोग के सर्कुलर में ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि कर्मचारी सिर्फ केंद्र का ही होगा लेकिन अगर वह ऐसा लिख भी देते, तब भी हम उन्हें गलत नहीं कहते।" जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि मतगणना केंद्र में सीसीटीवी कैमरा होगा, वहां राजनीतिक पार्टियों के एजेंट होंगे। ऐसे में याचिकाकर्ता की आशंका का कोई आधार नहीं है।
इसके बाद चुनाव आयोग की तरफ से वरिष्ठ वकील डी एस नायडू ने बोलना शुरू किया। नायडू ने कहा कि पूरी याचिका निराधार आशंकाओं के तहत दाखिल की गई है। चुनाव आयोग के सर्कुलर में ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि मतगणना में राज्य सरकार के कर्मचारियों की कोई भूमिका ही नहीं होगी। यहां तक कि मतगणना कर्मचारियों की नियुक्ति जो रिटर्निंग ऑफिसर करेगा, वह भी राज्य सरकार का ही अधिकारी होता है।
आयोग के वकील ने कहा कि पूरा काम नियमों के मुताबिक हो रहा है। सर्कुलर में लिखी गई सभी बातों का पालन होगा और उसी आधार पर कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। इसके बाद कोर्ट ने कहा, "इस मामले में किसी आदेश की ज़रूरत नहीं है। चुनाव आयोग ने कहा है कि सर्क्युलर का पूरी तरह पालन होगा।"
इससे पहले, तृणमूल कांग्रेस ने यही याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट में दायर की थी। 30 अप्रैल को हाई कोर्ट ने उसकी दलीलों को खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि मतगणना के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है। अगर मतगणना में कोई गड़बड़ी होती है, तो इसके लिए बाद में याचिका दाखिल हो सकती है। सिर्फ आशंकाओं के आधार पर कोई आदेश नहीं दिया जाएगा।